निःशुल्क चिकित्सा, भंडारे और बिरहा गायकों ने बांधा समां, हजारों ने उठाया लाभ
सटीक संवाद, 27 मार्च 2026: चंदौली के धानापुर क्षेत्र के इनायतपुर गांव में आयोजित 'जय मां काली पूजनोत्सव एवं विशाल मेला' ने स्थानीय लोगों को न केवल आध्यात्मिक आनंद दिया, बल्कि सामाजिक कल्याण के माध्यम से भी जोड़ा। इस दो दिवसीय उत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने निःशुल्क चिकित्सा शिविर और भव्य भंडारे का लाभ उठाया, जबकि बिरहा गायकों की प्रस्तुतियों ने खूब सुर्खियां बटोरीं।
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में नवरात्रि और काली चतुर्दशी के दौरान मां काली पूजा विशेष रूप से प्रचलित है। धानापुर जैसे क्षेत्रों में यह उत्सव सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जहां मां काली को अधर्म का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, मां काली का यह स्वरूप भक्तों को भय से मुक्ति दिलाता है – यही कारण है कि इनायतपुर जैसे गांवों में यह मेला हर साल लाखों को आकर्षित करता है।
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार को हुई, जब स्थानीय पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां काली की प्रतिमा का विशेष पूजन किया। मुख्य आकर्षण रहा विशाल भंडारा, जिसमें 10,000 से अधिक लोगों को शाकाहारी भोजन परोसा गया। भक्तों ने आलू कोहड़ा चने की सब्जी, पूरी और बुनिया का लुफ्त उठाया।
भंडारा परंपरा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है, जो 'अन्नदानम परमं दानम' के सिद्धांत पर आधारित है। उत्तर प्रदेश में ऐसे भंडारों से सालाना करोड़ों लोग लाभान्वित होते हैं, और धानापुर क्षेत्र में यह आयोजन स्थानीय किसानों द्वारा दान की गई फसल से संभव हुआ।
निःशुल्क चिकित्सा शिविर ने भी कमाल किया। डॉक्टरों की टीम ने 2,000 से अधिक मरीजों का इलाज किया, जिसमें ब्लड प्रेशर चेकअप, दवा वितरण और स्वास्थ्य जागरूकता सत्र शामिल थे। ग्रामीण महिलाओं को विशेष रूप से एनीमिया और प्रसव पूर्व देखभाल पर सलाह दी गई। आयोजकों ने बताया कि यह शिविर स्थानीय एनजीओ और सरकारी स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से संचालित था।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बिरहा गायकों ने धूम मचाई। लोकप्रिय बिरहा कलाकारों जैसे रामजन्म जाबाज और चंचल यादव और उनके दल ने रामायण-महाभारत पर आधारित गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। दिनभर चली प्रस्तुतियों में 'लोरिक-चंदा' की कथाएं गूंजीं, जो भोजपुरी लोकगीतों की आत्मा हैं।
बिरहा गायन उत्तर प्रदेश-बिहार का पारंपरिक लोक शैली है, जो 18वीं शताब्दी से प्रचलित है। यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल होने की दावेदारी कर रहा यह गान, सामाजिक मुद्दों को उठाने के लिए जाना जाता है। धानापुर में ऐसे मेले बिरहा को जीवंत रखते हैं, जहां कलाकार भी हजारों को बांध लेते हैं।
आयोजन समिति के अध्यक्ष भोले राजभर ने कहा, "यह उत्सव केवल पूजा नहीं, बल्कि सेवा और संस्कृति का संगम है। अगले साल इसे और भव्य बनाने की योजना है।" स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की, जिससे कोई अप्रिय घटना न घटी। यह मेला धानापुर क्षेत्र की एकजुटता का प्रतीक बना, जहां धर्म, स्वास्थ्य और मनोरंजन का अनोखा मेल देखने को मिला।
इस दौरान सैयद राजा विधायक सुशील सिंह, ब्लॉक प्रमुख अजय सिंह, प्रधान संघ अध्यक्ष राजेश सिंह,प्रधानाध्यापक देवेंद्र प्रताप सिंह, सतीश मौर्य, पवन प्रधान, राहुल राजभर, अच्छे राजभर, पूरणमल, अजय पाठक, मधुकर पाठक, विष्णु, सूबेदार राजभर, बबलू विश्वकर्मा, प्रकाश गोंड, जसवंत, नचिक सिंह सहित हजारों लोगों ने लुफ्त उठाया।
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