हर्षोल्लास से मनाई गई फूले जयंती, जीवन संघर्षों पर डाला गया प्रकाश, उन्हें आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया गया

चंदौली,नौगढ़। क्षेत्र के पिपराही गांव में भारत की प्रथम शिक्षिका, ज्योति पूंज, स्त्री शिक्षा की अलख जगाने वाली राष्ट्रमाता सावित्री वाई फूले की जयन्ती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई.जिसमें वक्ताओं ने उनके जीवन संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए आम जनमानस को उन्हें आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया.

कार्यक्रम में मुख्य आतिथि भीम आर्मी जिलाध्यक्ष मास्टर रामचन्द्र राम ने छात्रों,महिलाओं और युवाओं में शिक्षा और संगठन के लिए जोश भरा और कहा कि माता साबित्री बाई फूले शुद्रों और नारियों की मुक्ति दाता थी.सावित्री बाई फूले जी ने सर्वप्रथम नारियों के लिए शिक्षा का दरवाजा खोली थी.नारी शिक्षा के लिए उन्हे घर भी छोड़ना पड़ा था. 

उनके उपर पत्थर, कीचड़, मैला की बारिस भी की गयी. वह दो साड़ियाँ साथ लेकर जाती थी पहली साड़ी गन्दा हो जाया करती थी तो पुनः दूसरी साड़ी पहन कर नारियों को शिक्षा देती थी.समाज में फैले अनेक कुरीतियों को समाप्त कर नारी जगत में एक मिशाल कायम की. शूद्र व नारी समाज उनका सदैव ऋणि रहेगा.

इस अवसर पर प्रधान ईशू मिया, पन्ना लाल भारती, अशोक कुमार, विजय भाषकर,रामधनी, अमरनाथ, निर्दोष कुमार, सशान्त, सुबाष, सर्वेश, राजू, विकास, सीमा, शान्ती, कुसुम सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पुरुष और बच्चे मौजूद रहे.
कार्यक्रम का संचालन मास्टर अवधेश कुमार भारती ने किया।