अराजक तत्वों ने तोड़ा दाहिना हाथ; भीम आर्मी ने कानून-व्यवस्था को बताया विफल, आंदोलन की चेतावनी
चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र के बढवल खास गांव स्थित टीकरवापर में गुरुवार रात अज्ञात अराजक तत्वों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का दाहिना हाथ तोड़ दिया। अनुसूचित जाति बस्ती में स्थित यह प्रतिमा ग्रामीणों के सहयोग से वर्षों पहले स्थापित की गई थी, जो समानता और न्याय का प्रतीक रही है। प्रतिमा के साथ ही संत रविदास और गौतम बुद्ध की मूर्तियां भी हैं, जो गांव की सामाजिक एकता दर्शाती हैं।
सुबह ग्रामीणों को क्षतिग्रस्त प्रतिमा दिखी तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। सैकड़ों ग्रामीण घटनास्थल पर जमा हो गए और नारेबाजी कर जिलाधिकारी को बुलाने की मांग करने लगे। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव से निकली बारात के दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर शरारती तत्वों ने यह साजिश रची, ताकि सामाजिक एकता भंग हो। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा, "यह हमारी एकता तोड़ने की कोशिश है।"
ग्राम प्रधान नंदलाल यादव सबसे पहले मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को शांत करने की कोशिश की। सकलडीहा थानाध्यक्ष भूपेन्द्र कुमार निषाद, वरुणेंद्र राय, रोहित कुमार समेत भारी पुलिस बल तैनात हो गया। सीओ कृष्णमुरारी शर्मा ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
वहीं भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष रामचंद्र राम ने घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि चंदौली में हाल के महीनों में अंबेडकर प्रतिमाओं पर यह तीसरी घटना है—पहले मुगलसराय में, धीना थाना क्षेत्र के सिलौटा में हुई थी। जनपद में "कानून-व्यवस्था पूरी तरह से विफल है, अपराधी खुले घूम रहे हैं। अगर कार्रवाई न हुई तो भीम आर्मी सड़कों पर उतरेगी।" ग्रामीणों का मानना है कि ये हमले जातिगत वैमनस्य फैलाने की साजिश हैं।
प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन इलाके में तनाव बरकरार है। स्थानीय लोग नई प्रतिमा लगाने और दोषियों को सजा की मांग पर अडिग हैं।
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