चंदौली : जिला कलेक्ट्रेट सभागार में कल आयोजित दिशा निर्धारित बैठक में स्थानीय पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को प्रवेश से वंचित रखा गया। बैठक को बंद कमरे में करने के बाद मीडिया को बाहर रखने के कारणों पर सवाल खड़े हो गए हैं। नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य जिले में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों में फैली कथित अनियमितताओं और कमीशनखोरी के खुलासे को छुपाना है। इस घटना ने जिले में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न विकास योजनाओं के तहत चंदौली जिले में भेजी गई करोड़ों रुपये की राशि का बड़ा हिस्सा अनियमितताओं में खर्च हो गया। शिकायतों में आरोप हैं कि कई ठेकेदारों ने रकम हड़प ली, कुछ हिस्से अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए दिए गए और बचा हुआ काम भी अधूरा या घटिया गुणवत्ता का किया गया।
बदहाल सड़के बयाँ कर रही हैं कि आधा से अधिक बजट कमीशनखोरी में चली गई है।
जनपद की सड़कें अब सिर्फ़ निर्माण की कहानी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत बनकर खड़ी हैं। आवंटित धन का आधा से अधिक हिस्सा कमीशन के रूप में कट गया, जिससे वास्तविक विकास कार्य प्रभावित हुए। चंदौली—सैदपुर सड़क एक ओर से बन रही है तो दूसरी ओर से वह भी उखड़ने लगी है। वह अपनी दुर्दशा पर अश्रु बहा रही हैं।, सैयदराजा— जमानिया मार्ग, चहनियां—मुगलसराय सहित कई अन्य लिंक सड़कों की भी हालत वहीं है।
मनरेगा में कथित लूट
मनरेगा के तहत कथित रूप से बिना काम कराए मजदूरों के खातों में भुगतान किए गए। इन भुगतानों में लगभग 10% की कटौती कर कमीशन वसूला जा रहा है। सांसद वीरेंद्र सिंह ने भी इस दुरुपयोग पर सड़क से लेकर आवाज उठाई है, पर सुधार न के बराबर दिखा है।
अन्य विभागों में अनियमितताएँ: बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन, मत्स्य, खनन, वन और अन्य कई विभागों में भी करोड़ों के भ्रष्टाचार के साक्ष्य हैं, जिनकी खुलकर जांच नहीं की जा रही।
मीडिया प्रतिबंध: तर्क या दबाव?
पत्रकारों को विशेष रूप से बैठक से वंचित कर दिया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कुछ पक्ष यह चाहते हैं कि अनियमितताओं के दस्तावेज और बहस सार्वजनिक न हों। स्थानीय कार्यकर्ताओं और पत्रकारों का कहना है कि मीडिया निषेध का कोई वैध औचित्य—सुरक्षा, गोपनीयता या आधिकारिक निर्देश—नहीं बताया गया। बिना ऐसा कारण बताए मीडिया को बाहर रखने का कदम पारदर्शिता के सिद्धांत के विरुद्ध माना जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया और मांगें
स्थानीय नागरिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ जनप्रतिनिधियों ने मीडिया को बैठक से बाहर रखने की निंदा की है और निम्नलिखित मांगें की हैं: किसी भी सार्वजनिक या निर्णयात्मक बैठक में मीडिया तथा नागरिक निगरानी की अनुमति अनिवार्य की जाए। संदिग्ध परियोजनाओं का त्वरित और स्वतंत्र फील्ड ऑडिट कराया जाए।
मनरेगा समेत सभी विकास योजनाओं के वित्तीय प्रवाह की स्वतंत्र जाँच हो।
यदि गड़बड़ी पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। सभी परियोजनाओं के भुगतान व खर्च के दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएं।
प्रशासन से जनता के प्रश्न
जनता जानना चाहती है:
मीडिया को बैठक से बाहर रखने का औचित्य क्या था? क्या कोई आधिकारिक निर्देश या सुरक्षा कारण बताए गए थे?
चंदौली जिले में विभिन्न विभागों के तहत आवंटित बजट का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाएगा क्या?
मनरेगा भुगतान और अन्य देयकों के सत्यापन के क्या रिकॉर्ड मौजूद हैं और वे कब सार्वजनिक किए जाएंगे?
क्या किसी स्तर पर आंतरिक ऑडिट या शिकायत निवारण प्रक्रिया आरम्भ की गई है? यदि हां, उसके निष्कर्ष कब प्रकाशित होंगे?
सरकारी बयान का आग्रह
इस रिपोर्ट के सिलसिले में जिला प्रशासन, विकास विभाग, मनरेगा समन्वयक एवं संबंधित विभागों से आधिकारिक टिप्पणी मांगी जा रही है। प्रशासन यदि अपना स्पष्टीकरण देता है तो उसे पाठकों के साथ साझा किया जाएगा।
नागरिक सहभागिता का आह्वान
स्थानीय नागरिकों से अनुरोध है कि यदि उनके पास किसी परियोजना, भुगतान या अधिकारियों/ठेकेदारों से जुड़ा कोई दस्तावेज, फोटो या अन्य सबूत है, तो वे संबंधित ज़िला कार्यालय या स्थानीय मीडिया हाउस को जमा कराएं। पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करने के लिए स्थानीय सहभागिता आवश्यक है।
जिम्मेदार विभागों की सूची के भ्रष्टाचार पर भी आए दिन खबरें प्रकाशित हुई पर किसी की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जैसे
विकास विभाग
राजस्व विभाग
पुलिस विभाग
स्वास्थ्य विभाग
शिक्षा विभाग
बिजली विभाग
लोक निर्माण विभाग
कृषि विभाग
पशुपालन विभाग
मत्स्य विभाग
खनन विभाग
वन विभाग
सिंचाई विभाग
जल निगम / जल संसाधन विभाग
पंचायती राज विभाग
नगर विकास विभाग
उद्योग विभाग
बेसिक शिक्षा विभाग
माध्यमिक शिक्षा विभाग
नलकूप / नहर विभाग
जिला पंचायत विभाग
ग्रामीण विकास / डीआरडीए से जुड़े विभाग
आपदा प्रबंधन विभाग
उद्यान विभाग
कल्याण विभाग
समाज कल्याण विभाग
महिला एवं बाल विकास / बाल विकास विभाग
श्रम विभाग
खाद्य एवं रसद विभाग
आपूर्ति विभाग
परिवहन विभाग
प्रोबेशन / महिला कल्याण विभाग
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग
सहकारिता विभाग।
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