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जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान चंदौली में भावुक विदाई

प्राचार्य विकायल भारती को नम आंखों से अलविदा, भावनाओं का सैलाब उमड़ा

चंदौली। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान चंदौली के सभागार में गुरुवार को प्राचार्य विकायल भारती की विदाई समारोह ने हर आंख को नम कर दिया। वर्षों की निष्ठावान सेवा के बाद सेवानिवृत्ति की दहलीज पर खड़े प्राचार्य भारती को श्रद्धांजलि स्वरूप आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर से सैकड़ों शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और अभिभावक उमड़ पड़े। नम आंसुओं के बीच दी गई विदाई संस्थान के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय बन गई।

समारोह का आगाज प्राचार्य भारती के स्वागत गान से हुआ, जिसमें डायट के छात्र-छात्राओं ने उनकी उपलब्धियों पर आधारित हृदयस्पर्शी प्रस्तुति दी। जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, प्रमुख शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय अभिभावक सभागार में डेरा डाले थे।


एक वरिष्ठ शिक्षक ने भावुक स्वर में कहा, "विकायल सर ने डायट को महज प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि शिक्षकों का पवित्र परिवार गढ़ा। उनकी विदाई हम सबके दिल पर गहरी चोट है।" हर मौजूद व्यक्ति उनकी कुशल नेतृत्व, शिक्षक प्रशिक्षण में अमिट योगदान और संस्थान को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए कृतज्ञता जता रहा था।

कार्यक्रम का चरमोत्कर्ष तब आया जब प्राचार्य भारती को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। जिला विद्यालय निरीक्षक ने विशेष शाल, फूलों की मालाएं और सम्मान पत्र प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। खंड शिक्षा अधिकारियों ने एक-एक कर आगे बढ़े, अंगवस्त्र ओढ़ाए और फूलों की वर्षा कर मालाओं से लाद दिया।

भावुक प्राचार्य भारती ने संबोधन में कहा, "यह संस्थान मेरे लिए परिवार ही था। चंदौली के शिक्षकों को मजबूत बनाने का सपना आप सबने साकार किया। अब नई पीढ़ी को सौंप रहा हूं।" उनके शब्दों पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और आंसुओं के सैलाब से गूंज उठा।

समारोह में डायट की झलकियां भी पेश की गईं—शिक्षक प्रशिक्षण शिविरों, कार्यशालाओं और नवीन शैक्षिक योजनाओं पर वीडियो प्रस्तुतिकरण ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्राचार्य भारती के कार्यकाल में संस्थान ने राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते, जो दीवार पर सजे प्रमाण-पत्रों से चमक रहे थे। अंत में, राष्ट्रगान के सामूहिक गान से समारोह का भावपूर्ण समापन हुआ। यह विदाई न केवल एक व्यक्ति की, बल्कि चंदौली शिक्षा जगत के एक युग का समापन थी।

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