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अगहरबीर बहुरिया ड्रेन में छलका बंद कर पकड़ी जा रही मछली: पारसनाथ विश्वकर्मा

रॉयल ताल से कटसिल-पसाई तक सैकड़ों पेड़ गिरे, जगह-जगह जलकुंभी से पटी ड्रेन; जलनिकासी प्रभावित, दर्जनों गांवों के खेत जलमग्न

संजय कुमार दिनकर | शनिवार, 5 सितंबर 2026

बरहनी, चंदौली। भारी बारिश के बीच बरहनी विकासखंड क्षेत्र में जलनिकासी व्यवस्था की बदहाली किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। पसाई के पास अगहरबीर बहुरिया ड्रेन में छलका बंद कर पानी रोककर मछली पकड़े जाने का आरोप सामने आया है। वहीं रॉयल ताल से कटसिल होते हुए पसाई तक ड्रेन में कई स्थानों पर पेड़ गिरे पड़े हैं और जलकुंभी का जमाव है। इससे पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित होने के कारण दर्जनों गांवों के खेतों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों के मुताबिक अगहरबीर बहुरिया ड्रेन क्षेत्र की प्रमुख जलनिकासी धारा है। बरसात के दिनों में आसपास के गांवों और खेतों का पानी इसी रास्ते से आगे निकलता है। लेकिन ड्रेन में गिरे पेड़, जलकुंभी और जगह-जगह बनाए गए अवरोधों के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही है। लगातार बारिश के चलते समस्या और गंभीर हो गई है।

छलका बंद कर पानी रोकने का आरोप

पसाई के पास मछली पकड़ने के लिए छलका बंद कर पानी रोके जाने की बात ग्रामीणों ने कही है। आरोप है कि पानी का बहाव रोककर मछली पकड़ी जा रही है। इससे ड्रेन में आगे पानी जाने की रफ्तार प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि भारी बारिश के दौरान जलप्रवाह रोकना आसपास के खेतों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर जांच कराकर यह स्पष्ट कराया जाए कि ड्रेन में पानी रोकने के लिए किसी तरह का अवरोध बनाया गया है या नहीं। यदि जलप्रवाह रोकने की पुष्टि होती है तो उसे तत्काल हटाया जाए।

रॉयल ताल से पसाई तक बदहाल ड्रेन

रॉयल ताल से कटसिल होते हुए पसाई तक ड्रेन की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर बड़े पेड़ गिरकर ड्रेन में पड़े हैं। लंबे समय से इन पेड़ों की निकासी नहीं होने के कारण पानी का रास्ता संकरा हो गया है।

इसके अलावा कई स्थानों पर जलकुंभी की मोटी परत जमा है। इससे ड्रेन की जलधारण और निकासी क्षमता प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पेड़ों और जलकुंभी को नहीं हटाया गया तो बारिश का पानी खेतों से निकलने में और अधिक समय लगेगा।

दर्जनों गांवों के खेत जलमग्न

जलनिकासी प्रभावित होने का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। क्षेत्र के दर्जनों गांवों के खेतों में पानी भर गया है। कई स्थानों पर धान की खड़ी फसल पूरी तरह पानी में डूबी हुई है। लगातार जलभराव के कारण फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है।

किसानों का कहना है कि धान की खेती में उन्होंने बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च किया है। फसल तैयार होने के समय खेतों में पानी भर जाने से उनकी पूरी मेहनत पर संकट खड़ा हो गया है। यदि जल्द पानी नहीं निकला तो धान सड़ने की स्थिति में पहुंच सकता है।

मौके पर पहुंचकर स्थिति देखने की मांग

ग्रामीणों में जलनिकासी की समस्या को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि भारी बारिश के दौरान अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर ड्रेन की स्थिति देखनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि एसी कमरों में बैठकर स्थिति का जायजा लेने से खेतों में जमा पानी नहीं निकल सकता।

ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन की ओर से जलनिकासी और जलभराव की समस्या को लेकर निर्देश दिए जाने के बावजूद मौके पर उसका प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। उनका आरोप है कि डीएम के निर्देशों के बाद भी संबंधित विभागों की ओर से ड्रेन की सफाई और अवरोध हटाने को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है।

किसान नेता ने उठाई आवाज

भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के चंदौली जिलाध्यक्ष पारसनाथ विश्वकर्मा ने जलनिकासी की समस्या को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने कहा कि बारिश के बीच ड्रेन का बहाव बाधित होने से किसानों की फसलें डूब रही हैं। ऐसे में प्रशासन को तत्काल टीम भेजकर मौके की स्थिति की जांच करानी चाहिए।

उन्होंने रॉयल ताल से कटसिल होते हुए पसाई तक ड्रेन में गिरे पेड़ों को तत्काल हटवाने की मांग की। साथ ही जलकुंभी और अन्य अवरोधों की सफाई कराकर ड्रेन का प्राकृतिक जलप्रवाह बहाल करने को कहा।

जलप्रवाह रोकने की जांच की मांग

पारसनाथ विश्वकर्मा ने पसाई के पास छलका बंद कर पानी रोककर मछली पकड़े जाने के आरोप की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि मछली पकड़ने के लिए जलप्रवाह रोका जा रहा है तो अवरोध तत्काल हटाया जाना चाहिए, ताकि पानी अपने प्राकृतिक रास्ते से आगे निकल सके।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को केवल जलभराव की स्थिति का निरीक्षण करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जलनिकासी के कारणों को भी दूर करना होगा। ड्रेन में मौजूद अवरोध हटाए बिना किसानों के खेतों से पानी निकालना मुश्किल होगा।

फसल बचाने के लिए तत्काल पानी निकालने की मांग

किसान नेता ने जिला प्रशासन से जलमग्न खेतों से तत्काल पानी निकालने की व्यवस्था कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि धान की फसल पहले से पानी में डूबी हुई है और समय बीतने के साथ फसल के खराब होने का खतरा बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जलभराव का मामला नहीं है, बल्कि किसानों की आजीविका से जुड़ा गंभीर विषय है। समय रहते पानी की निकासी नहीं हुई तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि ड्रेन की सफाई, गिरे पेड़ों की निकासी और जलप्रवाह को जल्द सुचारु नहीं किया गया तो किसानों का नुकसान बढ़ सकता है। अब ग्रामीणों और किसानों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।