बाराबंकी। गोंडा के बर्तन कारोबारी विनोद कुमार साहनी की हत्या के बाद रविवार को उनके परिजनों से मिलने जा रहे नगीना सांसद एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के काफिले को बाराबंकी के मसौली क्षेत्र में पुलिस ने शहाबपुर टोल प्लाजा के पास रोक लिया। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद समर्थकों में आक्रोश फैल गया और धक्का-मुक्की व तीखी बहस की स्थिति बनी। पुलिस के अनुसार, नाराज समर्थकों ने टोल का बैरियर तोड़ दिया। वहीं चंद्रशेखर आजाद की ओर से काफिले के साथ कथित अभद्रता और हमले का आरोप लगाया गया है। घटना के बाद सांसद ने बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की। विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गरम है और स्वामी प्रसाद मौर्य, अखिलेश यादव, अजय राय, पल्लवी पटेल और राजपाल कश्यप समेत कई नेताओं ने घटना पर सवाल उठाते हुए पीड़ित परिवार के पक्ष में आवाज उठाई है।
रविवार को चंद्रशेखर आजाद अपने समर्थकों के साथ लखनऊ से गोंडा के लिए रवाना हुए थे। उनका कार्यक्रम गोंडा के रेक्सड़िया मल्लाहनपुरवा गांव पहुंचकर विनोद कुमार साहनी के परिवार से मुलाकात करने का था। विनोद साहनी की मौत के बाद परिवार के बीच पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त करने और घटना की जानकारी लेने के लिए चंद्रशेखर आजाद का यह दौरा प्रस्तावित था। लेकिन गोंडा पहुंचने से पहले ही बाराबंकी जिले के मसौली थाना क्षेत्र में पुलिस ने उनके काफिले को रोक दिया।
बताया गया कि शहाबपुर टोल प्लाजा के पास पुलिस बल पहले से तैनात था। जैसे ही चंद्रशेखर आजाद का काफिला वहां पहुंचा, पुलिस ने उसे रोक लिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सांसद को हिरासत में लेकर रामनगर स्थित सर्किट हाउस ले जाया गया। इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही काफिले में शामिल समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई। समर्थकों और पुलिस के बीच नोकझोंक तथा धक्का-मुक्की की स्थिति उत्पन्न हो गई। पुलिस का कहना है कि इसी दौरान समर्थकों ने टोल प्लाजा का बैरियर कथित तौर पर तोड़ दिया, जिसके बाद मौके पर कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल बना रहा।चंद्रशेखर आजाद ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जताई। उनकी ओर से आरोप लगाया गया कि पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे उनके काफिले के साथ पुलिस का रवैया ठीक नहीं रहा और रास्ते में कथित तौर पर हमला तथा अभद्रता की गई। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, काफिले पर हमले के आरोपों को लेकर पुलिस की ओर से फिलहाल विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में हमले से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
काफिला रोके जाने के बाद चंद्रशेखर आजाद ने बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने रास्ते में हुई घटना को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और मामले में कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि वह किसी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने नहीं, बल्कि हत्या के शिकार विनोद साहनी के परिवार से मिलने जा रहे थे। ऐसे में उन्हें रोके जाने को लेकर उन्होंने सवाल उठाए।
दरअसल, विनोद कुमार साहनी हत्याकांड के बाद गोंडा और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। विनोद साहनी पर हमला उस समय हुआ था जब वह अपनी दुकान बंद कर बाइक से घर लौट रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक परसपुर थाना क्षेत्र के शाहपुर धनोवा इलाके में कुछ लोगों ने उनकी बाइक के सामने वाहन लगाकर उन्हें रोका। कहासुनी के बाद मारपीट और धारदार हथियार से हमला किए जाने की बात सामने आई। गंभीर रूप से घायल विनोद का इलाज लखनऊ स्थित केजीएमयू में चल रहा था, जहां उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में हत्या से संबंधित धाराएं बढ़ाईं और आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की।
इस घटना के बाद से ही पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पुलिस ने लापरवाही के आरोप में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। उधर, विनोद साहनी के परिवार और समर्थकों की ओर से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। मामला संवेदनशील होने के कारण पुलिस की जांच लगातार जारी है।
विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने 11 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और जातिगत हिंसा को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। मौर्य ने विनोद साहनी की हत्या को अत्यंत निंदनीय बताते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद को आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरने पर बैठना पड़ा।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में घटना को कथित सामंती और जातिवादी गुंडागर्दी से जोड़ा। उनके द्वारा लगाए गए इन आरोपों को खबर में राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि किसी नेता का बयान अपने आप में पुलिस या न्यायालय का निष्कर्ष नहीं है। घटना के पीछे वास्तविक कारण और आरोपियों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
समाजवादी पार्टी की ओर से भी मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए गए हैं। सपा नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल विनोद साहनी के परिजनों से मिलने गोंडा जाने की कोशिश कर चुका है। पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप के नेतृत्व में गए सपा नेताओं के काफिले को पुलिस ने घाघरा घाट के पास रोक दिया था। इस दौरान पुलिस और सपा नेताओं के बीच नोकझोंक हुई। राजपाल कश्यप ने पुलिस की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया था।
इसके बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी विनोद साहनी के परिवार से मिलने गोंडा जाने के दौरान बाराबंकी में पुलिस की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। 12 सितंबर को अजय राय के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को शहाबपुर टोल प्लाजा के पास पुलिस ने रोक लिया और बाद में उन्हें मसौली थाने ले जाया गया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक की खबर सामने आई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में थाने पर धरना भी दिया।
सपा विधायक पल्लवी पटेल भी विनोद साहनी के परिवार से मिलने गोंडा पहुंचीं। उनके दौरे को भी इस हत्याकांड के खिलाफ उठ रही राजनीतिक आवाजों से जोड़कर देखा जा रहा है। इस तरह लगातार अलग-अलग दलों के नेताओं के गोंडा पहुंचने और रास्ते में पुलिस द्वारा रोके जाने से मामला राजनीतिक रूप से और संवेदनशील होता जा रहा है।
उधर, प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद भी विनोद साहनी प्रकरण को लेकर सक्रिय रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना दिया था। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव की ओर से भी मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग सामने आई है। इससे साफ है कि विनोद साहनी हत्याकांड अब केवल स्थानीय स्तर का आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसको लेकर प्रदेश की राजनीति में भी लगातार बयानबाजी हो रही है।
बाराबंकी में चंद्रशेखर आजाद के काफिले को रोके जाने के बाद यह राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। एक के बाद एक नेताओं के गोंडा जाने की कोशिश और रास्ते में पुलिस की रोक-टोक ने सरकार की कानून-व्यवस्था और प्रशासन के रवैये को लेकर विपक्षी दलों को सवाल उठाने का मौका दिया है। चंद्रशेखर आजाद ने एसपी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा है। अब देखना यह होगा कि काफिला रोके जाने और कथित हमले के आरोपों पर बाराबंकी पुलिस की जांच क्या दिशा लेती है।
फिलहाल पुलिस की ओर से समर्थकों द्वारा टोल बैरियर तोड़े जाने की बात कही गई है, जबकि चंद्रशेखर आजाद की ओर से काफिले के साथ कथित अभद्रता और हमले का आरोप लगाया गया है। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विनोद साहनी हत्याकांड की जांच के साथ अब बाराबंकी में चंद्रशेखर आजाद को रोके जाने का विवाद भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता सामने आ रहे हैं। वहीं प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी राजनीतिक टकराव को रोकने की चुनौती है।
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