चंदौली। सकलडीहा पी.जी. कॉलेज, चंदौली में समाजशास्त्र विभाग एवं पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘विकसित भारत @2047: चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ’ विषय पर 21 एवं 22 सितंबर 2026 को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विषय विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों की सहभागिता होगी। इस दौरान विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़े सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और तकनीकी पहलुओं पर अकादमिक एवं शोधपरक मंथन किया जाएगा।

संगोष्ठी के आयोजन को लेकर शनिवार को सकलडीहा पीजी कॉलेज में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पाण्डेय ने संगोष्ठी के उद्देश्य और विषय-वस्तु की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक विमर्श और दूरदर्शी सोच की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।

प्राचार्य ने कहा कि विकसित भारत @2047 केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह समावेशी, आत्मनिर्भर, ज्ञान-आधारित और सामाजिक रूप से सशक्त भारत के निर्माण की व्यापक संकल्पना है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए शिक्षा, सामाजिक संरचना, संस्कृति, तकनीकी विकास और आर्थिक व्यवस्था सहित विभिन्न क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है। संगोष्ठी में इन्हीं पहलुओं को केंद्र में रखते हुए वर्तमान चुनौतियों और उपलब्ध संभावनाओं पर विशेषज्ञों के विचार सामने आएंगे।

दो दिवसीय आयोजन के दौरान विभिन्न अकादमिक सत्रों का आयोजन किया जाएगा। इन सत्रों में समाज, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, संस्कृति, तकनीक, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तीकरण, युवा शक्ति, सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ एवं शिक्षाविद अपने विचार रखेंगे। इन विषयों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर शोधपरक चर्चा के साथ विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए संभावित रास्तों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

संगोष्ठी में शोधार्थियों और विद्यार्थियों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी। प्रतिभागियों को अपने शोध-पत्र प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के समकालीन विषयों पर अपने विचार एवं शोध प्रस्तुत करने के साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों के साथ अकादमिक संवाद का अवसर प्राप्त होगा।

संगोष्ठी संयोजक प्रो. दयाशंकर सिंह यादव ने कहा कि सकलडीहा पीजी कॉलेज की ओर से समय-समय पर शैक्षणिक एवं राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी भी विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को समकालीन राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध एवं अकादमिक संवाद को बढ़ावा मिलता है। साथ ही विद्यार्थियों को देश के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को व्यापक दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिलता है। ‘विकसित भारत @2047’ जैसे व्यापक विषय पर होने वाला यह आयोजन विभिन्न क्षेत्रों के विचारों और शोध को एक साझा मंच प्रदान करेगा।

प्रेस वार्ता के दौरान संगोष्ठी के आयोजन, विषय-वस्तु और विभिन्न सत्रों को लेकर जानकारी दी गई। महाविद्यालय की ओर से बताया गया कि दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शिक्षाविद, शोधकर्ता, विशेषज्ञ एवं विद्यार्थी सहभागिता करेंगे।

प्रो. दयाशंकर सिंह यादव ने पत्रकारों से संगोष्ठी की गतिविधियों और इससे जुड़े विचारों को व्यापक स्तर पर जनसामान्य तक पहुंचाने में सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना को लेकर शैक्षणिक संस्थानों में होने वाला संवाद समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचना आवश्यक है, ताकि राष्ट्रीय विकास से जुड़े विषयों पर व्यापक समझ और विचार-विमर्श का वातावरण तैयार हो सके।


सकलडीहा पीजी कॉलेज में आयोजित होने वाली यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 21 और 22 सितंबर को ‘विकसित भारत @2047: चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ’ विषय के विभिन्न आयामों पर केंद्रित रहेगी। आयोजन में शिक्षा, समाज, अर्थव्यवस्था, संस्कृति, तकनीक और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों के विचार सामने आएंगे।