चंदौली। जिले में चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत प्रभावी पैरवी, वैज्ञानिक विवेचना और साक्ष्यों के प्रभावी संकलन के परिणाम सामने आए हैं। शनिवार को न्यायालय ने वर्ष 2003, 2004 और 2005 में दर्ज चार अलग-अलग मुकदमों में चार अभियुक्तों को दोषसिद्ध करते हुए जेल में बिताई गई अवधि के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही सभी पर एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।

न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस विभाग ने बताया कि इन पुराने मामलों में अभियोजन की प्रभावी पैरवी और मॉनिटरिंग सेल की निगरानी के चलते दोषसिद्धि संभव हुई। चारों मामलों में सजा सुनाने वाले न्यायिक अधिकारी सिविल जज (जू.डि.)/जेएम चंदौली श्री यज्ञेश सोनकर रहे।

शहाबगंज के दो पुराने आर्म्स एक्ट मामलों में दोषसिद्धि

थाना शहाबगंज में वर्ष 2005 में दर्ज मुकदमा संख्या 14/2005 धारा 3/25 आर्म्स एक्ट के मामले में टिर्रो निवासी सगून पुत्र मुराहू को न्यायालय ने दोषसिद्ध किया। न्यायालय ने अभियुक्त को जेल में बिताई गई अवधि के कारावास की सजा तथा एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

इसी थाना क्षेत्र में वर्ष 2004 में दर्ज मुकदमा संख्या 36/2004 धारा 3/25 आर्म्स एक्ट में टिर्रो निवासी राम सगुन पुत्र मुराहू राम को भी दोषसिद्ध किया गया। इस मामले में भी न्यायालय ने जेल में बिताई गई अवधि के कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

दोनों मामलों में पुलिस के अनुसार अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की गई। मॉनिटरिंग सेल, अभियोजक विजय कुमार पाण्डेय (एपीओ), हेड कांस्टेबल उमाशंकर (पैरोकार) और थाना शहाबगंज पुलिस की भूमिका को पुलिस विभाग ने सराहनीय बताया है।

पशु क्रूरता से जुड़े पुराने मामले में भी सजा

थाना शहाबगंज में ही वर्ष 2003 में दर्ज मुकदमा संख्या 46/2003 में रामा हरिजन पुत्र रामवृक्ष निवासी लठौरा, थाना बबुरी को दोषसिद्ध किया गया। यह मामला धारा 3/5ए/8 गोवध निवारण अधिनियम तथा धारा 11 पशु क्रूरता निवारण अधिनियम से संबंधित था।

न्यायालय ने रामा हरिजन को जेल में बिताई गई अवधि के कारावास की सजा और एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इस मामले में भी पुलिस के मुताबिक मॉनिटरिंग सेल, एपीओ विजय कुमार पाण्डेय, हेड कांस्टेबल उमाशंकर (पैरोकार) तथा थाना शहाबगंज पुलिस ने प्रभावी पैरवी की।

बबुरी थाने के 2003 के आर्म्स एक्ट मामले में भी दोषसिद्धि

थाना बबुरी में वर्ष 2003 में दर्ज मुकदमा संख्या 69/2003 धारा 4/25 आर्म्स एक्ट में गोई, थाना चांद, जिला भभुआ, बिहार निवासी राम दहिन यादव पुत्र हरिदार यादव को न्यायालय ने दोषसिद्ध किया।

न्यायालय ने राम दहिन यादव को जेल में बिताई गई अवधि के कारावास तथा एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इस मामले में अभियोजन की ओर से पैरवी करने में मॉनिटरिंग सेल, एपीओ विजय कुमार पाण्डेय, कांस्टेबल राम नरायन (पैरोकार) और थाना बबुरी पुलिस की भूमिका रही।

पुलिस विभाग के अनुसार ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुराने आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी, साक्ष्यों के समुचित संकलन और अभियोजन की लगातार मॉनिटरिंग पर जोर दिया जा रहा है। शनिवार को एक ही दिन चार अलग-अलग मामलों में दोषसिद्धि इसी प्रक्रिया का परिणाम बताई गई है। इनमें तीन मामले आर्म्स एक्ट से संबंधित हैं, जबकि एक मामला गोवध निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम से जुड़ा है।

इन मामलों में न्यायालय द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को कारावास के रूप में मानते हुए प्रत्येक दोषसिद्ध व्यक्ति पर एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।