दरअसल प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडे के आदेश पर हुई इस कार्रवाई में कई युवाओं के घायल होने की खबर है और कुछ को अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुलिस की देरी और अनुचित रवैये के कारण ही उन्हें प्रदर्शन करना पड़ा। उन्होंने SSP की कार्रवाई की निंदा की और तात्कालिक, निष्पक्ष जांच की मांग की।
SSP अविनाश पांडे ने घटनास्थल पर कहा कि "यह जातिगत भेदभाव नहीं चलेगा" और कथित रूप से यह टिप्पणी की कि यदि धरना कोई और देता तो हालात अलग होते — बयान के इस अंश ने और विवाद खड़ा कर दिया। इस पर कई राजनेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, समाजवादी नेता अखिलेश यादव और नेता चंद्रशेखर ने SSP की कार्रवाई और कथित बर्बरता की घोर निंदा की है और स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है।
स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि घटना की जांच की जा रही है और जिसने भी कानून-व्यवस्था की सीमा लांघी है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं नागरिक समूह और प्रदर्शनकारी न्याय व दोषियों के सख्त खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। घटनास्थल से मिली तस्वीरों और वीडियो की आधार पर आगे की पुष्ट सूचना मिलने तक स्थानीय तनाव बना हुआ है।
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