सहारनपुर, उत्तर प्रदेश। सहारनपुर पुलिस ने नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में खपाने वाले एक इंटरस्टेट गैंग का रविवार को भंडाफोड़ किया है। पुलिस कार्रवाई में गैंग के मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मौके से 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के, छह मशीनें और सिक्के तैयार करने का पूरा सेटअप बरामद हुआ है। पुलिस के मुताबिक गिरोह रोजाना करीब 12 हजार नकली सिक्के तैयार करता था और अब तक करोड़ों रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपाने का दावा किया गया है।

पुलिस की कार्रवाई के बाद नकली सिक्कों के इस नेटवर्क को लेकर जांच तेज हो गई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक गिरोह केवल सहारनपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि दूसरे राज्यों में भी इसका नेटवर्क फैला हुआ था। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, नकली सिक्कों की सप्लाई और उन्हें बाजार में खपाने के तरीके के बारे में जानकारी जुटा रही है।

सहारनपुर पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान नकली सिक्के तैयार करने के लिए इस्तेमाल की जा रही छह मशीनें बरामद हुई हैं। इसके साथ ही 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के भी पुलिस के हाथ लगे हैं। बरामदगी से यह साफ होता है कि नकली सिक्कों का निर्माण किसी छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था। पुलिस अब बरामद मशीनों और अन्य उपकरणों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि इनका इस्तेमाल कब से किया जा रहा था।

जांच में सामने आया है कि गिरोह की क्षमता प्रतिदिन करीब 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की थी। बड़ी मात्रा में उत्पादन के बाद इन सिक्कों को अलग-अलग माध्यमों से बाजार में चलाने की बात सामने आई है। पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह अब तक करोड़ों रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपा चुका है। हालांकि, कुल कितने नकली सिक्के तैयार किए गए और कितनी रकम बाजार में पहुंची, इसका वास्तविक आंकड़ा विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।

पुलिस के लिए इस मामले में केवल नकली सिक्कों की बरामदगी ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क का पता लगाना भी बड़ी चुनौती है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकली सिक्कों की सप्लाई किन-किन स्थानों पर की जाती थी और इस काम में कौन-कौन लोग सहयोग करते थे।

इंटरस्टेट नेटवर्क सामने आने के बाद दूसरे राज्यों में भी पुलिस की जांच का दायरा बढ़ सकता है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के सदस्य नकली सिक्कों को असली सिक्कों के बीच बाजार में किस तरह खपाते थे। इसके लिए किन क्षेत्रों को निशाना बनाया गया और किन लोगों के माध्यम से सिक्कों को आगे पहुंचाया गया, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस के मुताबिक गिरोह का संचालन योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा था। सिक्के तैयार करने के लिए मशीनों और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता था। बड़ी संख्या में सिक्कों के निर्माण की क्षमता से पुलिस को आशंका है कि गिरोह लंबे समय से इस अवैध गतिविधि में सक्रिय हो सकता है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान इस अवधि और नेटवर्क के विस्तार की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

बरामद 6,400 नकली सिक्कों को पुलिस ने जांच के लिए सुरक्षित किया है। इनके निर्माण और गुणवत्ता की जांच भी महत्वपूर्ण होगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नकली सिक्के देखने में कितने हद तक असली सिक्कों जैसे बनाए गए थे। इसके साथ ही पुलिस बरामद मशीनों की तकनीकी जांच कर रही है, जिससे गिरोह की उत्पादन प्रक्रिया और क्षमता के बारे में और जानकारी मिल सकती है।

मामले की जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा सकती है। इससे पुलिस को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि गिरोह के सदस्य किन लोगों के संपर्क में थे और नकली सिक्कों की सप्लाई कहां तक की जाती थी। इंटरस्टेट नेटवर्क की पुष्टि होने पर संबंधित राज्यों की पुलिस से भी समन्वय किया जा सकता है।

नकली मुद्रा का कारोबार आर्थिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है। नकली सिक्कों के बड़े पैमाने पर बाजार में पहुंचने से आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों को भी नुकसान हो सकता है। ऐसे में पुलिस की इस कार्रवाई को नकली मुद्रा के अवैध कारोबार के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।

सहारनपुर पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस गिरोह के मास्टरमाइंड और उसके सहयोगियों से जुड़े पूरे नेटवर्क पर है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकली सिक्के तैयार करने के लिए कच्चा माल कहां से लाया जाता था, मशीनें कहां से हासिल की गईं और तैयार सिक्कों को किन माध्यमों से अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचाया जाता था।

फिलहाल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी संख्या में नकली सिक्कों तथा मशीनों की बरामदगी के बाद पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। पुलिस के दावे के अनुसार गिरोह प्रतिदिन हजारों नकली सिक्के तैयार करने में सक्षम था और अब तक करोड़ों रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपाए जा चुके हैं। आगे की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और नकली सिक्कों की सप्लाई की पूरी श्रृंखला का खुलासा होने की संभावना है।

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