चंदौली में पुराने आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित कराने के लिए चलाए जा रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत 15 सितंबर 2026 को पांच मामलों में सात अभियुक्तों को अदालत से सजा सुनाई गई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, चंदौली की अदालत ने थाना सैयदराजा और मुगलसराय में वर्षों पहले दर्ज मुकदमों में सुनवाई पूरी होने के बाद अभियुक्तों को दोषसिद्ध किया। अदालत ने अलग-अलग मामलों में दोषियों को जेल में बिताई गई अवधि के कारावास के साथ 1,000 से 2,000 रुपये तक के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर संबंधित दोषियों को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। पुलिस के अनुसार, प्रभावी पैरवी, वैज्ञानिक विवेचना और साक्ष्यों के संकलन के आधार पर इन मामलों में दोषसिद्धि हासिल हुई है।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत पुराने मामलों की प्रभावी पैरवी और न्यायालय में साक्ष्यों को मजबूती से प्रस्तुत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में 15 सितंबर को थाना सैयदराजा और मुगलसराय से संबंधित पांच पुराने मुकदमों में न्यायालय का फैसला आया। इनमें कुछ मामले वर्ष 2005 और 2006 के हैं, जबकि एक मामला वर्ष 2012 में दर्ज किया गया था। लंबे समय से चल रहे इन मामलों में न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस ने दोषसिद्ध अभियुक्तों को मिली सजा का विवरण जारी किया।

थाना सैयदराजा में वर्ष 2012 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 322/2012 में कैमूर, बिहार के दुर्गावती थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर निवासी विनोद यादव पुत्र लक्ष्मण यादव को दोषसिद्ध किया गया। पुलिस के अनुसार, यह मामला गोवध निवारण अधिनियम की धारा 3/5ए/8 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 से संबंधित था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए जेल में बिताई गई अवधि के कारावास तथा 2,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर अभियुक्त को दो दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

थाना सैयदराजा में ही वर्ष 2005 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 83/2005 में इटावा जनपद के शाहपुर कमर निवासी आजाद पुत्र मुहम्मद सफी को दोषसिद्ध किया गया। इस मामले में गोवध निवारण अधिनियम की धारा 3/5ए/8 के तहत कार्रवाई की गई थी। न्यायालय ने अभियुक्त को जेल में बिताई गई अवधि के कारावास तथा 1,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदालत के आदेश के अनुसार अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

सैयदराजा थाने के ही एक अन्य पुराने मुकदमे में दो अभियुक्तों को अदालत ने दोषसिद्ध किया। मुकदमा अपराध संख्या 162/2006 में कौशाम्बी जनपद के कोखराज थाना क्षेत्र के सवई निवासी मंसूर आलम पुत्र रज्जाक अली तथा सैनी थाना क्षेत्र के बरास निवासी अब्दुल वहीद पुत्र अब्दुल वालिद को अभियुक्त बनाया गया था। पुलिस के अनुसार, अब्दुल वहीद पशु व्यापारी है। इस मुकदमे में गोवध निवारण अधिनियम की धारा 3/5ए/8 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत कार्रवाई की गई थी।

15 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषसिद्ध करते हुए जेल में बिताई गई अवधि के कारावास तथा 1,000-1,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोनों को एक-एक दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

इसी क्रम में थाना मुगलसराय में वर्ष 2006 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 389/2006 में भी अदालत ने फैसला सुनाया। इस मामले में मिर्जापुर जनपद के जमालपुर थाना क्षेत्र के धारा निवासी जितेन्द्र कुमार उर्फ पप्पू यादव पुत्र दयाराम यादव को दोषसिद्ध किया गया। पुलिस के अनुसार, मुकदमा भारतीय दंड विधान की धारा 394, 506 और 411 के तहत दर्ज था। न्यायालय ने अभियुक्त को जेल में बिताई गई अवधि के कारावास तथा 2,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड नहीं जमा करने पर दो दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

