17 साल सेवा देने के बाद रसोईयां से निकाला, भीम आर्मी ने लिया संज्ञान
चंदौली जिले की तहसील नौगढ़ में एक अजीबोगरीब और मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सियासी रंजिश में एक विधवा की नौकरी भेंट चढ़ गई है। उसे 17 साल सेवा देने के बाद रसोईयां से निकाला गया है। हालांकि भीम आर्मी ने इसका संज्ञान ले लिया है। मामला तूल पकड़ रहा है।
रसोइया (कुकर) की भर्ती स्कूल मैनेजमेंट कमिटी (SMC) या ग्राम शिक्षा समिति द्वारा ग्राम पंचायत की खुली बैठक में होती है। इसमें प्रधानाध्यापक, ग्राम प्रधान और अभिभावक शामिल होते हैं। विधवा, तलाकशुदा या निराश्रित महिलाओं को प्राथमिकता मिलती है, जैसा कि पीड़िता कुमारी देवी के मामले में था। वर्ष 2008- 09 से मई 2025 तक 17 वर्ष निर्बाध काम करने के बाद ग्रीष्मावकाश के बाद उन्हें मास्टर साहब ने प्रधान पति के हवाले से हटा दिया।
प्रधान ने कहा कोर्ट से नौकरी लेलो, मैंने अपना काम कर दिया।
सियासी रंजिश की भेंट चढ़ी पीड़िता कुमारी देवी ने प्रधान पति रवि पाण्डेय पर सीधा आरोप लगाया है कि प्रधान ने कहा, "कोर्ट से नौकरी लेलो, मैंने अपना काम कर दिया। इसकी शिकायत बीईओ से लेकर डीएम तक की, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। पति के इलाज के लिए संपत्ति बेच चुकीं पीड़िता अब भूखमरी के कगार पर हैं।
भीम आर्मी का हस्तक्षेप
भीम आर्मी जिलाध्यक्ष मास्टर रामचंद्र राम ने जनकपुर प्राथमिक विद्यालय विधवा रसोइया कुमारी देवी के नौकरी से हटाए जाने के मामले में संज्ञान लिया है। अधिकारियों को निष्पक्ष जांच की चेतावनी दी है। यदि जांच नहीं हुई तो जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। सांसद चंद्रशेखर आजाद को पत्र लिखकर मामले को सदन तक पहुंचाने की योजना है।
17 साल की सेवा के बाद एकही झटके से बाहर
प्राथमिक विद्यालय जनकपुर में सत्रह वर्षों तक मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों का पेट भरने वाली महिला को बगैर कोई लिखित आदेश और किसी बैठक की सूचना के एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। ग्रामीणों ने भी इस कार्रवाई की घोर निंदा की है और एक विधवा महिला के साथ ऐसा व्यवहार करने पर नाराजगी जताई है। सवाल यह है कि क्या 17 वर्षों तक बच्चों का पेट भरने वाली विधवा महिला को न्याय मिलेगा, या पंचायत की राजनीति उसके जीवन पर भारी पड़ती रहेगी? अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
नौकरी छिन जाने के बाद जीविकोपार्जन का संकट
पति के इलाज में जो पैतृक जमीन थी वह बिक चुकी है। आज उनके पास केवल घर बनाने भर की जमीन बची है। कोई स्थायी आय स्रोत न होने से नौकरी जाने के बाद भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी और जिलाधिकारी से शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
0 टिप्पणियाँ