चंदौली जिले में ग्रामीण सफाई और पंचायत व्यवस्था की पोल खुल गई। जिला पंचायत राज अधिकारी नीरज सिन्हा ने 23 अप्रैल 2016 को विकासखंड चहनियां के चार ग्राम पंचायतों—हिनौता रमौली, लक्ष्मणगढ़ और रानेपुर—का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान लापरवाही और भ्रष्टाचार के काले कारनामे सामने आए, जिसके चलते छह सफाई कर्मियों और एक सचिव को तत्काल निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई ग्राम स्तर पर सरकारी योजनाओं की धज्जियां उड़ाने वालों को सबक सिखाने वाली है।
निरीक्षण में सफाई कर्मियों की घोर लापरवाही उजागर हुई।
हिनौता रमौली और लक्ष्मणगढ़ में तैनात सतीश कुमार सिंह, विजेन्द्र कुमार चौहान, नरेन्द्र कुमार, लालव्रत यादव, अखिलेश गुप्ता और पंकज कुमार यादव नामक सफाईकर्मी ग्रामों में अनुपस्थित मिले। गलियों-नालियों में गंदगी का अंबार लगा था, जबकि ये कर्मी वेतन तो ले रहे थे। डीपीआरओ ने इन्हें तुरंत निलंबित करते हुए सख्त चेतावनी दी कि ग्रामीण सफाई अब बर्दाश्त नहीं होगी।
पंचायत भवनों की जर्जर हालत ने चौंकाया
ग्राम पंचायत हिनौता में पंचायत भवन का सिलिंग फैन खराब पड़ा था, वाई-फाई और सोलर पैनल का नामोनिशान नहीं। जनसेवा केंद्र की आईडी गुम थी और शौचालय रजिस्टर गायब। रमौली में तो पंचायत भवन का ताला बंद मिला, परिसर में कचरा बिखरा पड़ा था। लक्ष्मणगढ़ में इनवर्टर-बैटरी न होने से सरकारी काम ठप, शौचालय गंदा, हैंडपंप का फर्श मैल से सना और सामुदायिक शौचालय बंद। रानेपुर में भी वाई-फाई गायब और शौचालय निष्क्रिय। ये कमियां बताती हैं कि पंचायत सचिव आशुतोष सिंह ने फंड का गलत इस्तेमाल किया।
डीपीआरओ ने सचिव और ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी। यह घटना जिले भर के पंचायत अधिकारियों के लिए आगाज है—लापरवाही अब महंगी पड़ेगी। ग्रामीणों ने इस कदम का स्वागत किया, उम्मीद है कि अब गांव साफ-सुथरे होंगे।
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