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मुगलसराय हत्याकांड: रोहितास पाल को न्याय मिलेगा या केस फाइलों में होगा दफन?- पिंटू पाल

छह माह बाद भी मुख्य शूटर फरार, पुलिस की नाकामी से जनता का विश्वास डगमगाया, कहीं सफेदपोश" साजिश का शिकार तो नहीं?

चंदौली, 26 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में बीते 18 नवंबर 2025 को हुई व्यवसायी रोहितास पाल की सनसनीखेज हत्या का मामला आज छह माह बाद भी रहस्यमय बना हुआ है। मुख्य आरोपी शूटर पुलिस की पकड़ से बाहर घूम रहे हैं, जबकि साजिशकर्ता के रूप में नामित तीन व्यापारियों—भानू जायसवाल, ओमप्रकाश जायसवाल और मनोज जायसवाल—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। 

 
क्या यह "सफेदपोश" साजिश का शिकार हो रहा है?
यह मामला चंदौली के इतिहास में सबसे बड़े पुलिस अभियानों में से एक है, जहां 9 स्पेशल टीमें, एसटीएफ की मदद और 300 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की जांच के बावजूद शूटर की पहचान या गिरफ्तारी न हो पाना जनता के बीच यह भावना बढ़ा रहा है कि कहीं “सफेदपोश” या स्थानीय ताकतों के दबाव में मामला धीमा नहीं किया जा रहा।


पुलिस की नाकामी: दो आईपीएस के बावजूद खाली हाथ
चंदौली पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं। जिले में दो आईपीएस अधिकारियों की तैनाती के बावजूद मुख्य हत्यारों को पकड़ने में नाकामी हुई है। परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की है, जबकि उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने एसपी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। स्थानीय विधायक सुशील सिंह ने विधानसभा में न्याय का भरोसा दिलाया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है।


NCRB DETA 2024 अनुसार 
यूपी में ऐसे हाई-प्रोफाइल हत्याकांडों में 70% से अधिक केस दो साल के अंदर ठंडे पड़ जाते हैं,और चंदौली में पिछले पांच वर्षों में चार इसी तरह के व्यापारी हत्याकांड अनसुलझे हैं। जनता का विश्वास घट रहा है—"सोशल मीडिया पर रोहितास पाल को न्याय दो" ट्रेंड कर रहा है, जिसमें हजारों पोस्ट पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।


परिवार का इंतजार और बढ़ता आक्रोश
रोहितास पाल का परिवार चार-पांच माह से न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। विधानसभा में बड़े "सफेदपोश" लोगों के हाथ होने का जिक्र हुआ, जो मामले को और रहस्यमय बनाता है। अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं—केस फाइलों में दफन होने का खतरा मंडरा रहा है। परिवार के सदस्य कहते हैं, "हमारा भाई व्यवसायी था, दुश्मनी में मारा गया, लेकिन हत्यारे आज भी आजाद हैं।"


रोचक तथ्य: 
रोहितास पाल चंदौली के प्रमुख दवा व्यापारी थे, जिनका टर्नओवर करोड़ों में था। हत्या के दिन बाइक सवार दो शूटरों ने सरेआम गोली मार दी थी, जो यूपी के गैंगस्टर अमर सिंह की पुरानी हत्याओं से मिलता-जुलता है। पुलिस का दावा है कि स्केच जारी हैं और सीमापार तलाश जारी, लेकिन छह माह में शून्य सफलता ने सवाल खड़े कर दिए।


“सफेदपोश” साजिश का सवाल
पीड़ित परिवार और कई दबाव समूहों का आरोप है कि जमीन विवाद के नाम पर जो रोहिताश पर जानलेवा वार किया गया, उसके पीछे कुछ बड़ी आर्थिक–राजनीतिक दबाव वाले लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिन्हें पुलिस “सफेदपोश” दबाव के कारण उचित रूप से उजागर नहीं कर पाई। यूपी मानवाधिकार आयोग ने हाल में चंदौली के पुलिस अधीक्षक से मामले में स्पष्टीकरण मांगा है, क्योंकि शूटरों और साजिशकर्ताओं की शीघ्र गिरफ्तारी न हो पाने व समय पर जांच रिपोर्ट न दिए जाने की शिकायत उठी है।


न्याय की आस:
मुगलसराय के दवा व्यवसायी रोहिताश पाल (रोमी) हत्याकांड में छह महीने बाद भी न्याय मुश्किलों भरा रास्ता तय कर रहा है – साजिश रचने वाले कुछ लोग जेल में हैं, लेकिन मुख्य शूटर अब तक फरार है, जिससे परिवार और जनता दोनों का विश्वास डगमगा रहा है।क्या रोहितास को न्याय मिलेगा? क्या मुख्य आरोपी कभी पकड़ा जाएगा? या यह केस भी पुरानी फाइलों में दफन हो जाएगा? समय ही बताएगा।जनता इंतजार कर रही है।

 
पुलिस के अनुसार, कन्हैया टॉकीज जमीन का विवाद
यह घटना कन्हैया टॉकीज के पास स्थित पैतृक जमीन पर चल रहे विवाद की वजह से हुई। रोहिताश पाल के दादा राजाराम के नाम पर कन्हैया टॉकीज की जमीन थी। राजाराम की दूसरी पत्नी की पुत्रियों ने वरासत में नाम फर्जी तरीके से दर्ज कराकर यह जमीन कम कीमत पर व्यक्ति भानू जायसवाल को बेच दी। रोहिताश ने इस रजिस्ट्री और बैनामे को निरस्त कराने के लिए कोर्ट में केस दायर किया, जिससे भानू और अन्य फायदा उठाने वाले लोगों को कब्जा नहीं मिल पाया। जमीन पर कब्जा न मिलने पर भानू जायसवाल ने ओमप्रकाश और मनोज से मिलकर रोहिताश को डराने–धमकाने और फिर उनकी हत्या की साजिश रची। 

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