अंधविश्वास छोड़ो, अनुभव पर भरोसा करो: अपराध-भ्रष्टाचार की जड़ें कट जाएंगी - अर्जुन आर्या
चंदौली जिले के बरहनी ब्लॉक के अमडा गांव के अंबेडकर पार्क में बुद्ध जयंती का उत्सव हर्षोल्लास से संपन्न हुआ। सैकड़ों ग्रामीण, युवा और बौद्ध अनुयायियों ने पार्क को फूलों, दीयों व रंग-बिरंगी झंडियों से सजाया, जो बुद्ध के शांति-करुणा संदेश को जीवंत कर रहा था। अमडा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में दलित-पिछड़े वर्गों की बड़ी आबादी डॉ. अंबेडकर के अनुयायी हैं और बुद्ध की अहिंसा को जीवन में अपनाते हैं। सभी ने 'अपराध छोड़ो, करुणा अपनाओ' अभियान की प्रतिज्ञा ली। यह न सिर्फ धार्मिक आयोजन था, बल्कि चंदौली के सामाजिक बदलाव का प्रतीक भी बना।
मुख्य अतिथि अर्जुन प्रसाद आर्या ने दीप प्रज्ज्वलन के बाद संबोधन दिया। उन्होंने कहा, "भगवान बुद्ध के विचार ही अपराध-भ्रष्टाचार मुक्त समाज की कुंजी हैं। अष्टांगिक मार्ग—सही दृष्टि, संकल्प, वाणी, कर्म, आजीविका, प्रयास, स्मृति व समाधि—से चंदौली जैसे जिलों में व्याप्त बुराइयों को जड़ से उखाड़ सकते हैं।" उन्होंने बरहनी के किसान आंदोलनों व सामाजिक न्याय की लड़ाई में बुद्ध की करुणा के योगदान का उदाहरण दिया।
आर्या ने बुद्ध के उपदेश पर जोर दिया। अंधविश्वास त्यागकर अनुभव पर निर्भर रहें, जो अपराध-भ्रष्टाचार की जड़ें काट देगा। समता, करुणा, अहिंसा व विवेक अपनाएं। जीवन को दुख की पहेली बताते हुए जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति का मार्ग दिखाया। लालच (तृष्णा) को दुख का मूल कारण ठहराया और "अत्तदीपो भव" सूत्र से स्वावलंबन सिखाया।
ऐतिहासिक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि 5वीं शताब्दी ई.पू. राजकुमार सिद्धार्थ ने बोधगया में वैभव त्यागकर निर्वाण पाया व चार आर्य सत्य दिए। बुद्ध ने कभी ईश्वर शब्द नहीं कहा, बल्कि विज्ञान जैसा अनुभव पर जोर दिया।
कलाम सूत्र का उदाहरण देते हुए कहा तीर लगने पर जहर जांचे बिना इलाज न करें, वैसे जीवन में अनुभव ही सत्य है।
सारिपुत्र की कथा सुनाई—ब्राह्मण परिवार के बुद्ध प्रमुख शिष्य अंधविश्वास से विवेक की ओर मुड़े। यह पूर्वी यूपी के किसान आंदोलनों व भ्रष्टाचार विरोध के लिए प्रासंगिक है। पापी संगति छोड़ सुमार्ग अपनाएं व दीनों पर दया करें।
बुद्ध के पंचशील—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह—से अपराधमुक्त समाज संभव। थाईलैंड-जापान जैसे बौद्ध देशों में करुणा से अपराध कम हैं। चंदौली में जादू-टोना, भ्रष्टाचार व जातिवाद खत्म करने के लिए यह मार्ग अपनाएं।
अंत में बुद्ध चित्र पर फूल चढ़ाकर संकल्प लिया: अंधकार मिटाओ, विवेक ज्योति जलाओ। आर्या ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुद्ध विचारों की प्रासंगिकता बताई, सामाजिक समरसता व भ्रष्टाचारमुक्ति का आह्वान किया। यह समावेशी समाज की परिकल्पना को साकार करने वाला आयोजन बना।
0 टिप्पणियाँ