बकाया हैं मजदूरी, मिल जाती तो खुद खरीदने लायक हो जाते, विकास में लूट के पैसे से बांटा जा रहा कंबल

चंदौली। एआईपीएफ नेता अजय राय का कहना है कि विकास में लूट के पैसे से प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अस्सी से सौ रुपए का कंबल कई लोगों के हाथों द्वारा बांटा जा रहा है। गरीब मजबूरी में शाम तक ठिठुरते हैं। मजदूरी बकाया है, मिल जाती तो खुद खरीदने लायक हो जाते। विकास में लूट के पैसे से कंबल बांटा जा रहा हैं, और वाहवाही करने और फोटो खींचवाने वालों की होड़ मची हुई है। उनकी आँखें निकाल कर उन्हें चश्में बांटे जा रहे हैं।

अजय राय 

भारत पांचवां अर्थव्यवस्था वाले देशों में शामिल होगा। उस देश की अस्सी करोड़ जनता मुफ्त राशन व ठंड में कम्बल के लिए लाइन में लग रही हैं। सरकार अगर गरीबों की कल्याणकारी योजनाएं सहीं तरह से उन तक पहुंचा दें तो वह अस्सी व सौ रुपए के कम्बल के लिए लाइन में नहीं लगेंगे। खुद खरीदने के लायक हो जाएंगे। 

जनप्रतिनिधि मजदूरों की बकाया मजदूरी भुगतान नहीं करेंगे, लेकिन ठंड में प्रचार प्रसार कर कम्बल का वितरण जरूर करेंगे। कई नेता आयेंगे अस्सी से सौ रुपए की कम्बल कई हाथों से पकड़ कर फोटो जरूर खिंचवाएंगे। 

हां यह जरूर हैं कि कई समाजसेवी, जनप्रतिनिधि व संस्था ठंड में निःस्वार्थ कम्बल का वितरण करते हैं। अच्छा कमाई करने वाले की भी बुढ़ी मां को कम्बल लेने की लाइन में लगे होने पर हृदय में दर्द होता हैं। सरकार आम जनता की क्रयशक्ति की क्षमता पर ध्यान दे।