चंदौली के दो वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों, एसडीएम दिव्या ओझा और उनके पति अनुपम मिश्रा के बीच वैवाहिक विवाद ने तूल पकड़ लिया है। दिव्या के पिता निशाकांत ओझा ने प्रतापगढ़ महिला थाने में अनुपम समेत उनके परिवार पर दहेज उत्पीड़न, शारीरिक प्रताड़ना और अन्य गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज कराई है।
दिव्या ओझा 2017 बैच की पीसीएस अधिकारी हैं, जो वर्तमान में चंदौली सदर तहसील में तैनात हैं। अनुपम मिश्रा 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं और पीडीडीयू नगर तहसील में सेवा दे रहे हैं। दोनों की सगाई 19 अक्टूबर 2020 को हुई और शादी 1 दिसंबर 2020 को संपन्न हुई।
शादी के छह साल बाद, 17 मार्च 2026 को निशाकांत ने यह शिकायत दर्ज कराई।
पिता ने दावा किया कि शादी से पहले अनुपम, उनके पिता प्रमोद मिश्रा, मां शशि मिश्रा तथा बहनों पूजा पांडे और प्रीति पांडे ने 20 करोड़ रुपये तक दहेज मांगे, जो बाद में घटकर 1 करोड़ नकद, लग्जरी होटल में शादी और महंगी कार तक सिमट गया। सामाजिक दबाव में सगाई से पहले 10 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए, शादी तक 28 लाख नकद, 40 लाख के गहने और 7 लाख का सामान दिया गया। फिर भी प्रताड़ना जारी रही।
शारीरिक हिंसा और जानलेवा हमले
दिव्या के पिता के अनुसार, अनुपम ने कई बार गला दबाकर हत्या का प्रयास किया। विशेष रूप से 7 दिसंबर 2025 की रात 2 बजे अनुपम और सास ने संयुक्त रूप से हमला किया, जिसमें दिव्या के सिर, हाथ और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। उनके पास मेडिकल रिपोर्ट और ऑडियो रिकॉर्डिंग सबूत के तौर पर मौजूद हैं। इसके अलावा, मारपीट के दौरान अश्लील वीडियो व फोटो बनाकर वायरल करने और ब्लैकमेल की धमकी दी गई। तलाक की मांग पर 20 साल तक न देने और करियर बर्बाद करने की चेतावनी भी दी गई।
जन्मजात नपुंसकता का संवेदनशील आरोप
निशाकांत ने अनुपम पर शादी से पहले जन्मजात नपुंसक होने की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। इस पर सवाल उठाने पर मारपीट, गाली-गलौज और सास-ननदों द्वारा दबाव बनाया जाता था। ससुराल पक्ष ने दिव्या के गहने, कपड़े और सामान कब्जे में ले रखे हैं, जो वापस नहीं कर रहे।
दूसरी पक्ष की हरकत और स्थिति
21 मार्च 2026 की दोपहर अनुपम की मां शशि मिश्रा अधिवक्ताओं संग चंदौली के अलीनगर थाने पहुंचीं, जहां उन्होंने दिव्या के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की कोशिश की। दोनों अधिकारियों के सीयूजी नंबर कवरेज क्षेत्र से बाहर हैं, इसलिए संपर्क नहीं हो सका। मामला अभी जांच के दौर में है, और दोनों पक्षों के बयानों का इंतजार है।
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