शासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वस्थ रखने और गांवों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ओपेन जिम स्थापित किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर व्यायाम के उपकरण उपलब्ध कराकर ग्रामीणों, युवाओं और बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। गांवों में ओपेन जिम होने से स्थानीय लोगों को बिना किसी शुल्क के नियमित व्यायाम की सुविधा मिल सकती है। यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना को उपयोगी माना जा रहा है।
सकलडीहा विकास खंड में कुल 104 ग्राम सभाएं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इनमें से कई गांवों में अभी तक ओपेन जिम की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। कहीं योजना प्रस्ताव के स्तर पर है तो कहीं ग्रामीणों को अभी इसके लिए इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में ब्लॉक परिसर में नया ओपेन जिम लगाए जाने से लोगों के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि योजना के तहत काम कराने में प्राथमिकता किस आधार पर तय की जा रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक गांवों में ओपेन जिम लगाए जाने से इसका सीधा लाभ बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को मिल सकता है। गांवों में युवाओं के साथ महिलाएं और बुजुर्ग भी सुबह-शाम व्यायाम कर सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और खेल संसाधनों की कमी को देखते हुए ओपेन जिम उपयोगी साबित हो सकते हैं। इसके बावजूद यदि कई गांव इससे वंचित हैं तो पहले वहां सुविधा उपलब्ध कराने की मांग स्वाभाविक है।
ब्लॉक परिसर में ओपेन जिम लगाए जाने को लेकर ग्रामीणों का मुख्य सवाल इसकी उपयोगिता से जुड़ा है। उनका कहना है कि ब्लॉक परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों का आवागमन होता है, लेकिन गांवों की तुलना में यहां नियमित रूप से कितने लोग ओपेन जिम का इस्तेमाल करेंगे, यह स्पष्ट नहीं है। इसके विपरीत ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीण रहते हैं और सार्वजनिक स्तर पर ऐसी सुविधा की जरूरत अधिक महसूस की जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में धन खर्च करते समय सबसे पहले उस स्थान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जहां उसका अधिकतम सार्वजनिक लाभ हो। यदि किसी गांव में ओपेन जिम नहीं है तो वहां इसे स्थापित करने से योजना का उद्देश्य सीधे तौर पर पूरा होगा। वहीं, जिन स्थानों पर पहले से सुविधा उपलब्ध नहीं है, उन्हें छोड़कर किसी अन्य स्थान पर खर्च किए जाने से योजना की प्राथमिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसी मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और पंचायत विभाग से मामले पर ध्यान देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए धन उपलब्ध कराया जाता है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक ग्रामीण आबादी तक पहुंचे। उन्होंने मांग की है कि जिन ग्राम सभाओं में अभी तक ओपेन जिम नहीं लगाए गए हैं, वहां प्रस्ताव लेकर जल्द काम कराया जाए।
कस्बा निवासी समाजसेवी मुकेश जायसवाल, हरि जायसवाल, मंगरू चौरसिया सहित अन्य ग्रामीणों ने गांवों में ओपेन जिम लगाए जाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि युवाओं को स्वस्थ रखने और उन्हें खेलकूद एवं व्यायाम से जोड़ने के लिए गांवों में इस तरह की सुविधाएं बेहद जरूरी हैं। यदि गांव में ही व्यायाम के उपकरण उपलब्ध होंगे तो लोगों को इसके लिए कस्बे या अन्य स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि ब्लॉक परिसर में ओपेन जिम लगाए जाने से किसी सुविधा के निर्माण पर आपत्ति नहीं है, लेकिन सवाल प्राथमिकता का है। जब दर्जनों गांवों में अभी तक ऐसी सुविधा नहीं पहुंची है तो पहले उन गांवों को लाभ मिलना चाहिए। ग्रामीणों के अनुसार सरकारी धन का इस्तेमाल ऐसी योजनाओं पर होना चाहिए, जिससे अधिक से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिले।
मामले में विभाग की ओर से बताया गया है कि विकास खंड के कई गांवों में ओपेन जिम पहले ही लगाए जा चुके हैं। बीडीओ विजय कुमार सिंह ने बताया कि जो गांव अभी इससे छूट गए हैं, वहां प्रस्ताव मिलने के बाद ओपेन जिम लगाए जाएंगे। विभाग के इस पक्ष के बाद ग्रामीणों की मांग है कि शेष ग्राम सभाओं में भी जल्द प्रस्ताव लेकर योजना को धरातल पर उतारा जाए।
अब सवाल यह है कि विकास खंड में ओपेन जिम की सुविधा से वंचित गांवों को इसका लाभ कब तक मिलेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजना का उद्देश्य गांवों को स्वस्थ और सुविधा संपन्न बनाना है तो उसका लाभ प्रत्येक पात्र ग्राम सभा तक पहुंचना चाहिए। ब्लॉक परिसर में ओपेन जिम लगाए जाने के बाद उठे सवालों का समाधान भी तभी होगा, जब शेष गांवों में भी योजना के तहत काम तेजी से आगे बढ़ेगा और सरकारी धन के इस्तेमाल की प्राथमिकता को लेकर ग्रामीणों को स्पष्ट जवाब मिलेगा।
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