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जब तारों में बंद पत्थर के बड़े-बड़े बोल्डर बाढ़ में बह गए, गंगा कटान नहीं रुका तो बालू से भरी बोरियों की क्या विसात— दीनानाथ श्रीवास्तव

मांगो पर ठोस इंतजाम न के बराबर, धरना 27वें दिन भी जारी

चंदौली। जब तारों में बंद पत्थर के बड़े-बड़े बोल्डर बाढ़ में बह गए, गंगा कटान नहीं रुका तो बालू से भरी बोरियों की क्या विसात है। उनकी मांगो पर ठोस इंतजाम न के बराबर, दर्जनों गांवों के हजारों किसानों के साथ ना इंसाफी। नदहा-गुरैनी पंप कैनाल पर किसानों का धरना 27वें दिन भी जारी, सरकार के करोड़ों रुपए बर्बाद, जिला प्रशासन- जनप्रतिनिधि- ठेकेदार जवाब दें। साथ ही कटान रोकने के लिए पुख्ता और तात्कालिक कदम नहीं उठाए गए तो उनकी किसी भी आश्वासन को वे स्वीकार नहीं करेंगे। जिला प्रशासन सहित जनप्रतिनिधि और ठेकेदार का पूतला दहन किया जायेगा।इसके अलावा, अगर प्रशासन ने न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की तो वे अपने के लिए अंतिम विकल्प के रूप में चिता लगाकर आत्मदाह तक करने को तैयार हैं। उक्त बातें किसान नेता दीनानाथ श्रीवास्तव ने गुरुवार को सटीक संवाद से प्रेस वार्ता में कहा। 

उन्होंने बताया कि धरना के दौरान सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्ल्यू, विधायक सुशील सिंह, अधिशाषी अभियंता सुरेश चंद्र आजाद, मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साईं समेत कई अन्य विभागीय अधिकारी मौके पर आकर निरीक्षण कर चुके हैं और वैकल्पिक इंतजाम कर कटान रोकने का भरोसा दे रहे हैं। मगर धरने पर बैठे किसान कटान पूरी तरह रुकने तक वहीं डटे रहने का दावा कर रहे हैं।

गुरैनी स्थित पम्प कैनाल गंगा कटान की तीव्र असर के कारण अब संकट में आ गया है। धरने पर बैठे किसान नेता दीनानाथ व प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया है कि कैनाल की सुरक्षा तथा पम्प के पूरब-पश्चिम दोनों ओर प्रत्येक दिशा में 500-500 मीटर कटान रोकने के लिए पत्थर नसीब करने हेतु दो चरणों में कुल लगभग 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, पर आधा-अधूरा काम ही कराया गया। ठेकेदार की लापरवाही तथा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण लगाए गए पत्थर के अधिकांश बोल्डर बाढ़ में गंगा के तेज बहाव में समाहित हो गए। इससे कटान और तेज हो गया और सैकड़ों बीघा कृषि योग्य जमीन फिर से गंगा में समा गई। प्रभावित किसानों ने तुरंत ठोस कार्रवाई और बचाव कार्य फिर से शुरू करने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं और जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के स्थलीय निरीक्षण की प्रतीक्षा में है।

दरअसल, चंदौली जिले के धानापुर विकासखंड स्थित गुरैनी पंप कैनाल पर किसानों का धरना मुख्य रूप से गंगा नदी से हो रहे कटान को रोकने और कैनाल को बचाने की मांग को लेकर है। किसान मांग कर रहे हैं कि गुरैनी पंप कैनाल और आसपास के इलाकों को गंगा नदी के कटाव से बचाने के लिए स्थाई और प्रभावी कदम उठाए जाएं, क्योंकि इससे कैनाल के ध्वस्त होने का खतरा बना हुआ है। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा कैनाल और कटान रोकने के नाम पर लगभग दस करोड़ रूपए खर्च किए गए, लेकिन मानकों के अनुसार काम नहीं हुआ। किसानों का आरोप है कि काम में भारी धांधली और भ्रष्टाचार हुआ है। कई बार बोल्डर और सुरक्षात्मक उपाय किए गए, लेकिन वे मानक के अनुरूप न होने के कारण सफल नहीं हुए। प्रदर्शनकारी किसानों का यह भी आरोप है कि इतने गंभीर मुद्दे और लंबे समय से चल रहे धरने के बावजूद कोई सक्षम अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे उनकी समस्याओं को अनसुना किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि अगर इस पंप कैनाल को नहीं बचाया गया तो क्षेत्र में सिंचाई का एक बड़ा संकट पैदा हो जाएगा। वे स्थाई समाधान होने तक अनिश्चितकालीन धरने पर अड़े हुए है।
 

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