ChatGPT से बने दस्तावेज़ों सहित चंदौली पुलिस ने 22 वर्षीय युवक को दबोचा
डीडीयू नगर, चन्दौली (उत्तर प्रदेश), 26 मार्च 2026: कोतवाली क्षेत्र में सघन चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक 22 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया, जो खुद को कभी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का गुप्त एजेंट तो कभी असिस्टेंट कमांडेंट बताकर लोगों को डराता-धमकाता और निजी फायदा उठाता था। आरोपी मोबाइल पर ChatGPT जैसी AI टूल्स का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार करता, जो सरकारी फॉर्मेट में इतने वास्तविक लगते थे कि लोग आसानी से भ्रमित हो जाते।
पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे के निर्देश पर चल रही होली नो एंट्री अभियान की चेकिंग में पुलिस टीम को एक संदिग्ध बाइक सवार दिखा। रोककर तलाशी लेने पर उसके पास से 5 फर्जी आईडी कार्ड (RAW एजेंट, CRPF अधिकारी आदि), 3 नकली निमंत्रण पत्र (सरकारी कार्यक्रमों के), एक Vivo Y16 स्मार्टफोन और AI-जनरेटेड PDF फाइलें बरामद हुईं। फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि ये दस्तावेज ChatGPT प्रॉम्प्ट्स से बने थे, जैसे "RAW एजेंट आईडी कार्ड हिंदी में डिजाइन करो"।
पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि वह इंटरनेट से सरकारी लोगो, फॉन्ट और भाषा कॉपी करता, फिर ChatGPT से प्रोफेशनल फॉर्मेट में दस्तावेज जनरेट करता। NCRB डेटा 2024 के अनुसार, उत्तर प्रदेश में साइबर फ्रॉड के 1.2 लाख मामले दर्ज हुए, जिनमें 15% AI टूल्स से जुड़े थे। वह इनका इस्तेमाल लोगों पर रौब जमाने, प्राइवेट पार्टी में घुसने, पैसे उधार लेने या झगड़ों में पक्ष लेने के लिए करता। एक उदाहरण: उसने स्थानीय एक कार्यक्रम में "सुरक्षा अधिकारी" बनकर फ्री एंट्री ली और बाद में मालिक से पैसे ऐंठे।
गिरफ्तार आरोपी रूपेश उपाध्याय (22 वर्ष), ग्राम हेतमपुर, थाना धानापुर, चंदौली का निवासी है। उसके खिलाफ IPC धारा 419 (धोखाधड़ी), 420 (छल), 467 (जालसाजी) और IT एक्ट 2000 की धारा 66C/D के तहत मुकदमा दर्ज। चंदौली जिला (जनसंख्या ~40 लाख, वाराणसी डिवीजन में) में पिछले साल 200+ फर्जी आईडी मामले सामने आए, ज्यादातर युवा सोशल मीडिया प्रभावित। पुलिस अब उसके संपर्कों की स्क्रीनिंग कर रही, जिसमें 50+ व्हाट्सएप चैट्स मिले जहां वह फर्जी ID शेयर करता था।
SP लांग्हे ने चेतावनी दी कि AI से फर्जी दस्तावेज बनाना आसान हो गया है—Google Bard या ChatGPT से 2 मिनट में तैयार हो जाते हैं। जनता से अपील किया कि संदिग्ध ID पर 112 डायल करें। जांच में पता चला कि रूपेश ने 6 महीने में 10+ घटनाओं में यह चाल चली, जिसमें ₹20,000 का फायदा उठाया। आगे पूछताछ जारी।
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