दस बड़ी नहरों और सैकड़ों गांवों के पानी की निकासी का प्रमुख जरिया बदहाल, किसानों ने सफाई और तत्काल कार्रवाई की उठाई मांग
चंदौली। जिले के सबसे बड़े जलनिकासी मार्गों में शामिल अगहरबीर-बहुरिया ड्रेन इन दिनों भारी मात्रा में जलकुंभी से पटी हुई है। ड्रेन की बदहाल स्थिति को लेकर किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते ड्रेन की सफाई नहीं कराई गई तो बारिश के दौरान आसपास के गांवों और कृषि क्षेत्रों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के जिलाध्यक्ष पारस नाथ विश्वकर्मा ने अगहरबीर-बहुरिया ड्रेन की वर्तमान स्थिति का जायजा लेते हुए प्रशासन से तत्काल सफाई कराने की मांग की। उन्होंने बताया कि यह ड्रेन जिले के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलनिकासी मार्ग है। इसमें करीब दस बड़ी नहरों और माइनरों से निकलने वाला पानी पहुंचता है।
उन्होंने बताया कि धीना, डेढ़गावां माइनर, दिघवट, कवरुआ माइनर, बरंगा, पचंदेवरा, लेहरा, मनेहरा समेत कई क्षेत्रों की नहरों और जलनिकासी व्यवस्था का पानी इसी ड्रेन के माध्यम से आगे निकलता है। इसके अलावा चंदौली बाजार, औद्योगिक नगर और मुगलसराय क्षेत्र तक के जलनिकासी तंत्र के लिए भी अगहरबीर-बहुरिया ड्रेन महत्वपूर्ण मानी जाती है।
किसानों का कहना है कि ड्रेन में जगह-जगह जलकुंभी का अत्यधिक फैलाव हो गया है। इससे पानी के बहाव में बाधा उत्पन्न हो रही है। यदि ड्रेन की क्षमता के अनुरूप पानी का प्रवाह नहीं हुआ तो खेतों में पानी भरने के साथ ही आबादी वाले क्षेत्रों में भी जलभराव की स्थिति बन सकती है।
किसान नेताओं ने कहा कि अगहरबीर-बहुरिया ड्रेन केवल एक सामान्य नाला नहीं है, बल्कि जिले के बड़े हिस्से की जलनिकासी व्यवस्था का प्रमुख आधार है। इसके बावजूद लंबे समय से इसकी सफाई और उचित रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जलकुंभी और अन्य जलीय वनस्पतियों के कारण ड्रेन का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा है।
मौके पर किसानों और संबंधित लोगों ने ड्रेन की स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान राजेश प्रधान, पौनी, मेवालाल लेखपाल कटसील, जेई अजय कुमार, बंधी, रामुदीन, दीनदयाल, जयप्रकाश केसरी सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के जिलाध्यक्ष पारस नाथ विश्वकर्मा ने कहा कि किसानों की समस्या को देखते हुए ड्रेन की तत्काल जेसीबी और अन्य संसाधनों के माध्यम से सफाई कराई जानी चाहिए। साथ ही ड्रेन की गहराई और चौड़ाई की भी जांच कराकर जहां आवश्यकता हो, वहां सिल्ट और जलकुंभी हटाने का काम कराया जाए।
उन्होंने कहा कि जलनिकासी व्यवस्था किसी भी क्षेत्र की कृषि और जनजीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगहरबीर-बहुरिया ड्रेन में यदि इसी तरह जलकुंभी जमा रही तो बरसात के समय स्थिति गंभीर हो सकती है। खेतों में पानी जमा होने से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहेगी और ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
किसानों ने प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए ड्रेन की मौके पर जांच कराई जाए। इसके बाद जलकुंभी की सफाई, सिल्ट की निकासी और जलप्रवाह को सुचारु बनाने के लिए अभियान चलाया जाए।
किसानों का कहना है कि समय रहते अगहरबीर-बहुरिया ड्रेन की सफाई करा दी गई तो आने वाले दिनों में संभावित जलभराव की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। वहीं, यदि सफाई में देरी हुई तो इसका सीधा असर कृषि क्षेत्रों और आसपास के आबादी वाले इलाकों पर पड़ सकता है।