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समाजशास्त्र विभाग ने दी स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर छात्रों को भावपूर्ण विदाई

प्राचार्य बोले- समाजशास्त्र समाज को बेहतर बनाने का माध्यम

चंदौली के सकलडीहा पीजी कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग ने मंगलवार को स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं के लिए एक यादगार विदाई समारोह का आयोजन किया।

गरिमामय, उत्साहपूर्ण और भावुक माहौल में सम्पन्न इस कार्यक्रम ने सभी के दिलों को छू लिया। सैकड़ों छात्रों ने स्वागत गीत, सांस्कृतिक नृत्य-गीत और अपने दो वर्षों के कॉलेज जीवन के रोचक अनुभव साझा कर समारोह को अविस्मरणीय बना दिया। हंसी-ठिठोली, आंसुओं भरी यादें और भविष्य की चमकदार योजनाओं ने मंच को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष प्राचार्य प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडेय ने छात्रों को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद देते हुए कहा, "समाजशास्त्र केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उसे सकारात्मक दिशा देने का शक्तिशाली माध्यम है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुशासन, कठोर परिश्रम और नैतिक मूल्यों से लैस होकर छात्र न केवल व्यक्तिगत सफलता पाएं, बल्कि महाविद्यालय और परिवार का मान बढ़ाएं। उनके संबोधन ने छात्रों में नई ऊर्जा का संचार कर दिया।

समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दयाशंकर सिंह यादव ने अपने प्रेरणादायी भाषण में समाजशास्त्र को परिभाषित करते हुए कहा, "यह मनुष्य, समाज, संस्कृति, सामाजिक परिवर्तन, संस्थाओं और मानवीय संबंधों का वैज्ञानिक अध्ययन है।" उन्होंने बताया कि यह विषय छात्रों में सामाजिक चेतना, संवेदनशीलता और तार्किक सोच विकसित करता है। प्रो. यादव ने छात्रों को संदेश दिया कि जीवन में कभी रुकें नहीं, समाज के प्रति जिम्मेदार बनें और निरंतर सीखते रहें। उनका यह उद्बोधन छात्रों के लिए जीवन दर्शन बन गया।

कार्यक्रम में डॉ. प्रीतम उपाध्याय, डॉ. मीनू श्रीवास्तव और डॉ. अजय यादव की विशेष उपस्थिति रही। सभी ने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और परिश्रम, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी। शरद जायसवाल के कुशल संचालन ने कार्यक्रम को रोचक बनाए रखा। अंत में डॉ. प्रीतम उपाध्याय ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और छात्रों का आभार जताते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

छात्रों की भारी संख्या में उपस्थिति से समारोह अत्यंत सफल रहा।मंगलकामनाओं, आशीर्वचनों और समूह छायाचित्र के साथ यह भावपूर्ण विदाई समाप्त हुई, जो छात्रों के कॉलेज जीवन का स्वर्णिम अध्याय बन गई।

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