वाराणसी। अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) रवींद्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत कुटरचित दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी से जमीन रजिस्ट्री कराने के मामले में हनुमानपुरा, भेलूपुर निवासी आरोपी चन्द्रधर सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी सुनवाई के बाद बुधवार को खारिज कर दी। अदालत में जमानत अर्जी का विरोध वादी के अधिवक्ता बंटी खान ने किया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार हबीबपुरा थाना चेतगंज निवासी प्रार्थी शंकर प्रसाद ने आरोप लगाया है कि उसके बाबा ज्योति पुत्र जीतू निवासी हबीबपूरा की मृत्यु 24 फरवरी 1981 को हो गई जिनका नगर निगम वाराणसी द्वारा निर्गत मृत्यु प्रमाण पत्र प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न है। प्रार्थी की बड़ी माता श्रीमती नागेश्वरी देवी जो जीवित है और उनके पति की मृत्यु हो चुकी है और कोई संतान नहीं है और प्रार्थी की बड़ी मां है।
प्रार्थी की पुश्तैनी जायदाद आरजी नंबर 172 रकबा 0.2060 हेक्टेयर व आराजी नंबर 173/1 रकबा 0.2 160 हेक्टेयर स्थित मौजा भदैनी, परगना देहात अमानत, थाना भेलूपुर, जनपद प्रार्थी तथा प्रार्थी के संयुक्त परिवार की संपति है जिस पर प्रार्थी तथा प्रार्थी के संयुक्त परिवार के सदस्य काबीज है।
उक्त जमीन को हड़पने की नियत से बृजनाथ सिंह व चंद्रधर सिंह द्वारा स्वर्गीय चौथीराम जिनकी मृत्यु 24 फरवरी, 1981 को हो गई तथा नागेश्वरी देवी पत्री केदारनाथ जो जीवित हैं दोनों का एक अनरजिस्टर्ड कूटरचित वसीयत 23 मार्च 1988 को बृजनाथ सिंह व चंद्रभान सिंह ने कुछ अज्ञात लोगों के सहयोग से अपने हक में तैयार कराई और उक्त कूटरचित अनरजिस्टर्ड वसीयत पर न्यायालय तहसीलदार सीलिंग के न्यायालय में मुकदमा दाखिल कर आराजी नंबर 172 एवं 173/1 स्थिति मौजा भदोनी, थाना भेलूपुर पर अपना नाम धोखाधड़ी करके चढा लिया और नाजायज तरीके से कब्जा करने का प्रयास करने लगे।
प्रार्थी को ज्ञात होने पर राजस्व न्यायालय में बाद प्रस्तुत किया, जिससे उक्त लोगों का नाम निरस्त कर दिया गया इस प्रकार बृजनाथ सिंह व चंद्रधर सिंह ने कुछ अज्ञात लोगों के सहयोग से एक कूटरचित अन रजिस्टर्ड वसीयत मृतक व्यक्ति चौथौ तथा जीवित व्यक्ति नागेश्वरी देवी का कराया और नागेश्वरी देवी के जीवनकाल में ही उनकी संपत्ति पर धोखाधड़ी करके फर्जी वसीयत का उपयोग वाराणसी कचहरी में किया।
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