सावित्री ने समाज को नई दिशा दी और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता: रामसुभाष
चन्दौली। सदर ब्लॉक के रामपुर उर्फ करणपुर गांव में डॉ.भीमराव अंबेडकर सेवा समिति के तत्वावधान में प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारक एवं नारी शिक्षा की अग्रदूत सावित्रीबाई फुले की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं एवं पुरुषों की सहभागिता रही।
कार्यक्रम की शुरुआत सावित्रीबाई फुले के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर की गई। इसके पश्चात वक्ताओं ने उनके जीवन, संघर्ष और समाज के प्रति योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि रामसुभाष (पूर्व रेलवे विधि अधिकारी एवं लॉर्ड बुद्धा डॉ अंबेडकर सेवा समिति के प्रदेश मंत्री) ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में महिलाओं और दलितों की शिक्षा के लिए संघर्ष किया, जब समाज में महिलाओं की शिक्षा को लेकर कुरीतियाँ व्याप्त थीं। सावित्रीबाई फुले का जीवन आज भी महिला समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके बताए मार्ग पर चलकर ही सामाजिक समानता स्थापित की जा सकती है।फुले महिलाओं के सम्मान, अधिकार और शिक्षा की प्रतीक हैं।समाज को नई दिशा दी और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अंत में फुले के आदर्शों को अपनाने और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समरसता स्थापित करने पर जोर दिया।
समिति के अध्यक्ष प्रेम शंकर ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा दी और समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य किया।
कुंवर जाटव ने अपने उद्बोधन में कहा कि सावित्रीबाई फुले ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में कार्य किया बल्कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी आवाज उठाई। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी उनके विचारों को अपनाए।
जगदीश ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का संघर्ष यह सिखाता है कि शिक्षा ही समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। उन्होंने महिलाओं से शिक्षा को अपना सबसे मजबूत हथियार बनाने का आह्वान किया।
रामसूरज ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ जो लड़ाई लड़ी, वह आज भी प्रासंगिक है। उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाने की जरूरत है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, महिलाएं और युवा उपस्थित रहे।