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गरीब आदिवासियों पर बुलडोजर की क्रूरता: 5 पीढ़ियों की मेहनत उजाड़ी

रसूखदारों की जमीन पर चुप्पी क्यों? चंदौली में सैकड़ों परिवार बेघर, खुले आसमां तले सड़क पर तंबू, भीम आर्मी ने दी आंदोलन की चेतावनी

लखनऊ, उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के चकिया थाना क्षेत्र के मुसाखाड़ी-नौगढ़ इलाके में वन विभाग ने भारी पुलिस बल के साथ अचानक धावा बोल दिया। पांच पीढ़ियों से यहां बसे आदिवासी-वनवासी परिवारों की 80 हेक्टेयर कृषि भूमि पर कब्जा कर लिया गया। सरसों-गेहूं की लहलहाती फसलें रौंद दी गईं, पक्के मकान बुलडोजर से जमींदोज कर दिए गए। नतीजा? करीब सैकड़ों परिवार बेघर हो गए। बच्चे-बूढ़े, महिलाएं अब सड़क किनारे तंबुओं में खुले आसमान तले रहने को मजबूर हैं। प्रशासन का दावा है कि यह जमीन वन क्षेत्र में आती है और 'अतिक्रमण हटाओ' मुहिम चल रही है, लेकिन प्रभावित परिवार चिल्ला रहे हैं—हमारे पूर्वजों को पुराने पट्टे मिले थे, 150 साल से खेती कर रहे हैं।

पूर्वजों की विरासत पर कुठाराघात: पक्के मकान भी नहीं बचे
स्थानीय निवासी रामलाल (55) ने आंसू भरी आंखों से बताया, "हमारे दादा-परदादा सैकड़ों वर्षों से इसी जमीन पर खेतीबाड़ी करते आए हैं। पक्के मकान बनाने के लिए ग्राम सभा से लिखित अनुमति ली थी। बिजली-पानी के कनेक्शन भी वैध हैं। फिर भी बिना एक घंटे की पूर्व सूचना के वन विभाग और पुलिस ने सब उजाड़ दिया। मेरी बेटी की शादी का सामान, बर्तन, अनाज—सब कुछ मलबे तले दब गया। अब बच्चे सड़क पर तपतपाती धूप में तड़प रहे हैं। कहां जाएं हम?"

एक बुजुर्ग महिला जानकी देवी ने दर्द भरी पुकार लगाई
"हम गरीब आदिवासी हैं, जंगल में ही जीते आए। सरकार ने हमें वनवासी कहा, लेकिन अब अपना घर भी छीन लिया। रसूखदारों के हवेलीनुमा घर जंगल में ही तो हैं, उनकी जमीन पर बुलडोजर क्यों नहीं?"

फोटो: रामचंद्र राम (भीम आर्मी जिलाध्यक्ष चंदौली)

पक्षपात का आरोप: गरीब निशाने पर, रसूखदार बचे हुए
भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष रामचंद्र राम ने इसे 'दोहरी नीति' का नंगा चेहरा बताया। रामचंद्र राम ने कहा, "आसपास रसूखदारों—बड़े नेताओं, अफसरों और ठेकेदारों—की सैकड़ों एकड़ जमीन वन क्षेत्र में कब्जे वाली है। उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं? केवल गरीब आदिवासी, दलित-वनवासी परिवारों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा। यह SC-ST एक्ट का उल्लंघन है। जिलाधिकारी तत्काल हस्तक्षेप करें, पुनर्वास की व्यवस्था करें। वरना हजारों आदिवासी सड़कों पर उतरेंगे। आंदोलन भड़केगा, दोहरी नीति बर्दाश्त नहीं।"

कसा तंज, "सरकार अदानी-अंबानी को देश की जमीनें दान करने पर तुली है, लेकिन गरीबों का आखिरी टुकड़ा भी छीन रही। भाई चंद्रशेखर आजाद के माध्यम से यह मुद्दा विधानसभा और संसद तक पहुंचेगा। सरकार को जवाब देना पड़ेगा—देश को किस ढांचे पर खड़ा करना चाहते हो?"

