झारखण्ड l झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर पर सेना की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खरीदने और बेचने का आरोप है l
ईडी से पूछताछ खत्म होती और गिरफ्तारी की नौबत आती, उससे पहले ही हेमंत सोरेन ने वो कानूनी चाल चल दिया, कि बुधवार को ईडी के चार अधिकारी कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार और अमन पटेल के अलावा अज्ञात अधिकारियों को ही एससी-एसटी एक्ट के मुकदमा में फसा दिया l
जब साक्ष्य सबूतों को सामने रखकर जांच अधिकारियों ने हेमंत सोरेन से पूछताछ की तो वे सही जवाब नहीं दे पाए और घोटाले से अर्जित आय का संदिग्ध मनी ट्रांजेक्शन से जुड़ा होना पाया गया है. यानी पैसों का लेनदेन हुआ जो इस घोटाले से जुड़ा हुआ था. इसकी पूरी चेन जांच एजेंसी को मिल गई है. आरोप है कि गलत तरीके से हासिल की गई जमीनों पर सोरेन के परिवार और उनके करीबियों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण था. इसके भी पुख्ता सबूत मिले हैं.
सीधे जवाब नहीं दे पाए हेमंत सोरेन
ईडी सूत्रों का कहना है कि जब जांच अधिकारियों ने उनसे इसके बारे में सवाल किए तो वे सीधे जवाब नहीं दे पाए. इतना ही नहीं, मामले के मुख्य आरोपी प्रेम प्रकाश, अमित अग्रवाल और तत्कालीन डीसी छवि रंजन के साथ सोरेन के संबंध पाए गए हैं. जांच में पता चला है कि अवैध खनन में जांच के दौरान भी हेमंत सोरेन की भूमिका थी. जांच में सामने आया कि सोरेन का करीबी अमित अग्रवाल कथित तौर पर सोरेन और उनके करीबी सहयोगियों के ब्लैक मनी को मैनेज करता है.
काफी पहले से मौजूद थे सारे सबूत
सूत्रों के मुताबिक, ईडी के पास काफी पहले से सारे सबूत मौजूद थे. शुरुआती जांच में ही कड़ियां मिलती चली गईं. लेकिन उन्हें गिरफ्तार करने का फैसला बुधवार को सवाल जवाब के बाद ही लिया गया. जब वे सबूतों को नकारते नजर आए और जांच में सहयोग नहीं किया l सूत्रों के मुताबिक, जांच अधिकारियों के सवालों के भी सोरेन सही जवाब नहीं दे रहे थे. इससे पहले ईडी अधिकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर उनसे पूछताछ के लिए समय देने की मांग की थी. बाद में सोरेन ने इन अधिकारियों को 31 जनवरी की दोपहर एक बजे अपने आवास पर बुलाया था l
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, ''जब मैं रांची आया तो मैंने इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में खबर देखी कि ईडी के इन सभी अधिकारियों ने मुझे और मेरी पूरी कम्युनिटी को परेशान करने के लिए और छवि खराब करने के लिए दिल्ली के झारखंड भवन और नई दिल्ली के 5 बटा 1 शांति निकेतन में सर्च ऑपरेशन चलाया है.''
सीएम हेमंत सोरेन प्रार्थना पत्र में क्या लिखा था?
सीएम हेमंत सोरेन ने आगे लिखा, ''27 और 28 जनवरी को मैं दिल्ली के शांति निकेतन के 50 बटा 1 में गया था, जिसे झारखंड सरकार ने लीज पर ले रखा है. 29 जनवरी को मुझे पता चला कि मुझे बिना नोटिस दिए उस घर में सर्च ऑपरेशन किया गया है, जबकि मैं भी उस वक्त वहां मौजूद नहीं था. मुझे 29 जनवरी और 31 जनवरी को रांची में उन अधिकारियों के सामने मौजूद रहना था.''
हेमंत सोरेन के घर से कैश और बीएमडब्ल्यू कार जब्त होने की जो खबर सामने आई थी, शिकायत में उसका भी जिक्र है. हेमंत सोरेन ने लिखा, ''वो बीएमडब्ल्यू कार मेरी नहीं है, न ही वो पैसा मेरा है. ईडी के अधिकारी जो न तो शेड्यूल कास्ट के हैं और न ही शेड्यूल ट्राइब के उन्होंने मुझे प्रताड़ित करने के लिए ये सब किया है.''
ईडी के अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार
सीएम हेमंत सोरेन की इस शिकायत पर 31 जनवरी को ही एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज कर लिया गया है, जिसका केस नंबर 6/2024 है. सब इंस्पेक्टर दीपक कुमार राय को इस केस का जांच अधिकारी भी नियुक्त कर दिया गया है. अब इसकी वजह से ईडी के उन चार अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार और अमन पटेल पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है, जो हेमंत सोरेन से पूछताछ कर रहे हैं, क्योंकि एससी-एसटी एक्ट केस कहता है कि केस दर्ज होने के तुरंत बाद आरोपियों की गिरफ्तारी होती है और तब मामले में पूछताछ या फिर जांच की आगे की कार्रवाई की जाती है.
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