चन्दौली। धानापुर पुलिस और साइबर टीम ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के लिए गरीब ग्रामीणों के बैंक खातों का इस्तेमाल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पूर्व बैंक कर्मचारी रोहित कुमार उर्फ काला समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।पुलिस के मुताबिक रोहित ने पूर्व में करीब 300 बैंक खाते खुलवाए थे, जिनमें से चार खातों से NCRP पर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा तक की 18 साइबर फ्रॉड शिकायतें और करीब 2.5 लाख रुपये की ठगी सामने आई है। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल, कूटरचित आधार कार्ड, एटीएम और चेकबुक बरामद हुई है। पुलिस अब रोहित द्वारा खुलवाए गए शेष करीब 300 खातों की जांच में जुटी है, जिससे साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मामला ग्राम असना, थाना कन्दवा निवासी एहतशामुद्दीन और उनके अन्य सहयोगियों सुऐब, तवरेज, सहादत, निकेथ एवं अरुण की शिकायत से सामने आया। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को बताया था कि जनवरी 2024 में गांव के कालीन कारखाने में एक्सिस बैंक के कर्मचारी रोहित कुमार और उसके साथी रावण उर्फ शुभम ने विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा देकर उनके जीरो बैलेंस खाते खुलवाए।
शिकायत के मुताबिक खाते खुलने के बाद पासबुक दे दी गई, लेकिन एटीएम कार्ड उपलब्ध कराने के नाम पर रोहित ने ओटीपी हासिल कर लिया। बाद में खाताधारकों के ई-मेल पर खातों में भारी लेनदेन के संदेश आने लगे। बैंक से जानकारी लेने पर उन्हें अपने खातों में उनकी जानकारी और सहमति के बिना संदिग्ध लेनदेन होने की जानकारी मिली।
इस आधार पर थाना साइबर क्राइम चन्दौली में मुकदमा अपराध संख्या 03/2026 धारा 319(2), 318(4) बीएनएस एवं 66 आईटी एक्ट के तहत अभियोग दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
फर्जी लोन वेबसाइट और खातों के इस्तेमाल का आरोप
विवेचना के दौरान NCRP पोर्टल की शिकायतों, बैंक खातों में हुए वित्तीय लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक व भौतिक साक्ष्यों के विश्लेषण से पुलिस को एक ऐसे गिरोह की जानकारी मिली, जिस पर प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर फर्जी लोन वेबसाइट व भ्रामक विज्ञापनों के जरिए लोगों से साइबर ठगी करने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर गरीब लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ और प्रधानमंत्री मुद्रा लोन दिलाने का झांसा देकर जीरो बैलेंस बैंक खाते खुलवाता था। जांच में आरोप है कि खाताधारकों से एटीएम कार्ड, पासबुक और ओटीपी जैसी बैंकिंग जानकारी हासिल कर खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए किया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, इन खातों की जानकारी मुंबई में मौजूद कथित सहयोगियों तक पहुंचाई जाती थी। इसके बाद साइबर ठगी से प्राप्त रकम खातों में आने पर एटीएम के जरिए निकाली जाती और गिरोह के सदस्यों के बीच बांटे जाने की बात सामने आई है।
चार खातों में मिलीं 18 शिकायतें
पुलिस ने बताया कि अभी चार बैंक खातों का प्रारंभिक विश्लेषण पूरा किया गया है। इन खातों के विरुद्ध NCRP पर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा समेत विभिन्न राज्यों से कुल 18 अंतर्राज्यीय साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज मिली हैं। इन शिकायतों में करीब 2.5 लाख रुपये की ठगी की रिपोर्ट सामने आई है।
