अंबेडकर जाति-धर्म से ऊपर उठे थे, उनकी विरासत दलितों की तो है ही, पूरे समाज की भी।
डॉ. भीमराव अंबेडकर—भारतीय संविधान के वास्तुकार, 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत, सर्वसमावेशी भारत' के सपने के रचयिता, भारत रत्न बाबा साहब की 135वीं जयंती पर दुनिया भर में उनके विचारों ने फिर से दिल जीता।
LBDASS के प्रदेश अध्यक्ष व आजपा प्रदेश सचिव अर्जुन प्रसाद आर्य ने चंदौली में अनेकों सभाओं में मुख्य अतिथि बनकर पुष्पांजलि अर्पित की और सबको उनके विचारों को जीवन में उतारने का संकल्प दिलाया।
संविधान का पैगाम: समानता सबके लिए
बाबा साहब ने संविधान से भारत को समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे का संदेश दिया। लेकिन आज उनके नाम पर वोट की होड़ सवाल खड़ी करती है—क्या सच्चे वारिस सिर्फ दलित हैं, या हर भारतीय का हक है? कुछ इसे वोटबैंक की चाल कहते हैं, पर सच्चाई यह है कि अंबेडकर जाति-धर्म से ऊपर उठे थे। उनकी विरासत दलितों की तो है ही, पूरे समाज की भी।
दलित मसीहा, लेकिन सबका योद्धा
1891 में जन्मे अंबेडकर ने खुद छुआछूत का कटु स्वाद चखा। 1927 का महाड सत्याग्रह—जहां उन्होंने दलितों को सार्वजनिक तालाब से पानी पीने का हक दिलाया—भारत का पहला बड़ा दलित आंदोलन था। 1956 में नागपुर में लाखों अनुयायियों संग बौद्ध धर्म अपनाकर हिंदू कुरीतियों से मुक्ति का रास्ता दिखाया।
फिर भी, सिर्फ दलितों तक सीमित क्यों?
आलोचक कहते हैं, पार्टियां उनके नाम से वोट लूटती हैं, विचारों को भूल जाती हैं। अंबेडकर ने खुद कहा: "राजनीतिक आजादी बिना सामाजिक-आर्थिक स्वतंत्रता के बेकार है।" यह संदेश हर वर्ग के लिए है—गरीब से अमीर तक।
महिलाओं के हक की क्रांति
बाबा साहब महिलाओं के सबसे बड़े पैरोकार थे। हिंदू कोड बिल से विधवा को पति की हत्या पर संपत्ति का अधिकार, तलाक, पुनर्विवाह और गोद लेने का हक दिया। 1929 के पूना पैक्ट से दलित महिलाओं को शिक्षा के द्वार खोले। 1951 में नेहरू सरकार के विरोध पर उन्होंने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दिया—महिलाओं का हक उनके लिए सबसे ऊपर था। आज 33% आरक्षण उनकी यही देन है।
सच्चा वारिस बनने का मंत्र
अंबेडकर ने कभी वोट की भूख नहीं दिखाई। संविधान सभा में 2 साल 11 महीने की बहस के बाद 26 नवंबर 1949 को 'एक व्यक्ति, एक वोट' का संविधान लागू किया।
सच्चा अनुयायी वही:
शिक्षा ग्रहण करे: पढ़ो, पढ़ाओ।
संगठित हो: जागो, जागाओ।
संघर्ष करे: राजनीति से ऊपर उठकर।
जयकारे लगाने से पहले उनके संघर्ष को समझो। वोट की राजनीति छोड़ो, बदलाव की क्रांति लाओ। बाबा साहब की विरासत सबकी है—समानता का वह दीपक जलाओ, यही सच्ची श्रद्धांजलि।
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