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दर्जन शिकायतें, दर्जनो आश्वासन, फिर भी डीएम के आदेश ठेंगा

एक साल बाद भी दर्जनों शिकायतें अधर में, किसानों की आस बेकार - पिंटू पाल का गुस्सा फूटा

चंदौली। किसान नेता पिंटू पाल की बेबसी भरी पुकार अब प्रशासन पर दबाव बना रही है। पिछले एक साल में उन्होंने दर्जन भर शिकायतें दर्ज कराईं और डीएम कार्यालय के चेंबर तक सैकड़ों बार पहुंचे। हर बार यही आश्वासन मिला— "तत्काल कार्रवाई होगी, समस्या का निस्तारण हो जाएगा।" लेकिन अधीनस्थ अधिकारियों ने डीएम के साफ निर्देशों को ठेंगा दिखा दिया।

छरबलियां और डेढ़गांवा के नलकूप आज भी सूखे पड़े हैं, जिससे किसानों की फसलें—धान की नर्सरी, सब्जियां और पशुओं का चारा—पानी की पिपासा से मुरझा रही हैं। गर्मी के इन दिनों में सिंचाई के लिए तरस रहे किसानों को लाखों का नुकसान हो चुका है। कुसम्ही मार्ग पर टूटा पुल जर्जर हालत में लटका हुआ है, जिससे ग्रामीणों की जान पर बन आई है—बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, मरीज इलाज के लिए परेशान।

स्मार्ट मीटर से बिजली बिल चार गुना बढ़ गए हैं, जिससे हजारों उपभोक्ता परेशान हैं। बंदरों का आतंक लोगों का जीना मुहाल कर चुका है, जबकि सड़कों पर फुटपाथ न होने से दुर्घटनाएं बढ़ी हैं और खतरनाक चालकी से मौतें हो रही हैं। प्राकृतिक आपदा से बर्बाद फसलों का मुआवजा लंबित है, निजी स्कूलों में हर साल नई किताबें और मनमानी फीस आम समस्या बनी हुई है, तथा जिले भर के खराब हैंडपंप पीने के पानी की कमी पैदा कर रहे हैं।

पिंटू पाल ने बताया, "मैंने डीएम महोदय से व्यक्तिगत रूप से मिलकर ये मुद्दे कई बार उठाए। हर बार लिखित शिकायतें दीं, कार्रवाई का भरोसा मिला। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि नलकूपों की मरम्मत का नामोनिशान नहीं।" उनका गुस्सा सही है—ये सिर्फ उनकी नहीं, पूरे इलाके की पुकार है। प्रशासनिक स्रोतों के अनुसार, विभागीय अधिकारी बजट की कमी का रोना रोते हैं, लेकिन पिंटू पाल इसे लापरवाही बताते हैं। अब वे आंदोलन की तैयारी में जुटे हैं। ग्रामीण इलाकों में ऐसी समस्याएं आम हैं, लेकिन पिंटू पाल जैसे सक्रिय नेताओं की वजह से आवाज बुलंद हो रही है। प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे, वरना किसानों का गुस्सा भारी पड़ सकता है।

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