डीडीयू नगर, चंदौली, 18 सितंबर 2026। पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल ने रेल संरक्षा और तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वकर्मा पूजा के दिन 17 सितंबर को विद्युत लोको शेड, डीडीयू में 150वें इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव पर स्वदेशी कवच (Automatic Train Protection) प्रणाली की स्थापना पूरी कर ली गई। इसके साथ ही शेड में अब तक कुल 150 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव कवच प्रणाली से सुसज्जित हो चुके हैं।

150वें लोकोमोटिव में कवच स्थापना पूरी होने के अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना विद्युत लोको शेड में मौजूद रहे। उन्होंने इस उपलब्धि पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। इस मौके पर कवच प्रणाली की स्थापना से जुड़े कार्यों की प्रगति और रेल संरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।

रेल परिचालन में सुरक्षा के लिए स्वदेशी तकनीक

भारतीय रेल द्वारा विकसित कवच एक स्वदेशी Automatic Train Protection प्रणाली है। इसे ट्रेन परिचालन के दौरान रेल संरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह प्रणाली लोको पायलट को सिग्नल और निर्धारित गति के अनुपालन में तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

निर्धारित परिस्थितियों में कवच चेतावनी देने के साथ स्वचालित ब्रेकिंग जैसी सुविधाओं के माध्यम से ट्रेन परिचालन की संरक्षा को मजबूत करने में सहायक होता है। इस तकनीक का उद्देश्य ट्रेन संचालन के दौरान संभावित जोखिम वाली परिस्थितियों से निपटने में अतिरिक्त तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है।

150वें लोकोमोटिव में स्थापना बना महत्वपूर्ण पड़ाव

विद्युत लोको शेड, डीडीयू में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव पर कवच प्रणाली की स्थापना का कार्य लगातार किया जा रहा है। अब 150वें इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में कवच की स्थापना पूरी होने के साथ इस कार्य ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है।

विश्वकर्मा पूजा के दिन यह उपलब्धि हासिल होने से इसका विशेष महत्व भी रहा। रेलवे में तकनीकी कार्यों और आधुनिक उपकरणों के उपयोग से जुड़े इस अवसर पर 150वें लोकोमोटिव को कवच से सुसज्जित किया गया। इससे शेड में कवच प्रणाली से लैस इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की संख्या 150 हो गई है।

दो रेलखंडों में करीब 100 कवच युक्त ट्रेनों का परिचालन

डीडीयू मंडल के अंतर्गत वर्तमान में गंजख्वाजा–भभुआ रोड और सासाराम–पहलेजा सेक्शन में प्रतिदिन कवच प्रणाली युक्त लगभग 100 ट्रेनों का आवागमन हो रहा है। इन रेलखंडों में कवच प्रणाली से सुसज्जित लोकोमोटिव के उपयोग के माध्यम से आधुनिक ट्रेन सुरक्षा तकनीक का परिचालन में इस्तेमाल किया जा रहा है।

कवच प्रणाली के विस्तार से इन सेक्शनों में ट्रेन संचालन के दौरान आधुनिक तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था का उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। डीडीयू मंडल में कवच से लैस इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की संख्या बढ़ने के साथ इस तकनीक के उपयोग का दायरा भी आगे बढ़ रहा है।

लोकोमोटिव, ट्रैक और सिग्नल से जुड़ी जानकारी का आदान-प्रदान

कवच एक स्वचालित ट्रेन संरक्षा प्रणाली है, जो लोकोमोटिव, ट्रैक पर लगे उपकरणों तथा स्टेशन और इंटरलॉक्ड रेलवे क्रॉसिंग गेट जैसे स्थिर स्थानों पर लगे उपकरणों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के आधार पर काम करती है।

यह प्रणाली ट्रेन की गति, स्थिति और सिग्नल से संबंधित जानकारी के आधार पर लोको पायलट को चेतावनी देने में सहायता करती है। निर्धारित परिस्थितियों में स्वतः ब्रेक लगाने में भी यह प्रणाली मदद करती है। इससे सिग्नल पार करने और टक्कर जैसी जोखिमपूर्ण परिस्थितियों से बचाव में सहायता मिलती है।

तकनीकी आधुनिकीकरण पर जोर

डीडीयू विद्युत लोको शेड द्वारा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में कवच प्रणाली की स्थापना का कार्य लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। 150वें लोकोमोटिव में स्थापना पूरी होना इस दिशा में अब तक की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।

कवच जैसी स्वदेशी तकनीक का विस्तार भारतीय रेल में तकनीकी आधुनिकीकरण और रेल संरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डीडीयू मंडल में भी आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग के माध्यम से सुरक्षित और सुचारु ट्रेन परिचालन को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

विश्वकर्मा पूजा के दिन 150वें इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में कवच स्थापना पूरी होने के साथ डीडीयू विद्युत लोको शेड ने इस तकनीकी अभियान में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है। आने वाले समय में भी लोकोमोटिव में कवच प्रणाली की स्थापना का कार्य जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है।