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सेंट्रल जीएसटी इंटेलिजेंस टीम का चंधासी कोयला मंडी में पड़ा छापा ।

जाँच में फर्जी मिला फर्म का पता

रिपोर्ट! संदीप कुमार 

पीडीडीयू नगर (चन्दौली) : एशिया की प्रमुख चंधासी कोयला मंडी अपने काले कारोबार को लेकर हमेशा चर्चा में बना रहता है ।

मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के चंधासी कोयला मंडी में मंगलवार की सुबह दस बजे सेंट्रल जीएसटी इंटेलिजेंस की टीम ने छापा मार दिया। छापे की खबर लगते ही मंडी के व्यापारियों में हड़कंप मच गया। जीएसटी टीम की छापामारी से संबंधित कार्य करने वाले व्यापारियों ने ट्रान्सपोर्ट में ताला लगाकर भाग गए।

चंदौसी कोयला मंडी स्थित कालका कटरा में जीएसटी की टीम मंगलवार की सुबह पहुंचकर सेकंड फ्लोर पर छापेमारी शुरू कर दिया ।वहां पहुंचते ही ट्रांसपोर्ट में ताला लगा देखकर टीम रुक गई ।आसपास ट्रांस्पोर्टरों से जांच पड़ताल करना शुरू कर दिया। इस दौरान कोई भी व्यापारी जीएसटी टीम को सही जवाब नहीं दिया।

गौरतलब हो कि एशिया की प्रमुख चंदौसी कोयला मंडी में कोल डायमंड की आड़ में टैक्स चोरी, हेरा फेरी, कायले में काला पत्थर की मिलावट, फर्जी बील बाउचर बनवा कर करोड़ों अरबों की धंधा करते हैं।यही नहीं अपने कागजात में व्यापारी चंदासी मंडी के पते पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा रखे हैं। जब कभी उस पते पर अधिकारी पहुंचते हैं तब फर्जी ऑफिस का खुलासा होता है।जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का चुनाव लगते हैं।

जीएसटी टीम कोल माफिया अभय सिंह के नाम सर्च वारंट लेकर झारखंड से लेकर आती है। टीम के सदस्य जब कालका कटरा में अभय सिंह कोल व्यवसायी के ट्रांसपोर्ट पहुंचने पर पता चलता है कि इस अभय सिंह नाम का व्यक्ति इस कटरे में नहीं रहता है। जिससे टीम हैरान व दंग रह जाती है। फर्म पर ताला लगने के कारण टीम अंदर प्रवेश नहीं कर सकी।

टीम ने मकान मालिक से इस बाबत पूछने पर बताया कि उस दुकान नंबर में सज्जन खान रहते हैं। काले कोयले के खेल में यह नया खेल नहीं है ।अंत में टीम ने मकान मालिक से लिखित लेकर चंदौसी कोयला मंडी में अभय सिंह के तलाश में भटकती रही। टीम इंचार्ज मनीष कुमार ने बताया कि गत दिनों एक कोयले की गाड़ी पकड़ी गई।

जिस पर भद्र काली इंटर प्राइसेज के मालिक अभय सिंह निवासी हजारी बाग झारखंड है। जो कोयला फैक्ट्री में जाना था। उस कोयला को चंधासी मंडी में उक्त पते पर भेजा गया। जांच करने पर पता ही गलत निकला। जानकारों का कहना है कि चंदौसी मंडी में झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश आदि स्थानों से इसी तरह के कोयले आते हैं । पकड़े जाने पर उनके फार्म का पता ही नहीं चलता, जिससे सरकार को लाखों-करोड़ों रूपए राजस्व का नुकसान होता है।

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