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बेटा अब टॉर्च नहीं, बल्ब की रोशनी में सपने बुनेंगे: पिंटू पाल

एकता की ताकत ने तोड़े बिजली विभाग के बहाने, सरयां गांव को मिला 63 KVA ट्रांसफॉर्मर, अब मिलेगी निर्बाध बिजली

चंदौली जनपद के धानापुर ब्लॉक स्थित सरयां गांव में तीन दिनों तक किसानों का आक्रोश बिजली विभाग के खिलाफ सड़कों पर गूंजता रहा। “बिजली दो, वरना रोड जाम!” जैसे नारों ने पूरे गांव में संघर्ष की आग जला दी। अंधेरी रातें, सूखे खेत और टॉर्च की मद्धम रोशनी में पढ़ते बच्चे—यह सब गांव के लोगों के लिए रोजमर्रा की पीड़ा बन चुका था। लेकिन किसानों की एकजुटता ने आखिरकार इस अंधेरे को हरा दिया। अब किसान पिता पिंटू पाल गर्व से कहते हैं, “अब बेटा टॉर्च की नहीं, बल्ब की रोशनी में पढ़ेगा।”

यह सिर्फ एक ट्रांसफॉर्मर की कहानी नहीं, बल्कि हक के लिए लड़ी गई एक सामूहिक लड़ाई की मिसाल है। सरयां गांव के किसानों को जब विभागीय आश्वासनों से राहत नहीं मिली, तो उन्होंने शांत रहने के बजाय सड़क पर उतरकर अपनी आवाज़ बुलंद की। तीन दिन तक चले धरने ने प्रशासन और बिजली विभाग को आखिरकार समाधान देने पर मजबूर कर दिया।

16 दिन का अंधकार, फिर किसानों का संघर्ष
करीब 16 दिन पहले गांव का पुराना ट्रांसफॉर्मर खराब हो गया था। इसके बाद बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। नलकूप बंद हो गए, खेतों तक पानी नहीं पहुंचा और फसलें सूखने लगीं। ग्रामीणों की मुश्किलें यहीं नहीं रुकीं—बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई, घरों में दूध तक फटने लगा और रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।

किसान नेता पिंटू पाल, शेषनाथ यादव, दीनानाथ श्रीवास्तव समेत कई नेताओं और ग्रामीण लगातार विभागीय अधिकारियों से संपर्क करते रहे। बार-बार शिकायत की गई, लेकिन समाधान की जगह केवल आश्वासन मिले। आखिरकार, किसानों का सब्र टूट गया और उन्होंने मुख्य सड़क पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। धरने के दौरान किसानों का एक ही नारा था—“ट्रांसफॉर्मर लगाओ, धरना खत्म करो!” यह नारा जल्द ही प्रशासन तक पहुंचा और अधिकारियों में हलचल मच गई।

कई दौर की बातचीत, फिर झुकना पड़ा विभाग को
धरने के दौरान एसडीओ और बिजली विभाग के जेई मौके पर पहुंचे। उन्होंने ट्रांसफॉर्मर स्टॉक में न होने की बात कही, लेकिन किसान अपनी मांग पर अडिग रहे। इसके बाद कई दौर की बातचीत चली, लेकिन ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि जब तक 63 KVA का नया ट्रांसफॉर्मर नहीं मिलेगा, धरना खत्म नहीं होगा।

पिंटू पाल ने कहा, “हमारी एकता ने अफसरों को झुकने पर मजबूर कर दिया। जब किसान एकजुट हो जाएं, तो कोई बहाना काम नहीं आता।”आखिरकार विभाग को मांग माननी पड़ी और तीसरे दिन ही 63 KVA का नया ट्रांसफॉर्मर सरयां गांव पहुंचा। इससे ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे और लंबे समय से चला आ रहा अंधकार खत्म होने की उम्मीद जगी।

अब लौटेगी रोशनी, लौटेगी उम्मीद
नए ट्रांसफॉर्मर के लगने से गांव में अब निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे जहां खेतों की सिंचाई सुचारु होगी, वहीं बच्चों की पढ़ाई भी अब अंधेरे में नहीं रुकेगी। ग्रामीणों का कहना है कि यह जीत सिर्फ बिजली की नहीं, बल्कि उनके अधिकार और सम्मान की जीत है। पिंटू पाल जैसे किसान अब भरोसे के साथ कहते हैं, “अब बेटा टॉर्च नहीं, बल्ब की रोशनी में सपने बुनेगा।” सरयां गांव की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जब लोग एकजुट होकर अपने हक के लिए खड़े होते हैं, तो व्यवस्था को झुकना ही पड़ता है।

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