थाना मुगलसराय में दर्ज एक अन्य पुराने मुकदमे में भी दो अभियुक्तों को दोषसिद्ध किया गया। मुकदमा अपराध संख्या 401/2006 में गुलामेपुर, थाना सैनी क्षेत्र निवासी मो. इस्माइल पुत्र मंजूर तथा जमुना पुत्र नन्हकू को अभियुक्त बनाया गया था। मामले में भारतीय दंड विधान की धारा 41, 411, 414 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत कार्रवाई की गई थी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषसिद्ध करते हुए जेल में बिताई गई अवधि के कारावास तथा 1,000-1,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर दोनों को एक-एक दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

इस तरह थाना सैयदराजा से जुड़े तीन पुराने मामलों में कुल चार अभियुक्त और थाना मुगलसराय से जुड़े दो मामलों में कुल तीन अभियुक्तों को अदालत से सजा मिली। पुलिस की ओर से जारी विवरण के अनुसार पांच मामलों में कुल सात दोषियों के खिलाफ न्यायालय ने फैसला सुनाया है। इन मामलों में न्यायालय ने जेल में बिताई गई अवधि को कारावास की सजा के रूप में माना और संबंधित मामलों के अनुसार अर्थदंड भी लगाया।

पुलिस के अनुसार, “ऑपरेशन कन्विक्शन” का उद्देश्य आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी के माध्यम से दोषसिद्धि सुनिश्चित कराना है। इसके तहत पुराने मुकदमों को चिह्नित कर उनकी प्रगति की निगरानी की जाती है। विवेचना में उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को न्यायालय के समक्ष प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के लिए संबंधित पुलिसकर्मियों और अभियोजन पक्ष के बीच समन्वय पर जोर दिया जाता है।

इन मामलों में अभियोजन अधिकारी (एपीओ) विजय कुमार पाण्डेय की प्रभावी पैरवी को पुलिस ने सराहनीय बताया है। थाना सैयदराजा से जुड़े मामलों में पैरोकार कांस्टेबल राजीव प्रजापति ने भी पैरवी की। वहीं थाना मुगलसराय से संबंधित मामलों में पैरोकार हेड कांस्टेबल अश्वनी राय की भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि मॉनिटरिंग सेल, अभियोजन अधिकारी और संबंधित थानों की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप न्यायालय से दोषसिद्धि हासिल हुई।

पुलिस की ओर से यह भी बताया गया कि किसी आपराधिक मामले में केवल गिरफ्तारी और विवेचना ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि न्यायालय में साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और अभियोजन की लगातार निगरानी भी महत्वपूर्ण होती है। “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत इसी प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। पुराने मामलों में लंबित न्यायिक प्रक्रिया की निगरानी कर संबंधित अधिकारियों और पैरोकारों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाता है।

15 सितंबर को आए इन पांच फैसलों में अदालत ने सभी दोषियों के लिए अलग-अलग अर्थदंड निर्धारित किया। विनोद यादव और जितेन्द्र कुमार उर्फ पप्पू यादव पर 2,000-2,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया, जबकि आजाद, मंसूर आलम, अब्दुल वहीद, मो. इस्माइल और जमुना पर 1,000-1,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। जिन मामलों में अर्थदंड नहीं जमा करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का आदेश है, उसमें संबंधित दोषियों को अदालत के आदेश के अनुसार अतिरिक्त अवधि जेल में बितानी होगी।

पुराने मामलों में आए इन फैसलों को पुलिस अपने अभियान की कार्रवाई के रूप में देख रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय में लंबित मामलों में प्रभावी पैरवी जारी रखी जाएगी, ताकि साक्ष्यों के आधार पर मामलों का निस्तारण हो सके और दोषी पाए जाने वाले अभियुक्तों को न्यायालय से सजा दिलाई जा सके। “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत ऐसे मामलों की लगातार मॉनिटरिंग किए जाने की बात भी पुलिस ने कही है।

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