मुगलसराय, चंदौली। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वाराणसी ने मुगलसराय स्थित मेसर्स कुमार औद्योगिक विकास प्रा. लि. के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए नोटिस जारी कर दिया है। फैक्ट्री से लगातार निकल रहे काले-जहरीले धुएं के कारण आसपास के सैकड़ों परिवारों की जिंदगी मुश्किल हो गई है। यह कार्रवाई स्थानीय निवासी विकास शर्मा की आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद हुई, जो डिजिटल युग में आम नागरिकों की आवाज को ताकत दे रही है।
शिकायत में विकास शर्मा ने बताया कि फैक्ट्री से रात-दिन काला धुआं निकल रहा है, जो हवा में जहर घोल रहा है। इससे बच्चों को सांस लेने में तकलीफ, बुजुर्गों को अस्थमा और त्वचा रोग हो रहे हैं। क्षेत्र के किसान भी चिंतित हैं, क्योंकि जहरीली धुंध फसलों को नुकसान पहुंचा रही है—खासकर धान और सब्जियों की पैदावार प्रभावित हो रही है। "हमारी सांसें भी अब फैक्ट्री के काले धुएं से सनी हैं," शर्मा ने कहा।
प्रदूषण बोर्ड की टीम ने तत्काल स्थलीय निरीक्षण किया। जांच में खुलासा हुआ कि फैक्ट्री में भाप उत्पादन के लिए दो बॉयलर—8 टन प्रति घंटा और 3 टन प्रति घंटा क्षमता वाले—चल रहे थे। ईंधन के रूप में बायो-ब्रिकेट्स तो इस्तेमाल हो रहे थे, लेकिन फ्लू गैस नियंत्रण के लिए लगे साइक्लोन डस्ट कलेक्टर और चिमनी पूरी तरह खराब पड़े थे। इससे पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5) और अन्य हानिकारक गैसें बिना फिल्टर के हवा में फैल रही थीं, जो पर्यावरण मानकों से कई गुना अधिक थीं।
क्षेत्रीय अधिकारी रोहित सिंह ने बताया, "उद्योग को जल एवं वायु प्रदूषण अधिनियम के तहत सशर्त सहमति दी गई थी, लेकिन निरीक्षण में कोई पालन नहीं मिला। नोटिस में 15 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा गया है, वरना सीज और जुर्माना लगेगा।" रोचक तथ्य यह है कि उत्तर प्रदेश में पिछले एक साल में प्रदूषण बोर्ड ने 200 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों पर ऐसी कार्रवाई की है, जिसमें मुगलसराय जैसी छोटी इकाइयां भी शामिल हैं।
स्थानीय निवासियों ने फैक्ट्री पर तत्काल सील लगाने, नियमित मॉनिटरिंग और हरित ऊर्जा अपनाने की मांग की है। "यह सिर्फ धुआं नहीं, हमारी जिंदगी का संकट है। सरकार को अब स्थायी समाधान चाहिए," बोले एक किसान। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आश्वासन दिया है कि अगला निरीक्षण जल्द होगा। यह घटना स्थानीय उद्योगों के लिए चेतावनी है—विकास के नाम पर पर्यावरण को दांव पर न लगाएं।
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