चंदौली, 22 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के थाना धीना क्षेत्र के सिलौटा गांव में 11 अप्रैल की रात एक शर्मनाक घटना घटी, जब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को अज्ञात अपराधियों ने तोड़ दिया। सुबह होते ही समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा—बवाल मच गया। कई थानों से भारी संख्या में पुलिस बल और भीम आर्मी के सैकड़ों कार्यकर्ता जुट गए। थानाध्यक्ष दिलीप श्रीवास्तव ने तत्काल आश्वासन दिया कि चार दिनों के अंदर सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। नई प्रतिमा भी उसी दिन स्थापित कर दी गई, और मामला शांत हो गया। लेकिन 11 दिन बीत चुके हैं—न कोई छापेमारी, न गिरफ्तारी। अपराधी आजाद घूम रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश पनप रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस आरोपी पक्ष के इशारों पर नाच रही है। आसपास के चट्टी-चौराहों पर सवाल गूंज रहे हैं। क्या यह पुलिस की नाकामी है या अपराधियों से सांठ-गांठ? सिलौटा की दलित बस्ती में तनाव चरम पर है। लोग चिल्ला रहे हैं—त्वरित गिरफ्तारी करो, गांव में स्थायी पुलिस चौकी खोलो, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करो। यह घटना अब सिर्फ प्रतिमा तोड़ने तक सीमित नहीं रही; यह दलित समाज के सम्मान, असुरक्षा और न्याय की लड़ाई का प्रतीक बन चुकी है।
भीम आर्मी का अल्टीमेटम: थाना घेराव, रेल रोको और हाईवे जाम
भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष रामचंद्र राम ने साफ चेतावनी दी: "एक हफ्ते में अपराधियों को न पकड़ा गया और कड़ी सजा न दी गई, तो धीना थाने का घेराव करेंगे। रेल रोको, हाईवे जाम और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होंगे।" युवा, महिलाएं और सैकड़ों समर्थक जुटने को तैयार हैं। एक स्थानीय महिला ने दृढ़ता से कहा, "हमारा सम्मान तोड़ा गया है। न्याय न मिला तो आंदोलन में हम सबसे आगे रहेंगी।" गांव में सभाएं हो रही हैं, और ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे रहा है।
पृष्ठभूमि और व्यापक प्रभाव
यह घटना चंदौली जैसे ग्रामीण इलाकों में व्याप्त जातिगत तनाव को उजागर करती है, जहां दलित समुदाय अक्सर ऐसी हिंसा का शिकार होता है। अंबेडकर प्रतिमा दलित समाज के लिए सिर्फ मूर्ति नहीं, बल्कि समानता, शिक्षा और न्याय की प्रेरणा है। पुलिस की सुस्ती ने न सिर्फ स्थानीय विश्वास को तोड़ा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में असुरक्षा की भावना फैला दी है। यदि शीघ्र कार्रवाई न हुई, तो यह छोटी चिंगारी बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है—जैसा कि उत्तर प्रदेश में पहले भी देखा गया है। प्रशासन पर दबाव तेज हो रहा है; बड़ा हंगामा तय माना जा रहा है।
ग्रामीणों की मांगें स्पष्ट हैं: अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी सजा।सिलौटा में पुलिस चौकी की स्थापना।
24x7 सुरक्षा व्यवस्था। प्रशासन अब चुप्पी तोड़कर ठोस कदम उठाए, वरना हालात बेकाबू हो सकते हैं।
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