नहीं थम रही हत्या की घटनाएं, अपराधी दे रहे खुली चुनौती, कानून व्यवस्था तार तार
24 घंटे में हो हत्यारों की गिरफ्तारी, नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन
चन्दौली। क्या जिले में अपराध पूरी तरह से बेलगाम हो चुका है? हत्या की घटनाएं थमने का नाम ही नहीं ले रही।इंसानियत शर्मशार हो चुकी है और अपराधी बेखौफ होकर कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं। ताजा मामला जनपद के थाना मुगलसराय का है जहां मंगलवार की देर रात दवा व्यवसाई रोहितास पाल को अज्ञात बदमाशों द्वारा गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया है। जिससे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।
भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के वाराणसी मंडल युवा अध्यक्ष पिंटू पाल ने चंदौली पुलिस की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पापुलर मेडिकल के संचालक रोहितास की हत्या से पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया है और आक्रोश फैला हुआ है। हत्यारों की 24 घण्टे के अंदर गिरफ्तारी नहीं की गई तो वह बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
स्थिति में बदलाव नहीं हुआ तो श्रीलंका, पश्चिम बंगाल और नेपाल जैसे हालात भारत में भी होने में देर नहीं
किसान नेता पिंटू पाल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में शोषित, दलित, पिछड़ा अल्पसंख्यक समाज पर बहुतायत रूप से जुर्म और अत्याचार ढहाए जा रहे हैं। सरहद पर न जवान सुरक्षित है न घर पर किसान। बहन बेटियां न घर में सुरक्षित हैं न ही बाहर। जिसका राज है उसी की दुहाई है। यह सरकार पूरी तरह से गृह युद्ध कराने पर आमादा हो चुकी है। स्थिति में बदलाव नहीं हुआ तो श्रीलंका, पश्चिम बंगाल और नेपाल जैसे हालात भारत में भी होने में देर नहीं लगेगी।
अपराधियों की गिरफ्तारी न होना प्रशासन की बड़ी विफलता
किसान नेता पिंटू पाल ने रोहितास के परिजनों से मिलकर संवेदना जताया और कहा कि उनकी हत्या अत्यंत दुखद है। इस घटना ने पूरे व्यापार जगत, समाज और क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस दुख की घड़ी में व्यापार मंडल व किसान यूनियन उनके साथ है। अब तक अपराधियों की गिरफ्तारी न होना प्रशासन की बड़ी विफलता है।
आंदोलन की चेतावनी
किसान नेता पिंटू पाल चेताया कि यदि 24 घण्टे के अंदर अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो हम किसान यूनियन के लोग व्यापारी भाइयों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
क्या कर रही है पुलिस? कब रुकेगा यह खूनी खेल?
जिले में एक के बाद एक हत्याएं होनी आम बात हो गई है। सवाल यह उठता है कि पुलिस आखिर कब तक 'मौके पर पहुंचने और जांच जारी है' जैसे जुमले तक सीमित रहेगी। आम नागरिक डरे हुए हैं, पर अपराधियों के चेहरे पर शिकन तक नहीं। पुलिस मौके पर जाकर जांच पड़ताल में जुटी हुई है पर स्थानीय लोगों का गुस्सा अब उबाल पर है। लोग खुलकर कह रहे हैं कि अब डर कर जीने से बेहतर है आवाज उठाना।
लाचार कानून व्यवस्था या मिलीभगत?
रोहितास पाल की हत्या ने एक बार फिर दिखा दिया है कि चंदौली में कानून का नहीं अपराधियों का बोलबाला है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या पुलिस की कार्रवाई केवल दिखावा है? या कहीं न कहीं कोई अंदरूनी साजिश और लापरवाही जनपद में खूनी खेल को हवा दे रही हैं? अब देखना यह है कि क्या प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर एक और परिवार को न्याय के लिए दर दर भटकना पड़ेगा?
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