वाशिंगटन/कीव। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से रूस के डीजल और तेल रिफाइनिंग ढांचे पर हमले रोकने की अपील की है। 13 सितंबर को ट्रंप ने कहा कि यूक्रेनी हमलों से रूस में डीजल की कमी पैदा हो रही है और इसका असर व्यापक ईंधन बाजार पर भी पड़ रहा है। ट्रंप ने साफ कहा कि यूक्रेन को रूस के खिलाफ अपने सैन्य अभियान में दूसरे लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन डीजल से जुड़े ठिकानों को निशाना नहीं बनाना चाहिए।
ट्रंप ने यह टिप्पणी आयरलैंड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की। उन्होंने जेलेंस्की को लेकर कहा कि उन्हें रूस में डीजल ईंधन को निशाना बनाना बंद करना चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, इन हमलों का असर रूस की ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहा है और डीजल की उपलब्धता में कमी की स्थिति बन रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यूक्रेन रूस के खिलाफ अन्य लक्ष्यों को निशाना बना सकता है, लेकिन डीजल ढांचे पर हमले रोकने चाहिए।
ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रूस और यूक्रेन के बीच हवाई तथा ड्रोन हमलों का सिलसिला लगातार तेज हुआ है। यूक्रेन लंबे समय से रूस के भीतर स्थित सैन्य, औद्योगिक और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को ड्रोन हमलों के जरिए निशाना बना रहा है। कीव का तर्क है कि रूस की युद्ध क्षमता और उसकी सैन्य आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित करना उसके जवाबी सैन्य अभियान का हिस्सा है।
यूक्रेन ने हाल के महीनों में रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ढांचे पर लंबी दूरी के ड्रोन हमलों को बढ़ाया है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक अगस्त में उसकी लंबी दूरी की कार्रवाई में रूस के 12 प्रमुख तेल रिफाइनरी, गैस और पेट्रोकेमिकल प्रतिष्ठान तथा रक्षा उद्योग से जुड़े ठिकाने प्रभावित हुए थे। यूक्रेन का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य रूस की युद्ध मशीन को ईंधन और आर्थिक संसाधनों की उपलब्धता प्रभावित करना है।
रॉयटर्स के अनुसार, यूक्रेनी हमलों के चलते रूस में ईंधन उत्पादन प्रभावित हुआ है और देश में गैसोलीन तथा डीजल की कमी की स्थिति बनी है। इसी पृष्ठभूमि में रूस ने डीजल के निर्यात पर भी रोक लगाई है। ट्रंप ने रूस में पैदा हो रही ईंधन संबंधी परेशानी को व्यापक ऊर्जा संकट से जोड़ते हुए यूक्रेन से हमले रोकने की अपील की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति की चिंता केवल रूस की घरेलू ईंधन आपूर्ति तक सीमित नहीं है। मौजूदा समय में वैश्विक तेल और रिफाइंड ईंधन बाजार पहले से ही दबाव में है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने भी सितंबर में 2026 के लिए वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर अपने अनुमान में कमी की है। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति संबंधी व्यवधानों के कारण तेल तथा डीजल बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
ट्रंप के बयान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने यूक्रेन को रूस के खिलाफ हमले पूरी तरह बंद करने के लिए नहीं कहा, बल्कि विशेष रूप से डीजल और तेल रिफाइनिंग से जुड़े लक्ष्यों पर हमले रोकने की बात कही। रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन अन्य लक्ष्यों पर कार्रवाई कर सकता है, लेकिन डीजल ईंधन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाना बंद करना चाहिए।
यह रुख रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिकी नीति के जटिल पक्ष को भी सामने लाता है। एक ओर अमेरिका यूक्रेन के साथ सहयोग और रूस पर दबाव की नीति जारी रखता है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप युद्ध के ऐसे प्रभावों को कम करना चाहते हैं जो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और अमेरिकी उपभोक्ताओं को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका में डीजल की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर हैं, जिससे परिवहन और कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है।
यूक्रेन की ओर से रूस के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का सिलसिला भी इसी युद्ध रणनीति का हिस्सा है। कीव का कहना है कि रूस लगातार यूक्रेन के ऊर्जा, औद्योगिक और नागरिक ढांचे पर हमले कर रहा है और ऐसे में रूस की युद्ध क्षमता को प्रभावित करने के लिए उसके भीतर स्थित सैन्य और रणनीतिक प्रतिष्ठानों पर हमला करना जरूरी है।
इसी बीच रूस और यूक्रेन के बीच हमले और जवाबी हमले जारी हैं। 12 सितंबर को रूस ने यूक्रेन के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए, जिनमें नागरिकों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। यूक्रेन ने भी रूस के भीतर रणनीतिक और औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाया। इससे दोनों देशों के बीच लंबी दूरी के हमलों का दायरा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
ट्रंप का ताजा बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय आया है जब युद्ध को समाप्त कराने के लिए अमेरिका की कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं। इससे पहले ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत को सकारात्मक बताया था और कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि रूस युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। जेलेंस्की के साथ भी अमेरिकी स्तर पर बातचीत जारी है।
कुल मिलाकर, ट्रंप का संदेश यूक्रेन के लिए स्पष्ट है कि रूस के डीजल और तेल रिफाइनिंग ढांचे पर हमले ऐसे समय में न किए जाएं जब वैश्विक ईंधन बाजार पहले से दबाव में है। हालांकि, यूक्रेन की ओर से इन हमलों को अपनी सैन्य रणनीति का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में ट्रंप की अपील और यूक्रेन की युद्ध रणनीति के बीच आगे भी टकराव की स्थिति देखने को मिल सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि रूस की ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहे असर और वैश्विक डीजल बाजार की स्थिति ने इस युद्ध के ऊर्जा पक्ष को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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