किसानों का आरोप है कि हर साल गंगा के कटान से सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन नदी में समा जाती है। उनका कहना है कि प्रशासन केवल खानापूर्ति के रूप में बालू की बोरी लगवाकर अस्थायी निवारक कार्य करवा रहा है, जो पहली बरसात में बह जाता है और कटान के जोखिम को नहीं रोकता। किसान स्थायी तटबंध और बोल्डर पिचिंग जैसी ठोस तकनीकी कार्यवाही की मांग कर रहे हैं।
धरने पर मौजूद मुख्य नेताओं में मनोज काका, पिंटू पाल, गुड्डू पासवान और दीनानाथ श्रीवास्तव शामिल थे। सपा प्रवक्ता मनोज काका ने कहा, "29 दिन से किसान यहां बैठे हैं, लेकिन सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही। हर साल हमारी जमीन गंगा में कट रही है। अधिकारी आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और बालू की बोरी डलवाकर चले जाते हैं। हमें अस्थाई नहीं, स्थायी समाधान चाहिए। अगर मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन और तेज होगा।"
पिंटू पाल ने भी चेतावनी दी कि "कटान से किसान बर्बाद हो रहा है। घर-खेत सब नदी में जा रहे हैं। प्रशासन सिर्फ आश्वासन देता है। जब तक पक्का तटबंध नहीं बनेगा, हम यहां से नहीं हटेंगे। यह हमारी रोजी-रोटी का सवाल है।"
इस मामले में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। किसान नेताओं ने कहा है कि यदि जल्द ही स्थायी उपाय शुरू नहीं किए गए तो वे चक्का जाम और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जैसे कड़े कदम उठाने पर मजबूर होंगे।
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