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सकलडीहा पीजी कॉलेज में पृथ्वी दिवस

छात्रों ने ली पर्यावरण संरक्षण की शपथ, जलवायु संकट से पृथ्वी का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर।

सकलडीहा,चंदौली, 22 अप्रैल 2026: पृथ्वी दिवस के पावन अवसर पर सकलडीहा पीजी कॉलेज में समाजशास्त्र विभाग ने एक प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया, जहां सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान और मां पृथ्वी को सुरक्षित रखने की सौगंध ली। क्या आप जानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1970 से मनाए जा रहे इस दिवस ने विश्व भर में 10 लाख करोड़ से अधिक पेड़ लगवाए हैं? इसी उत्साह के साथ कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडेय की अध्यक्षता में यह समारोह संपन्न हुआ, जो न केवल शपथ तक सीमित रहा, बल्कि एक गहन संगोष्ठी के रूप में उभरा।

जलवायु संकट की चेतावनी: भारत के शहर गर्मी की चपेट में
संगोष्ठी में वक्ताओं ने पृथ्वी दिवस के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, जंगलों की बेरहमी से कटाई और अनियोजित शहरीकरण के कारण पृथ्वी का औसत तापमान पिछले 100 वर्षों में 1.1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि विश्व के टॉप-10 सबसे गर्म शहरों में भारत के अहमदाबाद, राजकोट और दिल्ली जैसे शहर शुमार हैं! विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि जल संरक्षण, वृक्षारोपण, ऊर्जा बचत और प्लास्टिक कचरे पर रोक जैसे कदम ही पृथ्वी को बचा सकते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, यदि हर व्यक्ति प्रतिवर्ष एक पेड़ लगाए, तो 2050 तक वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 20% कमी संभव है।

प्राचार्य का भावुक आह्वान: प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडेय ने कहा, "पृथ्वी बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। विद्यार्थी भविष्य के स्तंभ हैं, उन्हें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनना होगा। दैनिक जीवन में रीयूज-रिड्यूस-रिकायल को अपनाएं, तभी हम हरे-भरे ग्रह की सौगंध निभा पाएंगे।" उनके शब्दों ने छात्रों में उत्साह का संचार कर दिया।

विभागाध्यक्ष का संदेश: पर्यावरण जीवनशैली का हिस्सा बने
समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दयाशंकर सिंह यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "पर्यावरण संरक्षण कोई एक दिवसीय उत्सव नहीं, बल्कि जीवनशैली का अभिन्न अंग होना चाहिए। समाज में जागरूकता फैलाकर ही हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को प्रदूषण-मुक्त भविष्य दे सकते हैं।" वहीं, प्रोफेसर दया निधि सिंह ने भावुक अपील की, "पृथ्वी हमारा जीवन आधार है। जल, जंगल, जमीन के बिना मानव सभ्यता का कोई भविष्य नहीं। हर व्यक्ति कम से कम एक पेड़ लगाए और उसकी देखभाल करे- यह संकल्प आज से शुरू करें!"

शिक्षावृंद की मौजूदगी, छात्रों को मिला प्रेरणा का डोज
कार्यक्रम में प्रो. इंद्रदेव सिंह, प्रोफेसर विजेंद्र सिंह, प्रो. शमीम राईन, डॉ. रजनीश गुप्ता, डॉ. अमन मिश्रा, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. इंद्रजीत सिंह, डॉ. राजेश यादव, डॉ. अजय यादव, संदीप सिंह, डॉ. जितेंद्र यादव, यज्ञनाथ पांडे, डॉ. श्याम लाल यादव, डॉ. पवन ओझा समेत बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने छात्रों को पृथ्वी संरक्षण के लिए सतत जागरूक रहने का संदेश दिया। समाजशास्त्र सहित अन्य विभागों के छात्र-छात्राओं की भारी उपस्थिति ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर दयाशंकर सिंह यादव ने कुशलतापूर्वक किया।

यह आयोजन न केवल शपथ तक सीमित रहा, बल्कि छात्रों में पर्यावरण के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता जागृत करने में सफल सिद्ध हुआ।

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