वहीं, रोहित कुमार द्वारा पूर्व में खुलवाए गए लगभग 300 अन्य बैंक खातों की जांच अभी जारी है। पुलिस इन खातों के वित्तीय लेनदेन और साइबर अपराध से संभावित संबंधों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इन खातों की वास्तविक भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
पूर्व बैंक कर्मचारी होने का पुलिस का दावा
पूछताछ में रोहित कुमार उर्फ काला के बारे में पुलिस ने बताया कि वह पूर्व में एक्सिस बैंक सकलडीहा में कर्मचारी के रूप में कार्यरत था और उस दौरान उसने करीब 300 बैंक खाते खुलवाए थे। पुलिस के अनुसार, बैंक में संदिग्ध गतिविधियों के चलते नौकरी से निष्कासित किए जाने के बाद भी उसने अपने बैंकिंग अनुभव का इस्तेमाल साथियों के साथ साइबर अपराध में किया।
पुलिस का आरोप है कि रोहित ने वैधानिक रूप से खोले गए बैंक खातों का दुरुपयोग कर साइबर ठगी की रकम मंगाने का तरीका अपने साथियों को बताया। हालांकि, पुलिस द्वारा जांच किए जा रहे करीब 300 खातों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
आशीष पर भी खाते खुलवाने में भूमिका का आरोप
पुलिस के अनुसार पूछताछ में आशीष विश्वकर्मा ने बताया कि वह रोहित कुमार और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर ग्रामीणों को प्रधानमंत्री मुद्रा लोन तथा सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा देकर खाते खुलवाता था।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान आशीष की भूमिका खाताधारकों से बैंकिंग जानकारी हासिल करने और खातों को कथित साइबर ठगी के नेटवर्क से जोड़ने के संबंध में सामने आई है। अपनी पहचान छिपाने के लिए कूटरचित आधार कार्ड का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान एक कूटरचित आधार कार्ड बरामद किया है।
ओदरा मार्ग से हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। 12 सितंबर 2026 को मुखबिर की सूचना पर करीब 12:20 बजे ओदरा मार्ग से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आशीष विश्वकर्मा पुत्र रमेश विश्वकर्मा निवासी ग्राम पसाई, थाना धीना, जनपद चन्दौली, उम्र करीब 22 वर्ष और रोहित कुमार उर्फ काला पुत्र किशोरी राम निवासी ग्राम सेवढ़ी मड़ई, थाना बलुआ, जनपद चन्दौली, उम्र करीब 31 वर्ष के रूप में हुई।
तलाशी में दो मोबाइल फोन, एक कूटरचित आधार कार्ड, एक एटीएम कार्ड और एक चेकबुक बरामद होने की जानकारी पुलिस ने दी है।
300 खातों की जांच से खुलेंगे आगे के राज
पुलिस के मुताबिक, रोहित के पूर्व में खुलवाए गए करीब 300 खातों की विस्तृत जांच जारी है। फिलहाल चार खातों में 18 साइबर फ्रॉड शिकायतें सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस वित्तीय लेनदेन, खाताधारकों की भूमिका और साइबर ठगी से जुड़े अन्य व्यक्तियों की कड़ियां खंगाल रही है।
इस मामले में थाना धानापुर पर मुकदमा अपराध संख्या 160/2026 धारा 3(5), 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2), 341(2) बीएनएस और 66डी आईटी एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में अतिरिक्त निरीक्षक सलिल स्वरूप आदर्श, थाना प्रभारी धानापुर, उपनिरीक्षक गेंदा सिंह, हेड कांस्टेबल राजेश कुमार मौर्या और महिला कांस्टेबल श्वेता सिंह शामिल रहीं। साइबर टीम में उपनिरीक्षक मिर्जा रिजवान बेग, हेड कांस्टेबल पवन कुमार यादव, कांस्टेबल मनोज चौहान और कांस्टेबल अनिल प्रजापति शामिल रहे।
#चन्दौली #साइबरफ्रॉड #धानापुर #साइबरक्राइम #म्यूलअकाउंट #ऑनलाइनठगी #रोहितकुमार #आशीषविश्वकर्मा #NCRP #ChandauliNews #CyberCrime #उत्तरप्रदेशपुलिस