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नौतपा की तपती धूप में घर में दुबके लोग

खुद को बचाने की जद्दोजहद, सिरदर्द, चक्कर और निर्जलीकरण जैसी शिकायतें आम

नई दिल्ली। नौतपा की तेज धूप और उमस ने शहरी तथा ग्रामीणों की दिनचर्या बदल दी है। खेतों में निर्जीव पड़ी फसलें, खाली चौपालें और बाजारों में आवागमन कम — गर्मी ने जनजीवन पर अपना अप्रत्यक्ष परचम लहरा दिया है।नौतपा में सूने रास्तों पर धूल उड़ रही है और घरों की चौखटों के भीतर लोग बाहर की तपिश से खुद को बचाने की जद्दोजहद में है। 

तमाम घरों की खिड़कियाँ बंद हैं, बच्चे शाम होते‑होते बाहर निकलते हैं, और कामकाजी लोग दोपहर में काम से परहेज़ कर रहे हैं। स्थानीय दुकानदार अनुरोध कर रहे हैं कि बस और ऑटो में कूलर की व्यवस्था बढ़े ताकि यात्रियों को राहत मिले। स्वास्थ्य केंद्रों पर केवल उन लोगों की भीड़ दिख रही है जिन्हें असहनीय गर्मी से अस्वस्थता हुई है — सिरदर्द, चक्कर और निर्जलीकरण जैसी शिकायतें आम हैं।

गांव के बुजुर्ग जंगी प्रसाद कहते हैं, "सुबह‑सुबह ही काम निबटा लेते है अब दोपहर की धूप में कोई खेत में नहीं रहता। बच्चे औरतें घरों में ही छिप जाती हैं।" वहीं स्कूलों में भी समय बदला गया है; कई जगह दोपहर में कक्षाएँ स्थगित कर दी गईं हैं ताकि बच्चे तेज धूप से बच सकें।

खेतों में फोटो‑विषम दृश्य दिखाई देते हैं: गेंहूँ की कटाई के बाद बचे पाई‑पत्ते सुख रहे हैं, पर सब्जी तथा ताजा फसलें पानी की कमी और उच्च तापमान के कारण मुरझा रही हैं। स्थानीय किसान पिंटू पाल बताते हैं, "नलकूपों का पानी कम है और बिजली कटौती के कारण पंप नहीं चल पाते। सिंचाई बाधित होने से फसल पर असर पड़ेगा और लागत बढ़ेगी।"

स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नर्स सुनीता ने बताया कि गर्मी के कारण निर्जलीकरण और हीट‑स्ट्रोक के केस बढ़ रहे हैं। बुजुर्ग, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं ज्यादा संवेदनशील हैं। स्वास्थ्य केंद्र की सिफारिशें: पानी का अधिक सेवन, हल्का भोजन, तेज धूप में बाहर न निकलना, और अगर चक्कर या उल्टी हो तो तुरंत नज़दीकी चिकित्सा केन्द्र से संपर्क करना।

बिजली व सार्वजनिक सुविधाएँ
बिजली कटौती और नेटवर्क की अनियमितताएँ भी लोगों की दिक्कत बढ़ा रही हैं। एक किशोर‑उद्योगी दुकानदार सुरेश यादव कहते हैं, "कूलर व पंखे बंद होने पर ग्राहक भी दुकान पर नहीं आते। रात में भी तापमान उन्नत होने से नींद कम हो रही है।" नगर पंचायत को कई लोगों ने शिकायत दी है कि पेयजल टैंकर समय पर नहीं पहुँच रहे और सार्वजनिक शेड/शेल्टर कम हैं।

सरकारी पहल और सुझाव
जिला अधिकारियों ने कहा है कि वे स्थिति पर नजर रख रहे हैं और अगर तापमान और अधिक बढ़ा तो राहत शिविर व पानी टैंकर मुहैया कराए जाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जलपान केंद्रों पर ठंडा पानी उपलब्ध कराने और स्कूलों में गर्मी से जुड़े निर्देश जारी करने को कहा है। बिजली विभाग ने बताया कि पीक‑घंटों में लोड‑शेडिंग को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।

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