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जय भीम के उद्घोष से गूंजा सकलडीहा

बाबा साहब के सम्मान में भव्य धम्म यात्रा, भंते चंदिमा थेरो किए शिरकत, मिशन कलाकारों ने बांधा समा

चंदौली के सकलडीहा कस्बा रविवार की शाम 'जय भीम' के जोशीले नारों से गुंजायमान हो उठा। डॉ. भीमराव आंबेडकर के सम्मान में निकाली गई धम्म यात्रा ने पूरे इलाके को एकजुट कर दिया। भिक्खु संघ के प्रमुख भंते चंदिमा थेरो की उपस्थिति में यह यात्रा निकली, जिसमें मिशन कलाकारों ने मिशनरी गीतों से समा बांध दिया। हजारों श्रद्धालु हाथों में तिरंगा, पंचशील, नीला झंडा व बाबा साहब की फोटो थामकर शामिल हुए, जो सामाजिक सद्भाव की मिसाल बनी।

धम्म यात्रा का शुभारंभ सकलडीहा इण्टर कॉलेज के प्रांगण के प्रमुख बौद्ध विहार से हुआ, जहां भंते चंदिमा थेरो ने बाबा साहब के संविधान निर्माण व बौद्ध धर्म अपनाने के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "अंबेडकर जी ने दलितों को ही नहीं, पूरे भारत को समानता का संदेश दिया। धम्म यात्रा हमें उनके मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।" यात्रा कस्बे की मुख्य सड़कों से गुजरते हुए तहसील मार्ग से ब्लॉक मुख्यालय, कस्बा स्थित बाबा साहब प्रतिमा पर माल्यार्पण व बाजारों से होकर वापस पहुंची, जहां हर तरफ स्वागत के स्वर गूंजे।

मिशन कलाकारों की प्रस्तुति ने माहौल को और रोमांचक बना दिया। 'जय भीम, जय भारत' व 'बौद्ध धम्म की जय' जैसे मिशनरी गीतों पर लोग झूम उठे। रविराज बौद्ध, प्रीति बौद्ध, शिवचरण दीवाना, राजेश आजाद, पप्पू राजा, जैसे कलाकारों ने बांसुरी, तबला, आर्गन, पैड व हारमोनियम के साथ बाबा साहब के जीवन पर आधारित गीतों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। एक कलाकार ने बताया, "ये गीत बाबा साहब के संघर्ष को जीवंत करते हैं, जो युवाओं को प्रेरित करते हैं।"

यात्रा में महिलाओं व बच्चों की भारी भागीदारी रही। नीले रंग की साड़ियां पहने महिलाएं 'अंबेडकर जिंदाबाद' के नारे लगाती रहीं, जबकि बच्चे तिरंगे लहराते चले। स्थानीय संगठनों ने जलपान व प्रसाद का आयोजन किया। अंत में विहार पहुंचकर भंते जी ने सबको धम्म पालन का संकल्प दिलाया। यह आयोजन सकलडीहा को बौद्ध सर्किट के रूप में चिह्नित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
ऐसे उत्सव सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं, खासकर अम्बेडकर जयंती के निकट। सकलडीहा अब बाबा साहब भक्तों का प्रमुख केंद्र बन रहा है।

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