Hot Posts

6/recent/ticker-posts

चंदौली में सड़क हादसों का बढ़ता कहर

सड़कें अधूरी बैरियर हटे, भारी वाहनों का राज, पुलिस की लापरवाही

चंदौली। जिले में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बलुआ और मारूफपुर बैरियर के अचानक हटाए जाने के बाद भारी वाहनों का आवागमन तेज हो गया है, जिससे सड़कों पर मौत का तांडव मच रहा है। कल ही सकलडीहा में एक हाइवा ट्रेलर ने बाइक सवार महिला को कुचल दिया, मौके पर ही उसकी मौत हो गई। बिना किसी स्पष्ट कारण के बैरियर हटाने और अधर में लटकी सड़क परियोजनाओं ने यातायात पुलिस की लापरवाही को और उजागर कर दिया है। स्थानीय लोग अब सवाल उठा रहे हैं—क्या चंदौली की सड़कें मौत की सौगात बन चुकी हैं?

सकलडीहा मार्ग पर हुई इस ताजा घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। मृतका रवि कुमारी पत्नी विकास कुमार निवासी ग्राम बर्थरा की महिला, जो तेंदुई गांव निवासी धर्मराज चौहान की पुत्री थीं, उसी दिन मायके आई हुई थीं। दोपहर के समय बाजार से लौट रही थीं। अचानक तेज रफ्तार हाइवा ट्रेलर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। चश्मदीदों के मुताबिक, ट्रेलर चालक ने ब्रेक लगाने की कोशिश भी नहीं की और मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन अभी तक आरोपी का सुराग नहीं लगा। यह हादसा बलुआ-मारूफपुर बैरियर हटने के बाद का तीसरा बड़ा मामला है, जहां भारी वाहनों ने छोटे वाहनों को निशाना बनाया।

बैरियर हटने की गुत्थी
बलुआ और मारूफपुर बैरियर को प्रशासन ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के हटा दिया। इन बैरियरों का मुख्य उद्देश्य भारी वाहनों को नियंत्रित करना और स्थानीय सड़कों पर उनकी घुसपैठ रोकना था। बैरियर हटते ही ट्रक, हाइवा और ट्रेलरों का राज शुरू हो गया। सकलडीहा, चहनियां और आसपास के इलाकों में अब रोजाना दर्जनों भारी वाहन बिना चेक के गुजर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बैरियर हटाने से वाहनों की स्पीड 40-50 किमी प्रति घंटा बढ़ गई, जो पहले 20-30 किमी प्रति घंटा सीमित रहती थी।

अधूरी सड़कें: खतरे की घंटी
सड़कें अभी भी पूरी तरह तैयार नहीं हैं। सकलडीहा-चंदौली मुख्य मार्ग पर कई जगह खुदाई का काम अधूरा पड़ा है, जिससे गड्ढे और उबड़-खाबड़ रास्ते बने हुए हैं। भारी वाहनों का दबाव इस सड़क को और खतरनाक बना रहा है। पिछले एक माह में इसी रूट पर 7 से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 4 लोगों की जान गई। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण एजेंसी ने काम तो शुरू किया, लेकिन बैरियर हटाने की जल्दबाजी में सुरक्षा को नजरअंदाज कर दिया।

बलुआ पुलिस पर सवालों की बौछार
सबसे बड़ा सवाल बलुआ पुलिस की भूमिका पर है। बैरियर हटने के बाद न तो वैकल्पिक चेकपॉइंट बनाए गए, न ही स्पीड कंट्रोल के लिए ट्रैफिक पुलिस तैनात की गई। किसान नेता पिंटू पाल ने कहा, "पुलिस सिर्फ कागजों पर नजर रखती है, सड़क पर कोई पहरा नहीं। भारी गाड़ियां बिना रुके उड़ान भर रही हैं।" जिला प्रशासन से मांग उठ रही है कि तत्काल बैरियर बहाल किए जाएं या नए चेकिंग पॉइंट लगाए जाएं। एसपी चंदौली ने बताया कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

यह हादसा चंदौलीवासियों के लिए बेहद दुखद है। अगर समय रहते कदम नहीं उठे, तो सड़कें कब्रिस्तान बन सकती हैं। स्थानीय ग्रामीण प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी में है, जिसमें बैरियर बहाली और यातायात व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई है। इस बाबत पूछे जाने पर सकलडीहा एसडीएम कुंदन राज कपूर ने पत्रकार का कॉल रिसीव नहीं किया।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