सकलडीहा। तहसील और ब्लॉक मुख्यालय का प्रमुख खेल मैदान सकलडीहा इंटर कॉलेज इन दिनों जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। बरसात होते ही मैदान में पानी जमा हो जाता है और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यह पानी कई-कई महीनों तक मैदान में बना रहता है। लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के कारण खिलाड़ियों और छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सकलडीहा इंटर कॉलेज का खेल मैदान विद्यालय के विद्यार्थियों और क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यही मैदान विद्यालय के एनसीसी, स्काउट-गाइड, एनएसएस तथा खेलकूद गतिविधियों के लिए प्रमुख रूप से इस्तेमाल होता है। यहां समय-समय पर जनपद और प्रदेश स्तर की खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती रही हैं। इस मैदान पर अभ्यास करने वाले कई खिलाड़ियों ने जनपद ही नहीं, बल्कि प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। ऐसे में बरसात के बाद लंबे समय तक मैदान में पानी जमा रहने से खिलाड़ियों की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।

बारिश के दिनों में मैदान की स्थिति बेहद खराब हो जाती है। पानी की निकासी नहीं होने के कारण पूरा मैदान जलमग्न हो जाता है। पानी के साथ घास-फूस और गंदगी जमा होने से मैदान खेल गतिविधियों के लिए अनुपयोगी हो जाता है। बारिश समाप्त होने के बाद भी मैदान के सूखने में काफी समय लग जाता है। इसके चलते खिलाड़ियों को अभ्यास करने के लिए स्थान नहीं मिल पाता। वहीं विद्यालय के छात्र-छात्राओं की विभिन्न गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।

मैदान का महत्व केवल विद्यालय और खेल गतिविधियों तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र का प्रमुख सार्वजनिक और चुनावी मैदान भी रहा है। पूर्व में यहां प्रियंका गांधी, राजनाथ सिंह, लालू यादव, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव सहित कई बड़े नेताओं की चुनावी सभाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद इतने महत्वपूर्ण मैदान में वर्षों से जलनिकासी की समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस मैदान का उपयोग बड़ी जनसभाओं और महत्वपूर्ण आयोजनों के लिए होता रहा है, उसकी मूलभूत समस्या का अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाना गंभीर विषय है।

जलभराव की समस्या का असर आसपास के शिक्षण संस्थानों और सरकारी कार्यालयों पर भी पड़ता है। बरसात के दौरान मैदान का पानी डायट, पीजी कॉलेज, इंटर कॉलेज, एलटी कॉलेज, परिषदीय विद्यालय और तहसील क्षेत्र के लिए परेशानी का कारण बनता है। आसपास जलभराव होने से विद्यार्थियों, कर्मचारियों और आम लोगों को आवागमन में भी दिक्कत होती है। कई जगह पानी और कीचड़ के कारण लोगों को रास्ता बदलकर जाना पड़ता है।

स्थानीय स्तर पर इस समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी निखिल टी. फूंडे ने भी जलनिकासी की समस्या का संज्ञान लेते हुए डीसी मनरेगा सहित संबंधित जिलास्तरीय अधिकारियों को नाला निर्माण कराने का निर्देश दिया था। उम्मीद थी कि नाला निर्माण होने के बाद बरसात के पानी की निकासी की समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन समय बीतने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया।

लोगों का कहना है कि अधिकारियों के निर्देश के बावजूद यदि जलनिकासी की व्यवस्था नहीं हो सकी तो समस्या के समाधान को लेकर किए गए प्रयासों की स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हर वर्ष बरसात में मैदान की यही स्थिति हो जाती है। बारिश के समय पानी जमा होता है, फिर धीरे-धीरे मौसम साफ होने के बाद पानी कम होता है, लेकिन पूरी तरह जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से मैदान लंबे समय तक उपयोग के लायक नहीं रह जाता।

खिलाड़ियों का कहना है कि खेल मैदान में जलभराव उनके अभ्यास पर सीधा असर डालता है। जिन खिलाड़ियों को नियमित रूप से अभ्यास की आवश्यकता होती है, उन्हें दूसरे स्थानों की तलाश करनी पड़ती है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र से आने वाले खिलाड़ियों के लिए यह और बड़ी समस्या है। विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए भी मैदान केवल खेल का स्थान नहीं, बल्कि शारीरिक प्रशिक्षण और विभिन्न गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है।

एनसीसी, स्काउट-गाइड और एनएसएस से जुड़े विद्यार्थियों के लिए भी मैदान का उपयोग नियमित गतिविधियों में होता है। जलभराव के कारण इन गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में परेशानी आती है। इससे विद्यार्थियों की दिनचर्या और प्रशिक्षण दोनों प्रभावित होते हैं।

कस्बावासियों का कहना है कि मैदान का उपयोग सुबह टहलने और अन्य दैनिक गतिविधियों के लिए भी किया जाता है। लेकिन बरसात में पानी जमा होने के कारण लोगों का वहां जाना मुश्किल हो जाता है। लंबे समय तक पानी खड़ा रहने से मच्छरों और गंदगी की समस्या भी बढ़ने की आशंका रहती है। इससे आसपास रहने वाले लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।

स्थानीय व्यापारियों और छात्रों में भी इस समस्या को लेकर आक्रोश है। उनका कहना है कि सकलडीहा तहसील मुख्यालय का यह महत्वपूर्ण मैदान वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। यदि जलनिकासी के लिए स्थायी नाला और उचित निकासी मार्ग बना दिया जाए तो समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है। इसके लिए केवल बारिश के समय पानी निकालने की अस्थायी व्यवस्था करने के बजाय स्थायी समाधान की जरूरत है।

क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभाग और तहसील प्रशासन से मांग की है कि जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान कराने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। लोगों का कहना है कि मैदान की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कर पानी के प्राकृतिक बहाव और निकासी मार्ग का निर्धारण किया जाए तथा पूर्व में दिए गए नाला निर्माण के निर्देशों की स्थिति की समीक्षा की जाए। इससे हर वर्ष बरसात में होने वाली समस्या से खिलाड़ियों, छात्रों और आम लोगों को राहत मिल सकेगी।

सकलडीहा इंटर कॉलेज का खेल मैदान क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे में इसका लंबे समय तक जलमग्न रहना केवल एक मैदान की समस्या नहीं, बल्कि खेल और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ा विषय भी है। अब देखना यह है कि वर्षों पुरानी इस समस्या को लेकर प्रशासन कब गंभीर कदम उठाता है और खिलाड़ियों व छात्रों को जलभराव से स्थायी राहत कब मिलती है।

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