चंदौली। लोन दिलाने के नाम पर लोगों से कथित साइबर ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े 25 हजार रुपये के इनामी वांछित आरोपी को चंदौली पुलिस की साइबर सेल और सर्विलांस टीम ने लखनऊ से गिरफ्तार किया है। आरोपी आशीष गैलवार को 15 सितंबर की रात 9:11 बजे कमिश्नरेट लखनऊ के चिनहट थाना क्षेत्र से मोबाइल लोकेशन के आधार पर पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर साइबर फ्रॉड के लिए बैंक खाता उपलब्ध कराने और अन्य आरोपियों के संपर्क में रहने का आरोप है। मामले की जांच में अलग-अलग राज्यों से 16 साइबर शिकायतें सामने आने तथा करीब 1.42 करोड़ रुपये की साइबर फ्रॉड से संबंधित रकम होल्ड होने की जानकारी पुलिस ने दी है।


थाना साइबर क्राइम चंदौली को प्राप्त साइबर शिकायतों की जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के जरिए लोगों को लोन का झांसा देकर रकम ऐंठने की जानकारी मिली थी। पुलिस के मुताबिक, "सत्कार निधि लिमिटेड" समेत अन्य फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को कम ब्याज दर पर ऋण दिलाने का भरोसा दिया जाता था।

जांच के अनुसार, कथित तौर पर सोशल मीडिया, मोबाइल कॉल और दूसरे माध्यमों से लोगों से संपर्क किया जाता था। लोन स्वीकृत कराने का आश्वासन देने के बाद प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी मनी, बीमा शुल्क और अन्य चार्ज के नाम पर रकम जमा कराई जाती थी। पुलिस का आरोप है कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से प्राप्त रकम संबंधित बैंक खातों में मंगाई जाती थी।

साइबर शिकायतों के विश्लेषण के बाद पुलिस ने समन्वय पोर्टल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर उपलब्ध अभिलेखों का सत्यापन किया। पुलिस के अनुसार, जांच में अलग-अलग राज्यों से संबंधित कुल 16 साइबर शिकायतें सामने आईं। इसके अलावा गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में भी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का एक मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिली।

पुलिस के मुताबिक, वित्तीय लेन-देन और बैंक खातों की जांच के दौरान लगभग 1 करोड़ 42 लाख रुपये की साइबर फ्रॉड से संबंधित धनराशि होल्ड मिली। पुलिस अब इस रकम से जुड़े बैंक खातों, लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। इस जांच के आधार पर साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क की अन्य कड़ियों को भी खंगाला जा रहा है।

जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि चंदौली जनपद में संचालित एक कार्यालय से कथित तौर पर इस पूरे नेटवर्क की गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। पुलिस के अनुसार, विभिन्न राज्यों में साइबर शिकायतें सामने आने के बाद गिरोह से जुड़े लोगों द्वारा कार्यालय बंद कर कंप्यूटर, रजिस्टर और अन्य दस्तावेज हटाकर फरार होने की तैयारी की जा रही थी।

प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना साइबर क्राइम चंदौली में मुकदमा अपराध संख्या 14/2026 दर्ज किया गया। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338, 339, 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत कार्रवाई की गई।

इसी मामले में पुलिस ने इससे पहले 12 जून 2026 को कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में विरेन्द्र कुमार पुत्र महेन्द्र कुमार निवासी बर्थरा खुर्द थाना चंदौली, आशीष पटवा पुत्र सत्यदेव पटवा निवासी बबुरी बाजार थाना बबुरी तथा सोनी पत्नी शिवपूजन निवासी शाहपुर थाना चकिया शामिल थीं।

पुलिस के अनुसार, उस कार्रवाई के दौरान कथित साइबर ठगी से जुड़े कार्यालय से बड़ी मात्रा में बैंकिंग उपकरण और दस्तावेज बरामद किए गए थे। बरामद सामान में तीन सीपीयू, तीन मॉनीटर, तीन की-बोर्ड, दो माउस, दो प्रिंटर, एक कैलकुलेटर, करीब 350 पासबुक, तीन कूटरचित पहचान पत्र, 21 रजिस्टर, छह ब्लैंक चेक, तीन स्मार्टफोन और 11 अलग-अलग मोहरें शामिल थीं। इसके अलावा स्टैम्प पैड, विभिन्न सिम कार्ड तथा बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख भी बरामद किए गए थे।

मामले में वांछित चल रहे आशीष गैलवार पुत्र स्वर्गीय सुखलाल, निवासी फर्रुखाबाद पर पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। साइबर सेल और सर्विलांस टीम ने तकनीकी निगरानी के दौरान उसकी मोबाइल लोकेशन चिनहट क्षेत्र में ट्रेस की। इसके बाद 15 सितंबर 2026 को रात 9:11 बजे टीम ने कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी ने साइबर फ्रॉड में बैंक खाता उपलब्ध कराने और अन्य आरोपियों के संपर्क में रहने की बात स्वीकार की है। उसके कब्जे से लावा प्राइम कंपनी का एक की-पैड मोबाइल फोन बरामद किया गया है। पुलिस मोबाइल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।

पुलिस का कहना है कि मामले में वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच अभी जारी है। इसलिए सामने आए आरोपों के आधार पर आगे की कार्रवाई जांच में प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार की जाएगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।

इस कार्रवाई में साइबर सेल प्रभारी मिर्जा रिजवान बेग, हेड कांस्टेबल संतोष कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल पवन कुमार यादव और कांस्टेबल मनोज चौहान शामिल रहे। सर्विलांस टीम की ओर से कांस्टेबल गणेश तिवारी ने सहयोग किया।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी अनजान व्यक्ति या संस्था के झांसे में आकर लोन अथवा निवेश के नाम पर रकम जमा न करें। विशेष रूप से कम ब्याज दर पर तत्काल लोन दिलाने के नाम पर मांगी जाने वाली प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी मनी, बीमा शुल्क या अन्य किसी शुल्क के भुगतान से पहले संबंधित संस्था और उसके बैंक खाते की विश्वसनीयता की जांच जरूर करें।

पुलिस ने कहा है कि साइबर ठगी होने की स्थिति में पीड़ित को तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। समय पर शिकायत मिलने पर संबंधित लेन-देन और बैंक खातों पर आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।


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