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डीएम साहब एक नजर इधर भी: धानापुर के गांवों में झोला-छाप डॉक्टरों का काला कारोबार

किसके संरक्षण में फल-फूल रहा? स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी या मिलीभगत 

चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के धानापुर जैसे पिछड़े इलाकों में बिना मेडिकल डिग्री के झोला-छाप डॉक्टर गांव-गांव छोटी दुकानें खोलकर मौत का सौदा चला रहे हैं। सस्ते इलाज का लालच देकर ग्रामीणों को फंसाते हैं—पेटेंट दवाओं की जगह केवल सस्ती जेनेरिक दवाएं थमाते हैं, जो ब्लड प्रेशर, लीवर और किडनी पर सीधा हमला करती हैं। एक मामूली बुखार किडनी फेलियर में बदल जाता है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल 5,000 से अधिक मौतें ऐसे फर्जी इलाज से हो रही हैं।

ग्रामीणों पर मौत का साया मंडरा रहा
धानापुर ब्लॉक के शहीदगांव, शिवदासीपुर, वर्दीसाड़ा, जमुरना, सीतापोखरी, डबरिया, अवही, पांडेयपुर, कमालपुर समेत 50 से ज्यादा गांवों में ये नीम-हकीम राज कर रहे हैं। ग्रामीण इन्हें ही भरोसेमंद मानते हैं, क्योंकि सरकारी अस्पताल काफी दूर है।

बड़े अस्पतालों से सेटिंग का घिनौना जाल
ये फर्जी डॉक्टर महीनों गलत दवाएं देते रहते हैं। मरीज की हालत बिगड़ने पर कमीशन लेकर निजी केंद्रों या पैथोलॉजी लैबों को रेफर कर देते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, गलत ऑपरेशन से 20% गायनेकोलॉजी मौतें इसी चक्रव्यूह में हो रही हैं। पंचायत प्रतिनिधियों को रिश्वत देकर ये बच निकलते हैं।

प्रशासन की सुस्ती से ग्रामीणों का आक्रोश भड़क रहा
स्वास्थ्य विभाग छापेमारी की घोषणाएं करता है, लेकिन फर्जी डॉक्टर रातोंरात गायब हो जाते हैं। मोबाइल वैन योजनाएं कागजों पर अटकी हैं। विशेषज्ञ चेताते हैं: डिजिटल हेल्थ क्लीनिक, AI-सपोर्टेड मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और सख्त लाइसेंसिंग से ही यह जाल टूटेगा। वरना, ग्रामीण सड़कों पर उतरेंगे—पिछले महीने बिहार के एक गांव में ऐसा ही हंगामा हो चुका है।

विशेषज्ञ चेताते हैं: डिजिटल हेल्थ क्लीनिक, AI-सपोर्टेड मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और सख्त लाइसेंसिंग से ही यह जाल टूटेगा। वरना, ग्रामीण सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

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