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चंदौली में खंभे खड़े, तार गायब: 3 साल से अंधेरे में डूबा पखनपुरा, विकास के दावे हुए शर्मिंदा

चंदौली। सरकार के 'हर गांव में बिजली, हर घर रोशनी' के जोरदार दावों के बीच चंदौली विकासखंड का ग्राम पखनपुरा एक जीता-जागता उदाहरण बन गया है, जहां बुनियादी सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खोखले वादे ही नजर आते हैं। पासवान, यादव, मुस्लिम और गोंड बस्ती के सैकड़ों ग्रामीण पिछले तीन सालों से पूर्ण अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। 

सबसे चौंकाने वाली बात? 
गांव में बिजली के खंभे तो चमचमाते हुए खड़े हैं, लेकिन न तार बिछे, न ट्रांसफार्मर लगा। रातें मोमबत्तियों और टॉर्च की रोशनी में कटती हैं, जबकि पड़ोसी गांवों में स्मार्ट मीटर चमक रहे हैं।

ग्रामीण संजय प्रसाद बताते हैं, "रात को बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। सांप-बिच्छू का डर लगा रहता है। तीन साल पहले खंभे लगे, तब लगा रोशनी आ जाएगी, लेकिन अब ये खंभे हमारी मजबूरी के साक्षी मात्र हैं।" भरत पासवान और नखडू पासवान जैसे ग्रामीणों का आरोप है कि 10 से ज्यादा शिकायतें बिजली विभाग, ग्राम प्रधान और स्थानीय विधायक को की गईं, लेकिन हर बार 'जल्द होगा' कहकर टाल दिया गया।जिले में 2023 तक 95% ग्रामीण विद्युतीकरण का दावा किया गया, लेकिन पखनपुरा जैसे गांव इसकी पोल खोल रहे हैं।

सड़कें भी बन रहीं कालाधन का शिकार
बिजली संकट के साथ सड़कें भी ग्रामीणों की मुसीबत बढ़ा रही हैं। रज्जुपुर-पखनपुरा से तकियापर जाने वाला मुख्य मार्ग गंदगी, कचरा और जलभराव से लबालब भरा पड़ा है। नालियां ठप हैं, गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है। सुसुम देवी रोती हुई बताती हैं, "बच्चे स्कूल जाते समय फिसल जाते हैं, बीमारियां फैल रही हैं। बारिश में तो गांव कट जाता है।" ग्रामीण सावित्री, निर्मला और सीमा ने कहा कि ग्राम प्रधान को कई बार सूचना दी, लेकिन जिम्मेदारी विभागों पर थोप दी गई।

ग्रामीणों का आक्रोश: अब चुप नहीं रहेंगे
गांव में नाराजगी चरम पर है। ग्रामीण गुलाब प्रसाद ने कहा, "विकास के नाम पर कागजी खानापूर्ति हो रही है। हम वोट देते हैं, लेकिन सुविधा नहीं मिलती।" संजय प्रसाद, भरत पासवान समेत ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। बिजली के तार बिछवाना और ट्रांसफार्मर लगाना।मुख्य सड़क की सफाई, मरम्मत और स्थायी जल निकासी। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई।

बड़ा सवाल: आखिर तीन साल से खड़े ये खंभे कब रोशनी बिखेरेंगे? क्या पखनपुरा के ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए और इंतजार करना पड़ेगा, या प्रशासन इस बार जागेगा? ग्रामीण धमकी दे रहे हैं—अगर जल्द समाधान न हुआ तो आंदोलन करेंगे।

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