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चंदौली में निर्माणाधीन पुलिस लाइन का काम किसानों ने रोका

चारदीवारी निजी जमीन पर खड़ी की जाने का आरोप, जमीनी जंग का शिकार हुआ महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट

चंदौली जिले के सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र के भोजापुर गांव में गुरुवार को ड्रामा तब खड़ा हो गया जब दर्जनों आक्रोशित किसानों ने निर्माणाधीन पुलिस लाइन का काम धक्कमधक्के से रोक दिया। किसानों का आरोप गंभीर है- पुलिस लाइन की पश्चिमी छोर पर बन रही चारदीवारी उनकी निजी जमीन पर ही खड़ी की जा रही है! लगभग 50 प्रतिशत पूरा हो चुका यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब जमीनी जंग का शिकार हो गया है।


किसानों की एकजुट हुंकार
बर्थरा गांव के किसान प्रद्युम्न, चंदन, श्याम बरन, मुनीब, राजपति, विजय बहादुर और कमलेश जैसे सैकड़ों ग्रामीण भारी संख्या में मौके पर पहुंचे। उन्होंने निर्माण एजेंसी की भारी-भरकम मशीनों को बंद करवा दिया और पाइलिंग का काम ठप कर दिया। किसानों का दर्द छलका- "बिना पैमाइश के हमारी जमीन में खुदाई कर दीवार ठोक रहे हैं। हमारी जमीन का बड़ा हिस्सा गायब हो चुका है!" उन्होंने चिल्लाया। बार-बार राजस्व अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए, लेकिन नापी का नामोनिशान नहीं। नतीजा? पूरा इलाका तनावग्रस्त।

अधिकारियों की घेराबंदी, लेकिन किसान अड़े
सूचना पाकर भारी पुलिस बल और राजस्व टीम, जिसमें नायब तहसीलदार राजेंद्र प्रसाद शामिल थे, दौड़े चले आए। घंटों चली बातचीत में अधिकारियों ने किसानों को लुभाया- "अगर जमीन पुलिस लाइन में आ गई, तो अलग से मुआवजा मिलेगा। धैर्य रखें।" लेकिन किसान फूले नहीं समाए! "पूरी जमीन लौटाओ, गोलमाल जवाब नहीं चलेंगे!" उनकी मांग पर वे डटे रहे। आखिरकार अधिकारी खाली हाथ लौटे, और काम फिर शुरू होते ही किसानों में रोष की लहर दौड़ गई।

जमीनी सच्चाई: क्या है विवाद का केंद्र?
यह विवाद पुलिस लाइन के पश्चिमी छोर पर चारदीवारी के लिए हो रही पाइलिंग को लेकर भड़का। भोजापुर जैसे ग्रामीण इलाकों में किसानों की जमीन सरकारी योजनाओं की भेंट चढ़ना आम है, लेकिन बिना नापी-तौल के निर्माण ने आग में घी डाल दिया। स्थानीय लोग इसे राजस्व विभाग की लापरवाही बता रहे हैं। अब सवाल उठ रहा है- क्या मुआवजे का लालच किसानों को मनाएगा, या यह आंदोलन और भड़केगा?

ग्रामीण चंदौली में किसान-प्रशासन टकराव की यह घटना विकास और अधिकारों के बीच संतुलन की याद दिलाती है। जिला प्रशासन अब क्या कदम उठाएगा, यह देखना बाकी है।

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