चकिया/चंदौली। पथरहवा माइनर के गरला जैनकुंड के पास शनिवार को पानी के तेज बहाव की चपेट में आने से दो भैंसों की मौत हो गई। दोनों भैंसें पानी पीने के लिए माइनर में उतरी थीं। इसी दौरान सिंचाई विभाग का गेट खुलने के कारण पानी का बहाव तेज हो गया और दोनों भैंसें बहते हुए गेट में फंस गईं। हादसे में दोनों पशुओं की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर पहुंचे ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली।
हादसे में गरला निवासी पशुपालक बृजेश यादव पुत्र श्याम सुंदर यादव को करीब दो लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। बताया गया कि मृत दोनों भैंसें पशुपालक की आजीविका का प्रमुख साधन थीं। एक साथ दो भैंसों की मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पशुपालक के लिए यह नुकसान इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि पशुओं के माध्यम से होने वाली आय परिवार के भरण-पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी।घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों के अनुसार, पानी पीने के लिए माइनर में उतरी भैंसें अचानक तेज हुए पानी के बहाव की चपेट में आ गईं। पानी की धार दोनों पशुओं को बहाकर सिंचाई विभाग के गेट तक ले गई, जहां वे फंस गईं। काफी प्रयास के बावजूद दोनों भैंसों को बचाया नहीं जा सका।
घटना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई विभाग के गेट से पानी छोड़ने के दौरान पानी के बहाव और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि माइनर के आसपास ग्रामीण अपने पशुओं को पानी पिलाने के लिए आते-जाते रहते हैं। ऐसे में गेट संचालन के दौरान अचानक तेज बहाव होने से इस तरह की घटनाओं का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पानी के बहाव को नियंत्रित करने और गेट संचालन के दौरान आसपास मौजूद लोगों तथा पशुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां बरती जानी चाहिए। ग्रामीणों के मुताबिक, यदि पानी का बहाव अचानक नहीं बढ़ता तो दोनों भैंसों को बचाया जा सकता था।
पीड़ित पशुपालक बृजेश यादव ने घटना की सूचना सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी। साथ ही आर्थिक क्षति की भरपाई के लिए तहसील प्रशासन का भी ध्यान मामले की ओर आकृष्ट कराया। पशुपालक ने प्रशासन से उचित आर्थिक मुआवजा दिलाने की मांग की है। उसका कहना है कि दोनों भैंसें उसकी रोजी-रोटी का प्रमुख साधन थीं। दोनों पशुओं की मौत से परिवार की आय पर सीधा असर पड़ा है और उसके सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
घटना के करीब तीन घंटे बाद भी सिंचाई विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने तथा पीड़ित पशुपालक को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के गेट संचालन की व्यवस्था की जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए माइनर के गेट से पानी छोड़े जाने के दौरान सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए जाने चाहिए। साथ ही आसपास के ग्रामीणों और पशुपालकों को पानी का बहाव बढ़ने की स्थिति में सतर्क करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
दो भैंसों की मौत के बाद अब पीड़ित पशुपालक और ग्रामीण प्रशासन की ओर देख रहे हैं। पशुपालक के सामने जहां दो लाख रुपये के करीब आर्थिक नुकसान की भरपाई की चुनौती है, वहीं ग्रामीण इस घटना के बाद सिंचाई विभाग के गेट संचालन की व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन को मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और पीड़ित पशुपालक को नियमानुसार सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग है कि घटना को गंभीरता से लेते हुए सिंचाई विभाग और तहसील प्रशासन संयुक्त रूप से मामले का संज्ञान लें। गेट संचालन में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में पशुओं और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अब सवाल यह है कि दो बेजुबान पशुओं की मौत के बाद सिंचाई विभाग और तहसील प्रशासन पीड़ित पशुपालक की आर्थिक क्षति की भरपाई के लिए क्या कदम उठाता है।
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