चंदौली। भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी ओबीसी के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ धर्म, जाति, लिंग, जन्म-स्थान या दिव्यांगता के आधार पर हो रहे जातिगत भेदभाव और जातीय हिंसा को प्रभावी ढंग से रोकने और समानता को बढ़ावा देने और संविधान के सम्मान के लिए अपनी जनता पार्टी प्रमुख स्वामी प्रसाद मौर्य के आवाहन पर पूरे प्रदेश में यूजीसी के समर्थन में जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर यूजीसी के पूर्ण और तत्काल कार्यान्वयन की मांग की गई है।
प्रदेश सचिव अर्जुन प्रसाद आर्य ने कहा कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी गुणवत्तापूर्ण एवं संविधान सम्मत एससी एसटी ओबीसी और ईडब्लूएस छात्रों के धर्म जाति नस्ल लिंग या जन्म स्थान के आधार पर हो रहे जातीय अपमान व भेदभाव रोकने की दिशा में यूजीसी एक्ट 2026 एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम है।
यह विधेयक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14,15,16,17,18, 21, एवं 21(क) के अंतर्गत समानता गरिमा और शिक्षा के अधिकार व समता की भावना को सुदृढ़ करता है। इससे विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक मानकों का एकीकरण, प्रशासनिक उत्तरदायित्व तथा विद्यार्थियों के हितों की रक्षा सुरक्षा सुनिश्चित होगा। जिससे पी एच डी छात्र रोहित बेमुला और डॉ पायल तड़वी और आईआईटी छात्र दर्शन सोलंकी जैसी घटनाओं का कोई शिक्षार्थी शिकार न बने।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में कम से कम 27 से 30 छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं दर्ज की गई है जिनमें आईआईटी कानपुर से सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।
4 फरवरी 2026 तक आईआईटी मुंबई में आत्महत्या का एक नया मामला सामने आया। इससे पहले 20 जनवरी 2026 को आईआईटी कानपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आ चुका है।
राज्यसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़े के अनुसार 2018 से 2023 तक उच्च शिक्षण संस्थानों में 98 आत्महत्याएं उजागर हुई है, जिनमें 39 आईआईटी, 25 एनआईटी और 25 केंद्रीय विश्वविद्यालयों से है।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के 2023 के आंकड़ों के अनुसार छात्रों द्वारा आत्महत्याओं की संख्या 13892 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
कम रिपोर्टिंग आईसी - 3 संस्थानो की 2025 की एक रिपोर्टिंग में अनुमान लगाया गया है कि प्रत्येक वर्ष 13000 से अधिक छात्र आत्महत्या के शिकार होते हैं, जिससे पता चलता है की कलम और रिपोर्टिंग की कमी या गलत वर्गीकरण के कारण संख्या कम बताई जा रही है। प्रमुख संस्थानों में आत्महत्याओं का एक बड़ा प्रतिशत अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों का होता है। उक्त आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि जातिगत भेदभाव के कारणों से प्रभावित होकर उच्च शिक्षण संस्थानों में घटनाएं बड़े पैमाने पर हो रही है।
अतएव देश व छात्रहित को ध्यान में रखते हुए अपनी जनता पार्टी यूजीसी विधेयक 2026 का समर्थन करती है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतू महामहिम राष्ट्रपति से मांग करती है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव हिंसा समाप्त करने हेतु यूजीसी विधायक 2026 को प्रभावी ढंग से लागू करवाने की कृपा करें।
हालांकि यूजीसी कानून आज राजनीतिक चर्चाओं और विरोध का विषय बना हुआ है। इसका विरोध करने वाले ही मूलतः देश में हिंसा और उन्माद पैदा कर हिन्दू मुस्लिम करके लड़ाया और भारत को टुकड़े टुकड़े में विभाजित कर दिया। इनका ही देन है कि भारत से अफगानिस्तान, तिब्बत, म्यांमार (बर्मा), बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और पाकिस्तान अलग हुआ है। हमारा संघर्ष इसके प्रभावी क्रियान्वयन तक जारी रहेगा।
इस दौरान जिलाध्यक्ष सुजीत मौर्य, जिला प्रभारी रामललित मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष महिला मोर्चा इंदु मेहता, प्रदेश उपाध्यक्ष युवा मोर्चा चंद्रशेखर मौर्य, जिलाध्यक्ष महिला मोर्चा कंचन रानी, जिला महासचिव लालमणि चौहान, पूर्व रेलवे विधि अधिकारी रामसुभाष, प्रेमशंकर, आनंद कुमार, रामलाल मौर्य, अंबिका प्रजापति, इंदू देवी, रोहित कुमार, वंशराज, बीरेंद्र कुमार, जय प्रकाश, कन्हैया लाल मौर्य सहित अन्य समर्थक मौजूद थे।
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