फोटो: पिंटू पाल (भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन वाराणसी युवा मंडल अध्यक्ष) 

किसान नेता पिंटू पाल का वन विभाग की क्रूर कार्रवाई पर तीखा प्रहार
उन्होंने कहा, "यह क्या न्याय है"? चकिया के मुसाखाड़ी-नौगढ़ में 150 साल से खेती करने वाले आदिवासी भाइयों की फसलें रौंदीं, पक्के मकान जमींदोज कर सैकड़ों परिवारों को सड़क पर ला दिया। हमारे पूर्वजों के पसीने से सींची जमीन पर कब्जा। लेकिन आसपास रसूखदारों—मंत्रियों के रिश्तेदारों, अफसरों के चहेतों—की हेक्टेयरों जमीन पर चुप्पी क्यों? केवल गरीब, दलित, आदिवासी निशाने पर। यह पक्षपात नहीं, तो क्या है?

सरकार 'अतिक्रमण हटाओ' का नाटक कर रही, लेकिन असली अतिक्रमण तो अदानी-अंबानी के कारखानों में है। देश की जमीनें, जंगल, नदियां—सब कॉरपोरेट्स को बेच दो। गरीब का आखिरी टुकड़ा भी छीन लो। जिलाधिकारी साहब, तत्काल हस्तक्षेप करो, पुनर्वास दो। वरना लाखों किसान-आदिवासी सड़कों पर उतरेंगे। ट्रैक्टर लाएंगे, चक्का जाम करेंगे।
पाल ने प्रभावित परिवारों से अपील की, "डरो मत भाइयों, हम आपके साथ हैं। सुनवाई नहीं तो धरना शुरू।"

फोटो: अर्जुन प्रसाद आर्य 

लॉर्ड बुद्धा डॉ अंबेडकर सेवा समिति उत्तर प्रदेश अध्यक्ष व अपनी जनता पार्टी प्रदेश सचिव अर्जुन प्रसाद आर्य का तंज: 
"SC-ST एक्ट का खुला उल्लंघन। बुलडोजर से आदिवासियों को बेघर करो, संविधान को ताक पर रखो—ये है 'राम राज्य'?" वन विभाग की बुलडोजर कार्रवाई को SC-ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम का सीधा उल्लंघन बताते हुए सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा,
"चकिया मुसाखाड़ी-नौगढ़ में आदिवासी (SC-ST समुदाय) परिवारों पर बुलडोजर चलाना SC-ST एक्ट की धारा 3(1)(iv) और 3(1)(v) का खुला उल्लंघन है। 150 साल पुरानी बसावट, ग्राम सभा की अनुमति वाले पक्के मकान उजाड़े, 80 हेक्टेयर जमीन छीनी—ये अत्याचार नहीं तो क्या? बाबासाहेब ने अनुच्छेद 17, 46 और 244 से वनवासियों को जमीन-घर का अधिकार दिया, लेकिन BJP सरकार कॉरपोरेट्स को खुश करने के लिए गरीबों को सड़क पर ला रही।
रसूखदारों की जमीनें सुरक्षित, केवल SC-ST आदिवासियों पर कहर। 

ये धारा 4 का भी उल्लंघनपुलिस-प्रशासन की मिलीभगत। हम IPDR में FIR दर्ज कराएंगे, हाईकोर्ट जाएंगे। जिलाधिकारी, तत्काल पुनर्वास दो वरना लाखों कार्यकर्ता धरना देंगे। जय भीम, जय अंबेडकर—संघर्ष तेज होगा!"
आर्य ने कहा, "कानूनी सहायता टीम भेजी, प्रभावितों के लिए मुफ्त वकील। सरकार को SC-ST आयोग बुलाना पड़ेगा।"

प्रशासन की चुप्पी, परिवारों का भविष्य अनिश्चित
प्रभावित परिवारों की संख्या 200 से अधिक हो चुकी है। कोई आश्रय, कोई भोजन, कोई इलाज—सब खतरे में। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई चुनावी स्टंट लग रही, क्योंकि रसूखदारों की जमीनें बरकरार हैं। जिलाधिकारी कार्यालय से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अगर पुनर्वास नहीं हुआ, तो बड़ा आंदोलन तय माना जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं। न्याय कब मिलेगा इन बेघर आदिवासियों को?

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