व्यापार मंडल अध्यक्ष कृष्णा सेठ की ओर से पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र में बाजार की कानून-व्यवस्था और थाना स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली से संबंधित कई बिंदुओं को उठाया गया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि सकलडीहा बाजार में कथित रूप से अवैध शराब और गांजा की बिक्री हो रही है। व्यापार मंडल का दावा है कि यह गतिविधियां सुबह से देर रात तक चलने की शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन इन पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।
व्यापार मंडल अध्यक्ष ने शिकायती पत्र में थाना प्रभारी की कथित मिलीभगत से अवैध गतिविधियां संचालित होने और अवैध धन उगाही के भी आरोप लगाए गए हैं। जिसका वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। व्यापार मंडल ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर तथ्यों को सामने लाने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि किसी भी बाजार में अवैध गतिविधियों की शिकायत गंभीर विषय है। यदि ऐसी गतिविधियां वास्तव में संचालित हो रही हैं तो इससे न केवल व्यापारियों बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। व्यापार मंडल ने पुलिस प्रशासन से बाजार में अवैध गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने तथा व्यापारियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की है।
शिकायती पत्र में व्यापारी और बेकरी दुकानदार राज चौरसिया की दुकान पर 2 सितंबर 2026 को हुई कथित घटना का भी उल्लेख किया गया है। व्यापार मंडल के अनुसार सिरोहुपुर निवासी अमित कुमार उर्फ मोनू दुकान पर आया था। केक के लेनदेन को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई। इसके बाद गाली-गलौज, मारपीट और दुकान में तोड़फोड़ किए जाने का आरोप लगाया गया है।
व्यापार मंडल के अनुसार घटना के बाद व्यापारी पक्ष की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई थी। संगठन के पदाधिकारी भी मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे थे। व्यापार मंडल का आरोप है कि घटना के करीब एक सप्ताह बाद दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस को शिकायत दी गई। इसके बाद 10 सितंबर 2026 को दूसरे पक्ष की शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
व्यापार मंडल ने इस कार्रवाई को गलत और एकतरफा बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि घटना के दोनों पक्षों की शिकायतों, मौके की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों की जांच की जानी चाहिए। इससे घटना की वास्तविक परिस्थितियों और संबंधित पक्षों की भूमिका का निष्पक्ष रूप से पता लगाया जा सकेगा।
शिकायती पत्र में दिलीप चौरसिया और तेजन चौरसिया से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है। व्यापार मंडल ने इन मामलों में हुई पुलिस कार्रवाई की भी जांच कराने का अनुरोध किया है। संगठन का कहना है कि व्यापारियों की शिकायतों पर पुलिस की कार्रवाई पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष को यह महसूस न हो कि उसके साथ भेदभाव किया गया है।
व्यापार मंडल ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि थाना स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्षता से जांच कराई जाए। संगठन के अनुसार यदि किसी मामले में तथ्यों की पूरी जांच किए बिना कार्रवाई हुई है तो उसकी भी समीक्षा होनी चाहिए। वहीं, यदि किसी शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
थाना प्रभारी को हटाने की मांग के पीछे व्यापार मंडल ने जांच की निष्पक्षता का तर्क दिया है। संगठन का कहना है कि थाना स्तर की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापारियों में असंतोष है। ऐसे में यदि लगाए गए आरोपों की जांच उसी थाना स्तर से होती है तो व्यापारियों को निष्पक्षता को लेकर आशंका हो सकती है। इसलिए व्यापार मंडल ने पुलिस अधीक्षक से थाना प्रभारी को सकलडीहा से हटाने की मांग की है।
व्यापार मंडल का कहना है कि बाजार में व्यापारिक गतिविधियों के लिए कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का भरोसा जरूरी है। दुकानदारों का कहना है कि किसी विवाद की स्थिति में दोनों पक्षों की शिकायतों को समान रूप से सुनकर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन ने पुलिस प्रशासन से व्यापारियों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए शिकायती पत्र में लगाए गए आरोपों पर पुलिस प्रशासन की ओर से किसी निष्कर्ष या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी नहीं हुई है। ऐसे में मामले में पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि व्यापार मंडल की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है और संबंधित मामलों में वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।
अब व्यापारियों की नजर पुलिस अधीक्षक की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर है। व्यापार मंडल ने जांच, आवश्यक कार्रवाई और थाना प्रभारी को हटाने की मांग रखी है। पुलिस प्रशासन की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
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